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बिलखते परिवार ने कहा, अस्पताल ने छीन ली हमारी मासूम की जिंदगी

22 दिन की मासूम को लेकर अस्पताल में बिलखती रही दादी, नहीं मिला इलाज, थम गई सांस, चरक अस्पताल में लापरवाही से शिशु की मौत।

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Lalit Saxena

Dec 29, 2016

charak hospital negligence infant's death

charak hospital negligence infant's death

उज्जैन. चरक अस्पताल में तीन दिन के भीतर मानवता को शर्मसार करने वाला एक और मामला सामने आया है। 22 दिन की मासूम को गंभीर हालत में लेकर पहुंची दादी और अन्य परिजन इलाज के लिए इधर से उधर ढाई घंटे तक भटकते रहे, लेकिन डॉक्टर नहीं मिले। इस बीच उसकी सांस थम गई। बिलखती दादी ने कहा जहां बेटी के उपचार के लिए आए थे, वहीं उसकी मौत का जिम्मेदार हैं।

दीपिका को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी
उदयन मार्ग स्थित पूनम अपार्टमेंट निवासी अनुराधा पति गौरव ठाकुर की 22 दिन की बेटी दीपिका को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। गुरुवार सुबह 5 बजे परिजन जागे तो उन्होंने देखा कि दीपिका की हालत गंभीर है। सुबह 6 बजे दादी लक्ष्मी पति अनिल ठाकुर दीपिका को चरक अस्पताल में लेकर पहुंचे, लेकिन वहां कोई डॉक्टर नहीं था। एसएनसीयू वार्ड ( गहन शिशु चिकित्सा इकाई) में भी कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। चाचा शुभम ने बताया चरक में कोई डॉक्टर नहीं मिलने पर वे जिला अस्पताल पहुंचे। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टर ने बेटी को तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक को दिखाने की सलाह दी और चरक में ले जाने के लिए कहा। पुन: चरक अस्पताल पहुंचने पर डॉ. राहुल गुप्ता को फोन किया। उन्होंने आधे घंटे बाद आने के लिए कहा, लेकिन नहीं आए। 8.30 बजे डॉ. एमडी शर्मा ने दीपिका का चेकअप कर उसे मृत घोषित कर दिया।

24 घंटे हैं उपस्थित रहने के निर्देश
एसएनसीयू वार्ड में 0 से 28 दिन के गंभीर शिशु को उपचार दिया जाता है। शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए शासन द्वारा सबसे ज्यादा एसएनसीयू वार्ड पर ही ध्यान दिया जा रहा है। यहां 24 घंटे तीन शिफ्ट में डॉक्टर के उपस्थित रहने के निर्देश हंै, लेकिन वार्ड में आए दिन डॉक्टर के नहीं मिलने के कारण विवाद की स्थिति निर्मित हो रही है।



charak hospital negligence infant

मेरी ड्यूटी नहीं थी
" मेरी कल रात को ड्यूटी नहीं थी। जब परिजनों का फोन आया तब मैं स्नान कर रहा था। कॉल बेक करने पर जानकारी मिली कि डॉक्टर ने शिशु को मृत घोषित कर दिया है।" - डॉ.राहुल गुप्ता, मेडिकल ऑफिसर

" मैं तीन दिन के अवकाश पर हूं। परिजन द्वारा बच्चे को मृत लाए जाने की जानकारी मिली है। उसमें धड़कन नहीं था। विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. एमडी शर्मा ने उसका चेकअप किया था। दो डॉक्टर अवकाश पर होने की वजह से बुधवार को नाईट में कॉल ड्यूटी थी।" - डॉ. अशोक मित्तल, एसएनसीयू वार्ड प्रभारी

" जब मैंने चेकअप किया तब शिशु की मौत हो चुकी थी। मौत कितनी देर पहले हुई इसकी जानकारी नहीं है।" - डॉ. एमडी शर्मा, विशेषज्ञ चिकित्सक

" घर से जब निकले तो उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। चरक अस्पताल में उसे इलाज के लिए लाए थे, लेकिन डॉक्टर और स्टाफ की लापरवाही की वजह से उसकी जान गई।" - लक्ष्मी ठाकुर, दीपिका की दादी

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