
Shri Krishna Gaman Path: राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मध्यप्रदेश के साथ मिलकर 'श्रीकृष्ण गमन पथ' विकसित करने का ऐलान किया है। शर्मा ने कहा है कि भगवान कृष्ण की जन्म स्थली से लेकर उनके शिक्षा ग्रहण करने के स्थान को धार्मिक सर्किट के जरिए जोड़ा जाएगा। यह काम मध्यप्रदेश सरकार के साथ मिलकर करेंगे।
सोमवार को जन्माष्टमी के मौके पर मध्यप्रदेश आने से पहले भजनलाल शर्मा (bhajanlal sharma) ने यह ऐलान किया है। एमपी के जल संसाधन मंत्री तुलसी राम सिलावट मिनिस्टर इन वेटिंग बनाए गए हैं। शर्मा इंदौर होते हुए उज्जैन पहुंचेंगे। शाम को वे श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली सांदीपनि आश्रम में दर्शन करेंगे।
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव (dr mohan yadav) ने राम वन गमन पथ की तरह ही भगवान कृष्ण के पाथेय के विकास कार्यों को लेकर दिशा निर्देश दिए थे। यादव ने कहा था कि भगवान श्रीराम और भगवान कृष्ण की लीलाओं के स्थलों को तीर्थ स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। मध्यप्रदेश में भी कई स्थान हैं जिनका जुड़ाव श्रीकृष्ण से है।
भजन लाल शर्मा इंदौर और उज्जैन के दौरे पर रहेंगे। मध्यप्रदेश आने से पहले भजनलाल शर्मा ने सभी को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दी हैं। साथ ही श्रीकृष्म गमन पथ के बारे में अपने विचार व्यक्त किए हैं।
शर्मा ने कहा कि भगवान कृष्म धर्म के प्रतीक हैं और उनका जीवन आज भी हमें प्रेरित करता है। जहां-जहां भगवान श्रीकृष्ण के पावन चरण पड़े, उन सभी स्थानों को तीर्थ के रूप में विकसित किया जाएगा। जगदगुरू भगवान श्रीकृष्म का लीलामयी जीवन श्रीकृष्ण गमन पथ के माध्यम से हमारे प्रेरणा केंद्र के रूप में स्थापित होगा। श्रीकृष्ण ने मथुरा से भरतपुर, सवाई माधोपुर और कोटा के रास्ते उज्जैन तक आध्यात्मिक यात्रा की थी।
शर्मा ने अपने संदेश में आगे कहा कि हम इस ऐतिहासिक मार्ग को विकसित करने का काम करेंगे। लोक आस्था के केंद्र ‘प्रभु श्रीकृष्ण’ से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों व धार्मिक स्थलों को ‘श्रीकृष्ण गमन-पथ’ के रूप में विकसित किया जाएगा। मार्ग में पड़ने वाले मंदिरों जैसे भरतपुर में बांके बिहारी मंदिर, दौसा में श्री गिरिराज धरण मंदिर, कोटा में श्री मथुराधीश मंदिर, झालरापाटन में श्री द्वारकाधीश मंदिर तथा अन्य तीर्थ स्थानो का सौंदर्यीकरण किया जाएगा, विकास कार्य किए जाएंगे और तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
भजनलाल शर्मा ने कहा कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव के साथ मेरी बैठक के दौरान हमने निर्णय लिया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की परिकल्पना के अनुसार, दोनों सरकारें श्री कृष्ण गमन पथ को विकसित करने के लिए मिलकर काम करेंगी, ताकि दोनों राज्यों के नागरिक इस आध्यात्मिक अनुभव का आनंद ले सकें।
शर्मा ने कहा कि भगवा मथुरा से भरतपुर, कोटा, झालावाड़ के रास्ते छोटे-चोटे गांवों से होते हुए उज्जैन पहुंचे थे। हमने उनकी राह में पड़ने वाले स्थानों को चिह्नित किया है। उन सभी धार्मिक स्थानों को मध्यप्रदेश और राजस्थान की सरकार आपस में जोड़ेगी। आज शाम को मैं उज्जैन में स्थित सांदिपनी आश्रम में जाकर प्रणाम करूंगा।
सांदीपनि आश्रम: उज्जैन
यहां भगवान श्रीकृष्ण ने 11 साल की आयु में 64 दिनों तक शिक्षा ग्रहण की थी। इस दौरान भगवान ने 64 विद्याएं सीखीं थी। इन 64 दिनों में उन्होंने 16 दिन में 16 कलाएं, 4 दिन में 4 वेद, 6 दिन में 6 शस्त्र, 18 दिन में 18 पुराण, 20 दिन में गीता का ज्ञान प्राप्त किया था।
जानापाव: इंदौर
इंदौर के पास महू हैं, जहां स्थित है जानापाव। भगवान के इस स्थान से भी जुड़ा की मान्यता है। यहां कृष्म ने परशुराम से सुदर्शन चक्र प्राप्त किया था। कहा जाता है कि श्रीकृष्ण 12-13 साल के थे जब परशुराम से मिलने उनकी जन्मस्थली जाना पाव आए थे। भगवान शिव ने यह चक्र त्रिपुरासुर वध के लिए बनाया था और भगवान विष्णु को दे दिया था।
अमझेरा धाम: धार
धार जिले में यह स्थान है, जब द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने जिस स्थान से माता रुक्मिणी का हरण किया था, वो अमका-झमका मंदिर धार जिले के अमझेरा में स्थित है। यह मंदिर सात हजार साल पुराना है। यहां के रहवासी कहते हैं कि यह मंदिर रुक्णिणी की कुलदेवी का था, तब वे यहां आया करती थीं। 1720 में राजा लाल सिंह ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था।
नारायण धाम: महिदपुर
उज्जैन जिले में ही महिदपुर तहसील स्थित है। महिदपुर से 9 किमी दूर स्थित श्रीकृष्ण मंदिर इसलिए भी जाना जाता है क्योंकि श्रीकृष्ण और उनके मित्र सुदामा के साथ विराजे हैं। नारायण धाम मंदिर में दोनों की मित्रता के प्रमाण के रूप में यहां पेड़ मौजूद है।
Updated on:
26 Aug 2024 03:53 pm
Published on:
26 Aug 2024 03:36 pm

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