
MP Police (फोटो: सोशल मीडिया)
MP Police- मध्यप्रदेश में पुलिसकर्मियों के आधिकारिक लिबास में जूते भी अनिवार्य रूप से शामिल किए गए हैं पर इनकी गुणवत्ता पर विशेष ध्यान नहीं दिया जाता है। इससे पुलिसकर्मियों की परेशानी बढ़ गई है। उन्हें दिए गए जूते ज्यादा ठोस हैं जोकि पुलिसकर्मियों को भारी पड़ रहे हैं। उनकी कमर से लेकर गर्दन तक में असहनीय दर्द हो रहा है। उज्जैन में पुलिसकर्मियों के वेलनेस कैंप में यह समस्या सामने आई जहां अधिकांश महिला पुलिसकर्मी ने दर्द की शिकायत की। विशेषज्ञों का कहना है कि रिजिड सोल व कम कुशनिंग वाले फुटवियर के कारण ये परेशानियां पैदा हो रहीं हैं। इसने न केवल शरीर के बायो मैकेनिक्स प्रभावित हो रहे हैं बल्कि मस्कुलोस्केलेटल डिसऑर्डर का खतरा भी बढ़ रहा है। लंबी ड्यूटी के कारण लगातार जूते पहनना मजबूरी होती है जिससे दर्द बढ़ रहा है। एक्सपर्ट बताते हैं कि पुलिसकर्मियों की परेशानी खत्म करने के लिए उन्हें इंटरनेशनल मानकों के अनुरूप जूते दिए जाने चाहिए।
लंबी ड्यूटी के दौरान पहने जाने वाले कठोर जूते पुलिसकर्मियों के लिए परेशानी खड़ी कर रहे हैं। उज्जैन पुलिस लाइन में लगे वेलनेस कैंप में यह समस्या सामने आई है। कैंप में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी कमर, एड़ी, घुटनों और गर्दन के दर्द की शिकायत लेकर पहुंचे। इनमें अधिकांश महिला पुलिसकर्मी शामिल थीं।
विशेषज्ञों की मानें तो रिजिड सोल व कम कुशनिंग वाले फुटवियर शरीर के बायोमैकेनिक्स को प्रभावित करते हैं। इनसे कई परेशानियां पैदा होती हैं। मस्कुलोस्केलेटल डिसऑर्डर का खतरा बढ़ता है। 10 से 12 घंटे तक खड़े रहने या पैदल गश्त करने से पैरों की प्राकृतिक शॉक अब्सॉर्ब करने की क्षमता कम होती है। प्लांटर फेशिआइटिस, घुटनों पर दबाव और रीढ़ पर अतिरिक्त लोड बढ़ता है।
फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. नम्रता सामरिया ने बताया, कैंप में एड़ी, कमर और घुटनों के दर्द के सबसे अधिक मामले सामने आए। वहीं, ऑर्थोपेडिक डॉ. नीरज नागर का कहना है, अंतरराष्ट्रीय एर्गोनॉमिक मानकों के अनुरूप शॉक-एब्जॉर्बिंग, फ़्लेक्सबल
सोल और कस्टम आर्च सपोर्ट वाले फुटवियर को प्राथमिकता दें, ताकि पुलिसकर्मियों की कार्यक्षमता और स्वास्थ्य दोनों सुरक्षित रह सकें।
Published on:
24 Mar 2026 06:55 am
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