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तपोवन हरिद्वार के संत भिक्षुजी महाराज को उज्जैन में मानद उपाधि से किया अलंकृत

उज्जैन की संस्था अनुष्ठान मंडपम् ज्योतिष अकादमी द्वारा महाराजश्री के कार्यों से प्रभावित होकर प्रज्ञा पुरुष एवं परमार्थ मूरती की मानद उपाधि से अलंकृत किया गया।

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उज्जैन. तपोवन हरिद्वार के संत डॉ. दिव्यानंदजी भिक्षु महाराज उज्जैन पधारे। उन्होंने अलखधाम स्थित साईं मंदिर पर गीता विहारी ज्ञान विद्यापीठ उज्जैन व मंथन आई हेल्थ केयर फाउंडेशन की ओर से आयोजित मुख एवं दंत रोग चिकित्सा शिविर में भाग लिया। इस मौके पर उज्जैन की संस्था अनुष्ठान मंडपम् ज्योतिष अकादमी द्वारा महाराजश्री के कार्यों से प्रभावित होकर प्रज्ञा पुरुष एवं परमार्थ मूरती की मानद उपाधि से अलंकृत किया गया।

परमार्थ कार्यों में रहते सदैव तत्पर
संत भिक्षुजी महाराज सदैव परमार्थ कार्यों में संलग्न रहते हैं। महाराजश्री ने अनेक धार्मिक आध्यात्मिक एवं चिकित्सा शिविरों के माध्यम से जनमानस की सेवा की है। साथ ही निराश्रित बच्चों, वृद्धाश्रम, गोशाला के साथ ही संस्कृति संरक्षण हेतु जनमानस को प्रेरित किया है। अत: उज्जैन की संस्था अनुष्ठान मंडपम् ज्योतिष अकादमी द्वारा महाराजश्री के कार्यों से प्रभावित होकर प्रज्ञा पुरुष एवं परमार्थ मूरती की मानद उपाधि से अलंकृत किया है। इस अवसर पर संस्था अध्यक्ष ज्योतिषाचार्य पं. श्यामनारायण व्यास, सेवानिवृत जिला न्यायाधीश करुणा त्रिवेदी, प्रकाश सिंहल, ओमप्रकाश बंसल, रविंद्र त्रिवेदी, राजपालसिंह सिसोदिया एडवोकेट, महावीर प्रसाद वशिष्ठ, हुकुमचंद सोनी, महेश, हुकुम बंसल, कमलेश, मिथिलेश त्रिवेदी, कैलाश पाटीदार, मुक्तेश त्रिवेदी, डॉ. अचला शर्मा, डॉ. मनु शर्मा आदि उपस्थित रहे।

संयम से जीवन हो, तो औषधियों की आवश्यकता नहीं
अष्टांग योग में प्रथम संयम और नियम पालन करने वाला योगी माना गया है। ऐसे संयमी को ही आसन और फिर प्राणायाम करने का अधिकार है। यदि कोई संयम से जीवन व्यतीत करता हो, तो उसे औषधियों की बहुत कम आवश्यकता रह जाएगी। यह बात तपोवन हरिद्वार के संत दिव्यानंद भिक्षु महाराज ने अलखधाम स्थित साईं मंदिर पर गीता विहारी ज्ञान विद्यापीठ उज्जैन व मंथन आई हेल्थ केयर फाऊंडेशन की ओर से आयोजित मुख एवं दंत रोग चिकित्सा शिविर में कही।

यह भी कहा संतश्री ने
संतश्री ने कहा कि आजकल नेत्र रोग, मुख एवं दंत रोग, शुगर-हार्ट अथवा दमा और अन्य बीमारी के लिए शिविर क्यों लगाने पड़ रहे हैं। दरअसल, मानव जागरूक नहीं है और जीवन के तौर तरीके संयमित नहीं हैं। चिकित्सा शिविरों की जरूरत कम हो जाए, यदि जीवन में जागरूकता आ जाए। महाराज ने कहा कि समस्त गुण होने के बावजूद भी यदि कोई व्यक्ति सतर्क नहीं, सावधान नहीं रहता है, तो निश्चित ही वह जीवन में परास्त होगा यानी बीमार होगा। मार्ग धर्म का हो या चिकित्सा का सावधानी तो हमें कई प्रकार के क्लेशों से बचा सकती है। शिविर का शुभारंभ सत्र न्यायाधीश करुणा त्रिवेदी ने किया। शिविर में डॉ. मनु शर्मा एवं डॉ. संजय जोशी को दिव्यानंदजी भिक्षु महाराज ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। वैदिक पूजन अवंतिका ज्योतिष अकादमी के अध्यक्ष पंडित श्याम सुंदर ने कराया। इस अवसर पर रवि राय, कैलाश पाटीदार, परमजीत सिंह बग्गा, अजय वाघे, अनिल मेहर, सुनील पंडया आदि उपस्थित थे।

बाबा गुमानदेव हनुमान परिवार के पत्रक का विमोचन
श्री हनुमान प्राकट्य दिवस पर महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज, महामंडलेश्वर शांतानंद महाराज एवं ज्योतिषाचार्य पं. श्यामनारायण व्यास द्वारा विश्व के प्रथम श्रीहनुमान चालीसा से मेडिटेशन केंद्र शांतम सम्पन्न हुआ। इस अवसर संस्था अध्यक्ष पं. चंदन व्यास, आभा मेहता, स्वामी मुस्कुराके, कमलेश त्रिवेदी, डॉ. मोहन यादव, पारस जैन आदि नगर के गणमान्यजन उपस्थित रहे।