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बच्चों को नहीं मिलता महाकाल का ये प्रसाद….

यह खास प्रसाद सिर्फ बड़ों और शौकीनों को ही दिया जाता है, इसे बच्चों से दूर रखा जाता है।

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उज्जैन. आपको जानकर आश्चर्य होगा कि राजाधिराज भगवान महाकालेश्वर मंदिर में मिलने वाला यह खास प्रसाद सिर्फ बड़ों और शौकीनों को ही दिया जाता है, इसे बच्चों से दूर रखा जाता है। जी हां, ये भांग का प्रसाद भगवान महाकालेश्वर मंदिर में संध्या आरती के बाद कुछेक दर्शनार्थियों और पंडे-पुजारियों में ही बंट जाता है।

प्रतिदिन होता है भांग शृंगार
मप्र के उज्जैन शहर में बाबा महाकालेश्वर के मंदिर में प्रतिदिन संध्या आरती के दौरान भांग और ड्रायफ्रूट का शृंगार किया जाता है। इस शृंगार में उपयोग होने वाली भांग को शृंगार के बाद प्रसाद के रूप में भक्तों में बांटा जाता है। दर्शन करने आए इसका सेवन करने वाले शौकीन भक्त और मंदिर के पंडे-पुजारियों में ही यह प्रसाद बांट दिया जाता है, इस प्रसाद से बच्चों को विशेषतौर पर दूर ही रखा जाता है।

पांच किलो भांग और डेढ़ किलो ड्रायफ्रूट
राजाधिराज भगवान महाकालेश्वर के प्रतिदिन होने वाले इस खास शृंगार में हर दिन लगभग 5 किलो भांग और करीब डेढ़ किलो ड्रायफ्रूट का उपयोग किया जाता है। पुजारी प्रदीप गुरु के अनुसार संध्या आरती के दौरान यह शृंगार प्रतिदिन किया जाता है। भक्त अपने द्वारा भी यह शृंगार करवा सकते हैं, इसकी राशि मंदिर में जमा करवाकर यह शृंगार वे अपने नाम से भी करवा सकते हैं।

दो घंटे में तैयार होता है शृंगार
महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन संध्या आरती के दौरान किए जाने वाले इस विशेष भांग शृंगार को करने में लगभग दो घंटे का समय लग जाता है। पुजारी विजय गुरु ने बताया कि शृंगार बनाते समय हम कुछ भी आकृति मन में सोच लेते हैं, उसी अनुरूप बाबा का शृंगार हो जाता है। पहले से कुछ भी तय नहीं रहता है कि आज किस प्रकार का शृंगार किया जाएगा। यह सब उसी क्षण हो जाता है। भांग का शृंगार सबसे आकर्षित करने वाला होता है।

भस्म आरती में भी होता है भांग शृंगार
सुबह 4 बजे प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती के दौरान भी भांग शृंगार किया जाता है। भस्मी चढ़ाने के बाद बाबा का मुखारविंद उकेरा जाता है, जिसके बाद झांझ-डमरू और नगाड़ों की गूंज के साथ बाबा महाकाल की विशेष आरती होती है।

दिनभर में पांच शृंगार
राजाधिराज भगवान महाकालेश्वर के दरबार में दिनभर में पांच शृंगार और आरती होती है। पुजारी आशीष गुरु ने बताया कि बाबा महाकाल सुबह 4 बजे से लेकर रात 11 बजे तक अपने भक्तों को पांच स्वरूपों में दर्शन देते हैं। भगवान महाकालेश्वर की सबसे प्रथम आरती भस्म आरती होती है, इसके बाद प्रात:कालीन आरती, दद्योदक आरती, भोग आरती, संध्या आरती और सबसे आखिर में शयन आरती की जाती है।

वर्ष में एक बार ही दिन में होती है भस्म आरती
वर्ष में केवल एक बार ही ऐसा अवसर आता है, जब बाबा महाकालेश्वर की भस्म आरती दोपहर में होती है। शिवरात्रि के समय यह होता है। इस पर्व पर बाबा महाकाल दूल्हा स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। सवा क्विंटल फूलों का पुष्प मुकुट बाबा महाकाल धारण करते हैं। सेहरा उतरने के बाद दोपहर के समय यह आरती की जाती है।

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