
शिक्षा, कला, संस्कृति, साहित्य और समाज के लिए भाषा और शब्दों के अनुवाद का अपना ही महत्व है
उज्जैन. शिक्षा, कला, संस्कृति, साहित्य और समाज के लिए भाषा और शब्दों के अनुवाद का अपना ही महत्व है। अनुवाद एक बहुउपयोगी विधा हीं नहीं रोजगार का साधन भी है। प्रतिवर्ष 30 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय अनुवाद दिवस (वल्र्ड ट्रांसलेशन डे) के रूप में मनाया जाता है। अनुवाद दिवस बाइबल के अनुवादक सेंट जीरोम की स्मृति में मनाया जाता है।
भूमंडलीकरण की प्रगति के युग में अनुवाद कार्य तेजी से बढ़ रहा है। देश में दूरस्थ शिक्षा का विस्तार हुआ है, यहां बनने वाली अध्ययन सामग्री में अनुवाद का काम भी काफी बढ़ा है। विज्ञापन के क्षेत्र में अनुवाद का रोल अहम है। दूतावासों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यवसाय, सांस्कृतिक और राजनीतिक स्तर पर एक-दूसरे से जोडऩे के लिए अनुवाद की जरूरत होती है। अनुवाद की कला में दक्ष युवाओं के लिए आज विभिन्न सरकारी संस्थाओं, निजी संस्थाओं, कंपनियों और बैंकों में काम के कई अवसर हैं। सरकारी स्तर पर अनुवाद जगह-जगह तो होते ही हैं, इसके अलावा शिक्षण संस्थानों में तुलनात्मक साहित्य के अध्ययन में अनुवाद की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। आजकल इंटीरियर डेकोरेशन और ड्रेस डिजाइनिंग जैसे क्षेत्रों में भी अनुवादक की जरूरत पड़ रही है।
अनुवाद एक अनिवार्य आवश्यकता
मौजूदा दौर में अनुवाद एक अनिवार्य आवश्यकता बन गया है। भारत जैसे बहुभाषी देश के जनसमुदायों के बीच अंतरूसंप्रेषण के संवाहक के रूप में अनुवाद का बहुआयामी प्रयोजन सर्वविदित है। यदि आज के इस युग को अनुवाद का युग कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। आज जीवन के हर क्षेत्र में अनुवाद की उपादेयता को सहज ही सिद्ध किया जा सकता है। धर्म-दर्शन, साहित्य, शिक्षा, विज्ञान, तकनीकी, वाणिज्य व्यवसाय, राजनीति-कूटनीति, आदि सभी क्षेत्रों से अनुवाद का अभिन्न संबंध रहा है। चिंतन और व्यवहार के प्रत्येक स्तर पर आज मनुष्य अनुवाद पर आश्रित है। इतना ही नहीं विश्व संस्कृति के विकास में भी अनुवाद की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। परस्पर एक-दूसरे को जोडऩे में और संवाद स्थापित करने में अनुवादक की भूमिका बहुत अहम हो गई है। हमारे विकास में भाषाओं ने एक बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। उन्होंने बड़ी ही सुंदरता से हमारी संस्कृति, व्यवहारों और संकेतों को प्रतीकों के तौर पर बदल दिया है।
डॉ.राजेश्वर शास्त्री मूसलगांवकर, विक्रम विवि संस्कृत, वेद, ज्योर्तिविज्ञान
युवा कॅरियर बना सकता है
आज जब दुनिया एक साथ करीब आती है तब भाषाओं के बीच अनुवादों ने कारोबार और एक दूसरे की संस्कृति की सामान्य समझ को सरल बना दिया है। इसी तरह से विभिन्न देशों और संस्कृतियों के लोगों के साथ विचारों, आस्थाओं के साझा करना सरल हो जाता है।
अनुवादक की हर जगह जरूरत पड़ रही है। कोई भी युवा इस क्षेत्र में अपना उज्ज्वल कॅरियर बना सकता है। अनुवादक एक अच्छे इंटरप्रेटर यानी भाषांतर एक भाषा का दूसरी भाषा में मौखिक रूपांतरण करने की भूमिका भी निभा सकता है।
इंटरप्रेटर का काम तात्कालिक है, वह किसी भाषा को सुनकर, समझकर दूसरी भाषा में तुरंत उसका मौखिक तौर पर रूपांतरण करता है। कॅरियर के लिहाज से देंखे तो इंटरप्रेटर को लोकसभा में प्रथम श्रेणी के अधिकारी का दर्जा प्राप्त है।
एक प्रोफेशनल अनुवादक बनने के लिए कम से कम स्नातक होना जरूरी है। इसमें दो भाषाओं के ज्ञान की मांग की जाती है।
डॉ.स्वामीनाथ पांडे, साहित्यकार
Published on:
30 Sept 2019 08:00 am
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