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सावन की तीसरी सवारी : शिव तांडव का साक्षी बना जनसैलाब

भोले के भक्त भी भोले हैं। प्रशासन ने 7 किलोमीटर पैदल चलाकर बाबा महाकाल की झलक दिखाई। अव्यवस्थाओं के बीच भी भक्तों के हाव-भाव यही बयान कर रहे थे कि हे भोलेनाथ! तेरे लिए चलना भी स्वीकार। बस एक झलक देखने को मिल जाए तो जीवन धन्य मान लेंगे। तीसरी सवारी में शिव तांडव का साक्षी बनने जनसैलाब उमड़ पड़ा। आस्था ने सारी सरहदें पार कर दीं..

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सावन की तीसरी सवारी : शिव तांडव का साक्षी बना जनसैलाब

भोले के भक्त भी भोले हैं। प्रशासन ने 7 किलोमीटर पैदल चलाकर बाबा महाकाल की झलक दिखाई। अव्यवस्थाओं के बीच भी भक्तों के हाव-भाव यही बयान कर रहे थे कि हे भोलेनाथ! तेरे लिए चलना भी स्वीकार। बस एक झलक देखने को मिल जाए तो जीवन धन्य मान लेंगे। तीसरी सवारी में शिव तांडव का साक्षी बनने जनसैलाब उमड़ पड़ा। आस्था ने सारी सरहदें पार कर दीं..

उज्जैन. भोले के भक्त भी भोले हैं। प्रशासन ने 7 किलोमीटर पैदल चलाकर बाबा महाकाल की झलक दिखाई। अव्यवस्थाओं के बीच भी भक्तों के हाव-भाव यही बयान कर रहे थे कि हे भोलेनाथ! तेरे लिए चलना भी स्वीकार। बस एक झलक देखने को मिल जाए तो जीवन धन्य मान लेंगे। तीसरी सवारी में शिव तांडव का साक्षी बनने जनसैलाब उमड़ पड़ा। आस्था ने सारी सरहदें पार कर दीं...
सावन की तीसरी सवारी में पिछली दो सवारियों के मुकाबले आस्था ने सभी सरहदें पार कर दीं। भोले-भाले भक्तों के साथ भोलेनाथ जब सोमवार को सवारी शहर का हाल जानने निकले तो हर उम्र के लोग सिर्फ झलक पाने को आतुर हो गए। उनके स्वरूप को आंखों रूपी कैमरे में कैद करने को उमड़ पड़े। ऐसे में मुख्यमंत्री ने पत्नी और बेटे के साथ हाजिरी लगाकर आयोजन का और अनूठा बना दिया।
सावन के तीसरे सोमवार पर शहर में हर तरफ भोले के भक्तों की भीड़ रही। अलसुबह से ही हजारों लोग महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए पहुंच गए। कर्कराज मंदिर से हरसिद्धि, हरसिद्धि से जिगजेक, जिगजेक से फिर बैरिकेड्स, इसमें चलते हुए फैसेलिटी सेंटर, यहां फिर जिगजेक, इसके बाद पुरानी टनल से होकर मंदिर परिसर के नवग्रह मंदिर के समीप से होते हुए श्रद्धालुओं को कार्तिकेय मंडपम् से दर्शन कराए और तुरंत बाहर निकाल दिया। उन्हें यह पता भी नहीं चला कि कब महाकाल के दर्शन हो गए। तीसरी सवारी में बाबा महाकाल की एक झलक पाने के लिए भक्तों में दीवानगी नजर आई। जिसे जहां जगह मिली, वहां चढ़ गया। बच्चे बैरिकेड्स की भीतर घुस गए, तो कुछ महिलाओं ने ऊपर की जाली ही तोड़ दी। कुछ लोग तो मंदिरों के शिखर पर खड़े होकर बाबा की झलक पाना चाहते थे। शाम 4 बजे श्री महाकालेश्वर भगवान की सवारी नगर भ्रमण पर निकली। पालकी में श्री चंद्रमौलेश्वर, हाथी पर मनमहेश विराजित थे। मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया।
शहर के हर रास्ते पर ट्रैफिक जाम, लोग चल-चलकर थक कर हुए चूर
सावन के तीसरे सोमवार को प्रशासन की व्यवस्था फेल नजर आई। हर गली, हर रास्ते पर जाम लगा था। लोग पैदल चल-चलकर परेशान और थककर चूर हो गए। बुजुर्गों और बच्चों की हालत पस्त हो गई। एक बार जो व्यक्ति बैरिकेड्स में लगा, फिर भले ही इमरजेंसी हो, बाहर नहीं निकल सका। इधर, प्रोटोकॉल से आने वाले दर्शनार्थियों को भारी परेशानी हुई। फैसेलिटी सेंटर से इन्हें हर दिन प्रवेश दिया जा रहा था, लेकिन सोमवार को इस गेट पर ताले जड़ दिए, जिनके पास एंट्री पास या ड्यूटी पास थे, उन्हें भी परेशानी हुई। प्रशासन ने बेगमबाग से कॉरिडोर वाला रास्ता सिर्फ वीवीआइपी के लिए खाली रख छोड़ा था। प्रशासन ने भीड़ का जो अनुमान लगाया था, उससे भक्तों की संख्या बहुत ज्यादा थी। प्रशासन के क्राउड मैनेजमेंट के लिए प्रयास बहुत किए। सोशल मीडिया पर आसानी से दर्शनों की बात कही गई, लेकिन शिकायतों को लेकर बड़ी संख्या में सुनवाई की स्थिति दिखाई नहीं दी।

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