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उज्जैन. छठ पर्व बदलते दौर के साथ अब यह स्टाइलिश हो गया है। अब बाजार में पीतल के डिजाइनर सूप के साथ, चांदी के कलश और सूप घुंघरू व लटकन में मिल रही है। वहीं बाजार में ३५० रुपए से लेकर १००० हजार तक की रेंज में उपलब्ध है। साधारण डलिया और मिट्टी की सजावट वाली कोसी बाजार में २५१ रुपए की रेंज में खूब बिक रही। पूजन के उपयोग में आने वाली हल्दी १० रुपए जोड़ा, सुथली, आलु २० पाव, आंवला २० रुपए किलो बिके।
शिप्रा तट पर होगा पूजन
छठ महापर्व को लेकर शिप्रा तट रामघाट पर उपासकों का मेला गुरुवार शाम को लगेगा। शाम ४ बजे से सूर्य को अघ्र्य देने बैंड बाजों व ढोल ताशों के साथ उपासक पहुंचेंगे। महापर्व की पूर्व संध्या पर बुधवार को पूजन सामग्री की खरीदी के लिए बाजार में लोगों की भीड़ दिखाई दी।
फल व जमीकंद की मांग बढ़ी
विशेषकर फल व जमीकंद वाली सब्जियों की मांग अधिक रही। बुधवार शाम को व्रतियों ने अरवा चावल व गुड़ की खीर बनाकर सूर्य भगवान का स्मरण कर ३६ घंटों तक निर्जला व्रत करने का संकल्प लिया। देर शाम से ही व्रतियों के घरों से घी की पूजन सामाग्री बनाने की तैयारी शुरू हुई। महिलाओं ने परपंरागत ठेकुआ, कसार (पीसे हुए चावल से बने लड्डू), गुजिए, शकर पारे बनाए। इन्हें ही प्रसाद के रूप में फलों के साथ वितरित करने की परपंरा है।
पहला अघ्र्य गुरुवार शाम ४ बजे
गुरुवार शाम ४ बजे से व्रतियां सूप व दउरा में फल, ठेकुआ, कसार व नारियल आदि रख पानी में खड़े होकर अस्ताचलगामी (सूर्यास्त) को अघ्र्य अर्पित करेंगी। वहीं शुक्रवार अलसुबह उगते सूर्य को अघ्र्य अर्पित करने के बाद व्रतियों का अनुष्ठान पूरा होगा। समाजजनों द्वारा चल समारोह निकाला जाएगा। शहर में करीब २५ हजार से अधिक लोगों के रामघाट पहुंचने का अनुमान है। घाटों से जाने के बाद मन्नत करने वाले उपासक अपने-अपने घरों में कोसी (सभी प्रकार के फलों को मिट्टी के कलश में रखकर लोक गीतों का महिलाओं द्वारा गाया जाना) भरने की रस्म अदा करेंगे। अलसुबह ४ बजे पुन: उदय होते सूर्य को अध्र्य देने के लिए आराधक घाटों का रुख करेंगे।
चार दिवसीय छठ पर्व शुरू
चार दिवसीय पर्व छठ शुरू हुआ। बिहार, झारखंड और उत्तर भारत के लोगों ने बुधवार को खरना के दिन उपवास की शुरुआत की। गुरुवार को पूजन-अर्चन के साथ डूबते सूरज को अघ्र्य दिया जाएगा। छठ पर्व के क्रम में खरना के दिन उपवास शुरू हुआ। महिलाओं ने उपवास किया। शाम के वक्त छठी माता को गुड़ वाली खीर और रोटी से बना प्रसाद चढ़ाया। साथ ही छठी मां को फल अर्पित किए। महिलाओं द्वारा पहले अघ्र्य के दिन बांस की टोकरी में अघ्र्य का सूप सजाया जाएगा। शाम को व्रतियां नदी, सरोवर किनारे घाट पर एकत्र होकर डूबते हुए सूर्य को अघ्र्य प्रदान करेंगी। शुक्रवार को सूर्योदय से पहले ही व्रतियां घाट पर एकत्र होकर उगते सूरज को अघ्र्य देकर व्रत पारण करेंगी।
Published on:
26 Oct 2017 12:00 pm
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