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अटल बिहारी वाजपेयी जयंती: जितनी बड़ी शख्सियत, उतने ही सहज-सरल

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती आज, उज्जैन से रहा है विशेष नाता, विभिन्न कार्यक्रमों शामिल हुए, कालिदास अकादमी की सौगात दी

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जयंती विशेष: उज्जैन के लड्डू-बाफले और ठंडाई के मुरीद थे अटलजी

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती आज, उज्जैन से रहा है विशेष नाता, विभिन्न कार्यक्रमों शामिल हुए, कालिदास अकादमी की सौगात दी

उज्जैन. पक्ष हो या विपक्ष, अटल बिहारी वाजपेयी का नाम राजनीति में एक अलग ही कद और सम्मान के साथ लिया जाता है। वे जितनी बड़ी शख्सियत रहे, उतने ही वे सहज-सरल भी थे। उज्जैन के परिपे्रक्ष्य में तो उनकी एेसी कई यादें है जो उनके प्रभावी व सरल व्यक्ति को स्पष्ट करती हैं। इतना ही नहीं उज्जैन से विशेष लगाव रखने वाले वाजपेयी का यहां के मालवी लड्डू-बाफले भी खासे पसंद थे।


ख्यात कवि और प्रखर वक्ता पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का उज्जैन से खास नाता रहा है। वे उज्जैन और यहां के साथी नेताओं को इतना अपना मानते थे कि बिन बुलाए किसी कार्यक्रम में जाने में भी हिचकिचाते नहीं थे। बुधवार को पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी की जयंती के अवसर पर पत्रिका ने उज्जैन में उनसे जुड़े कुछ एेसे ही किस्सों की जानकारी ली । एक रिपोर्ट-
बिन बुलाए शादी में पहुंचे
वर्ष 1974 में वे जनसंघ की राष्ट्रीय प्रतिनिधि सभा बैठक में शहर आए थे। पूर्व मंत्री बाबूलाल जैन के कहने पर वे क्षीरसागर क्षेत्र में डॉ. खण्डेराव महाडिक के बेटे के विवाह में पहुंच गए। वधु पक्ष के लोग महाराष्ट्र सरकार के कांग्रेस के मंत्री परिवार से थे। उनके पहुंचते ही शादी पर तो किसी का ध्यान नहीं रहा, सभी लोग उन्हें देखकर अचंभित हो गए। इसी तरह उज्जैन से उनका एक रिश्ता स्वाद को लेकर भी था। राज्यसभा सांसद डॉ सत्यनारायण जटिया के अनुसार जब भी वाजपेयीजी उज्जैन आते थे, मालवा के लड्डू-बाफले और ठंडाई जरूर लेते थे।
टावर पर दिया था भाषण
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत ने लोकसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर देश के कई शहरों में 101 गाडिय़ों के साथ जनादेश यात्रा निकाली थी। इस प्रसंग पर टॉवर चौक पर हुई सभा में अटलजी आए थे और जनता को संबोधित किया था।
जैन के समर्थन में किया था जनसंपर्क
वर्ष 1993 में विधानसभा चुनाव के दौरान बाबूलाल जैन महिदपुर विधानसभा से चुनाव लड़ रहे थे। उनके समर्थन में वाजपेयी भी महिदपुर पहुंचे ओर जनसंपर्क किया। उन्होंने महिदपुर में जनसभा ली, जिसमें दूरदराज के गांव के लोग उन्हें देखने-सुनने पहुंचे थे। जैन बताते हैं, तब पार्टी को मजबूती देने में उन्होंने देशभर में बहुत यात्राएं की। उनके आने से ही कार्यक्रमों की रंगत बढ़ जाती थी। इसी तरह एक बार वर्ष 2005 में पूर्व मंत्री बाबूलाल जैन स्वास्थ्य लाभ के लिए तीन दिन दिल्ली में थे। तब उन्होंने अटलजी के पीए को फोन पर आधे घंटे का समय मिलने के लिए चाहा। इस पर अटलजी बोले आधा घंटा उनका और आधा मेरा, एक घंटे का समय दे दो।
कालिदास अकादमी की रखी नींव
केंद्र सरकार में विदेश मंत्री रहते 1978 में अटलजी के करकमलों से ही कालिदास अकादमी की आधारशिला रखी गई। तब कार्यक्रम में उन्होंने मंच से कालिदास की रचनाओं पर आधारित 30 मिनट का सतत भाषण दिया था। 1956 में शासकीय माधव ऑट्र्स कॉलेज के कवि सम्मेलन में वे बतौर कवि शहर आए थे। उस वक्त के देश के जाने-माने कवियों में शुमार थे। पद्भूषण शिवमंगल सिंह सुमन भी इस कार्यक्रम में उपस्थित थे।