
श्री महाकाल लोक में सप्त ऋषियों की प्रतिमाएं गिरने का मामला ठंडा ही नहीं पड़ रहा है। एक ओर जांच की मांग तेज हो रही है वहीं राजनीतिक दल हमलावर हो गए हैं।
उज्जैन. श्री महाकाल लोक में सप्त ऋषियों की प्रतिमाएं गिरने का मामला ठंडा ही नहीं पड़ रहा है। एक ओर जांच की मांग तेज हो रही है वहीं राजनीतिक दल हमलावर हो गए हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप-प्रत्यारोप के साथ देशभर में कई राजनेता घटना को अपनी नजर से देख मीडिया-सोशल मीडिया पर प्रतिक्रयाएं दे रहे हैं। कोई इसे आमजन की आस्था को आहत मान रहा है और कोई राजनीति का नया मुद्दा।
गुणवत्ता पर सवाल उठे तो गायब हुए श्रेय लेने वाले
श्री महाकाल लोक के कार्यों में भ्रष्टाचार व कमीशनखोरी का आरोप लगाते हुए कांग्रेस का छोटे से बड़ा नेता भाजपा पर हमलावर है। नगरीय आवास एंव विकास मंत्री भूपेंद्रसिंह ने भोपाल में प्रेस कान्फ्रेंस कर प्रोजेक्ट की जानकारी दी। इसके विपरीत स्थानीय स्तर पर भाजपा के अधिकतर नेताओं ने चुप्पी साध रखी है। प्रभारी मंत्री जगदीश देवड़ा को छोड़ दें तो अन्य कोई प्रमुख नेता ने न महाकाल लोक का निरीक्षण किया और न ही मीडिया के सामने स्थिति स्पष्ट की। यहां तक कि स्मार्ट सिटी कंपनी ने भी कोई तथ्यात्मक जानकारी जारी नहीं की। सीधे जिम्मेदार कुछ प्रमुख अधिकारी तो इस विषय पर बोलने तक से बच रहे हैं। कुछ महीने पहले तक जो अधिकारी-नेता श्री महाकाल लोक का श्रेय लेने की होड़ में थे, उनमें से अधिकतर पर्दे से गायब हैं।
बयानबाजी में गरमा रही घटना
मप्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने जब उज्जैन में महाकाल मंदिर का भव्य निर्माण करने का संकल्प लिया था, तब इस बात की कल्पना नहीं की थी कि बाद की सरकार महाकाल लोक के निर्माण में गंभीर अनियमितता करेगी। मैं मुख्यमंत्री से मांग करता हूं, घटिया निर्माण करने वालों को जांच कर दंडित किया जाए।
कमलनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री (जैसा ट्वीट किया)
कांग्रेस विधायक महेश परमार ने जो लोकायुक्त को जांच के लिए अनुरोध किया था, सही निकला। मूर्ति तेज हवा में ही खंडित हो गईं। निर्माण किसने किया था? गुजरात की कंपनी ने। मप्र में कोई भी योजना नहीं है, जिसमें भ्रष्टाचार ना हुआ है। अब महाकाल के नाम पर भी भाजपा पैसे खा गई।
- दिग्विजयसिंह, कांग्रेस वरिष्ठ नेता (जैसा ट्वीट किया)
महाकाल लोक में खंडित मूर्तियों को स्थापित नहीं किया जाएगा। वहां नई मूर्तियां लगेंगी। माननीय मुख्यमंत्री जी ने इसके निर्देश दे दिए हैं। धर्म कांग्र्रेस के लिए आस्था का नहीं, बल्कि इलेक्शन इवेंट है। जब चुनाव आते हैं, तो कांग्रेस धर्म के नाम पर राजनीति की गंदी कोशिश करती है।
भूपेंद्र सिंह, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री (जैसा ट्वीट किया)
कर्नाटक में भाजपा की 40 प्रतिशत कमीशन वाली भ्रष्ट सरकार के चर्चे थे। मप्र की बीजेपी सरकार तो एक कदम और आगे है। इस सरकार में भगवान तक को नहीं छोड़ा। मूर्तियों में भी भ्रष्टाचार हुआ। जैसे कर्नाटक की जनता ने भाजपा को भ्रष्टाचार के लिए दंड दिया, वैसे ही मप्र की जनता भी इन्हें सबक सिखाएगी।
जयराम रमेश, कांग्रेस वरिष्ठ नेता (जैसा ट्वीट किया)
प्राकृतिक आपदा पर किसी का बस नहीं है। आंधी-तूफान में महकाल लोक में स्थापित किए गए सप्तऋषि मंडल की मूर्तियां गिर गईं, जबकि अन्य मूर्तियों इससे प्रभावित नहीं हुईं। प्राकृतिक आपदा पर अनर्गल आरोप लगाकर किसी को राजनीति नहीं करना चाहिए।
जगदीश देवड़ा, जिले के प्रभारी मंत्री (जैसा मीडिया से कहा)
धर्म क्षेत्र में भ्रष्टाचार का तांडव हमको देखने को मिला। जिस शिव लोक में रोज दो लाख धर्म प्रेमी शीश नवाने आते हैं, वहां सप्तऋषियों (जो सनातन धर्म के पोषक हैं) के हवा के झोंके से गिरने से भाजपा का पाखंड बिखर गया। व्यापमं, सिंहस्थ, पेंशन, ई-टेंडरिंग और अब महादेव के पवित्र क्षेत्र में भी भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया है।
सज्जनसिंह वर्मा, विधायक व पूर्व कैबिनेट मंत्री (जैसा मीडिया से कहा)
शिवराज सरकार ने हमारी योजना को आगे बढ़ाकर श्रेय लेते हुए प्रथम फेज को जल्दी पूरा कर प्रधानमंत्री से उद्घाटन कराकर अपनी पीठ थपथपाने के चक्कर में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया। कई काम ऐसे करवा दिए हैं जो गुणवत्ता विहीन हैं। इसमें कमीशनखोरी से हर किसी को चांदी काटने का मौका मिल गया।
महेश परमार, तराना विधायक
Published on:
03 Jun 2023 01:46 am
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