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Health: सिर्फ आधे घंटे में पाएं शिल्पा शेट्टी जैसी फिटनेस

रोजाना 30 मिनट योगा करने से शरीर में रहती है कसावट, गंभीर बीमारियों से लडऩे में भी कारगर है योग

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Health: सिर्फ आधे घंटे में पाएं शिल्पा शेट्टी जैसी फिटनेस

रोजाना 30 मिनट योगा करने से शरीर में रहती है कसावट, गंभीर बीमारियों से लडऩे में भी कारगर है योग

उज्जैन. योग, इसका मतलब होता है जोड़ या जुड़ाव। यह किसी भी रूप में हो सकता है। ईश्वर से जुड़ाव, तन से जुड़ाव, मन से जुड़ाव। योग एक आध्यात्मिक प्रकिया है, जिसमें शरीर, मन और आत्मा को एक साथ लाया जाता है। योग हमें खुद से भी मिलाता है और ईश्वर की अनुभूति भी करवाता है। यह एक प्राचीन कला या विद्या है, जिससे शरीर को निरोगी रखा जा सकता है। हालांकि अब समय के साथ-साथ इसका रूप भी बदला है, लेकिन इसके गुण आज भी वही है। इस दौर में जब लोग बीमार होने के बाद महंगे अस्पतालों का रूख करते हैं, ऐसे में योग ही है, जिसके माध्यम से अस्पतालों में होने वाले खर्च को कम किया जा सकता है। मतलब कई तरह के योग आसन के माध्यम से बीमारी को दूर भगाया जा सकता है। साथ ही शरीर में कसावट भी योग से आती है। फिल्म अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी भी रोजाना योग करती हैं, तभी उनका जीरो फिगर है। वे चाहे जहां भी रहें, योगा करना कभी नहीं भूलती हैं। अगर आप भी शिल्पा शेट्टी जैसी फिटनेस चाहते हैं तो रोजाना सिर्फ आधा घंटा योग करें। यह संपूर्ण सेहत के लिए फायदेमंद है।
यह हैं आसान से योग, इनसे होता है यह फायदा
उज्जैन की योग प्रशिक्षक भारती शर्मा कुछ आसान से योग और उसके फायदे पत्रिका के पाठकों को बता रही है, जो हर कोई व्यक्ति घर पर आसानी से कर सकता है। बस अपनी व्यस्त दिनचर्या में से स्वास्थ्य के लिए कुछ समय निकालने की जरूरत है।
ताड़ासन: इस आसन के अभ्यास से स्थायित्व व शारीरिक दृढ़ता प्राप्त होती है। यह मेरुदंड से संबंधित नाडिय़ों के रक्त संचय को ठीक करने में भी सहायक है। एक निश्चत उम्र तक यह लंबाई बढ़ाने में भी सहायक है। यह खड़े होकर किए जाने वाले सभी आसनों का आधार है।
वृक्षासन: इस आसन के अभ्यास की अंतिम अवस्था में शारीरिक स्थिति पेड़ के आकार की बनती है। यह आसन तंत्रिका से संबंधित स्नायुओं के समन्वय और शरीर को संतुलित बनाने, सहनशीलता, जागरुकता एवं एकाग्रता बढ़ाने में सहायक हैं। पैरों की मांसपेशियों को गठीला बनाता है।
अर्धचक्रासन: अर्ध शब्द का अर्थ है आधा चक्र का अर्थ है पहिया। इस आसन में शरीर आधे पहिए की आकृति जैसा बनता है। इस आसन से मेरुदंड लचीला बनता है। कमर की मांसपेशियां मजबूत बनती है, श्वसन की क्षमता बढ़ती है, सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस में यह लाभकारी है।
त्रिकोणासन: त्रिकोणासन का अर्थ है त्रि अर्थात तीन कोणों वाला। यह आसन पैरों के तलवे से संबंधित विसंगितयों से बचाता है। पिंडली, जांघों व कटि भाग की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। मेरुदंड को लचीला बनाने के साथ ही फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है। लंबर स्पोंडिलोसिस में सहायक है।
वज्रासन: यह आसन ध्यान के लिए किए जाने वाले आसनों में से एक है। इस आसन से जांघ और पिंडली की मांसपेशियां मजबूत होती है। पाचन शक्ति बढ़ती है। यह शरीर को सुदृढ़ता प्रदान करता है और मेरुदंड को स्वस्थ रखने में सहायता करता है। भोजन करने के बाद इसे किया जाता है।
अर्धउष्ट्रासन: उष्ट्र शब्द का अर्थ है ऊंट। इस आसन के अभ्यास की अंतिम अवस्था ऊंट के कूबड़ या उभार जैसी बनती है।इस योग के अभ्यास से पीठ और गर्दन की मांसपेशियां मजबूत होती है। कब्ज और पीठ दर्द खत्म होता है। सिर और हृदय क्षेत्र में रक्त संचार होता है। यह योगाभ्यास हृदय रोगियों के लिए लाभदायक है।
पवनमुक्तासन: पवन शब्द का अर्थ है वायु और मुक्त शब्द का अर्थ है छोडऩा या मुक्त करना। इस आसन से कब्जियत दूर होती है, वात से राहत मिलती है। उदर का फैलाव कम होता है। पाचन क्रिया में सहायक है। गहरा आंतरिक दबाव उत्पन्न होने से श्रोणि व कटिक्षेत्र में मांसपेशी, लिगामेंट्स और स्नायु की जटिल समस्याओं का निदान करने के साथ पीठ की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है।

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