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ऐतिहासिक धरोहर माधव कॉलेज की जमीन बेचने का मामला लोकायुक्त पहुंचा, 10 को सुनवाई

माधव कॉलेज भवन के रीडेेंसिफिकेशन पर विरोध तेज, भूमि बेचने के विरोध में जनता बोली- शहर की प्रतिष्ठा से मजाक

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ऐतिहासिक धरोहर माधव कॉलेज की जमीन बेचने का मामला लोकायुक्त पहुंचा, 10 को सुनवाई

ऐतिहासिक धरोहर माधव कॉलेज की जमीन बेचने का मामला लोकायुक्त पहुंचा, 10 को सुनवाई

उज्जैन. देवास गेट स्थित 133 वर्ष पुराने माधव कॉलेज वर्तमान में कालिदास कॉलेज, जवाहर होस्टल व विक्रम विश्वविद्यालय की जमीन और भवन को रीडेंसिफिकेशन (पुन: घनत्वीकरण) योजना के माध्यम से बेचने के निर्णय पर शहरवासियों के साथ छात्र संगठन और कांग्रेस विरोध कर रही है। लोगों का कहना है, जिस ऐतिहासिक कॉलेज ने देश को विभिन्न क्षेत्रों में कई हस्ताक्षर दिए हैं, उसके परिसर को अन्य उपयोग में लेने की सोच भी शहर की प्रतिष्ठा से मजाक के समान है। विधायक महेश परमार ने लोकायुक्त में शिकायत के साथ ग्वालियर रियासत के माधव राव प्रथम के नाम माधव कॉलेज को बेचने की योजना पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य ङ्क्षसधिया को पत्र लिखा। विधायक के मुताबिक लोकायुक्त भोपाल ने उक्त मामले को संज्ञान में लिया है। परमार को 10 जून को बयान देने के लिए बुलाया है। इधर, उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सिर्फ आकलन हो रहा है, इस संपत्ति को कभी नहीं बेचेंगे।
क्या अब उसूलों पर आंच आएगी
विधायक महेश परमार ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य ङ्क्षसधिया को पत्र लिखकर बताया कि कांग्रेस में आपके उसूलों पर आंच आ रही थी तो आप भाजपा के साथ चले गए, लेकिन अब वहीं भाजपा आपके पुरखे माधवराव प्रथम के नाम, संस्था माधव कॉलेज को बेचने जा रही है। इससे आपके उसूलों पर आंच आएगी या नहीं। पत्र में स्पष्ट किया कि पुराने माधव कॉलेज की बेशकीमती जमीन, जिसका बाजार मूल्य लगभग 700 करोड़ रुपए है, उच्च शिक्षा विभाग के स्थानीय मंत्री महज 91 करोड़ रुपए में पुन: घनत्वीकरण योजना के तहत अफरा-तफरी कर बेच रहे हैं।
लोकायुक्त जांच होगी
विधायक परमार ने लोकायुक्त भोपाल को पत्र लिखकर माधव कॉलेज भवन, भूमि व विक्रम विश्वविद्यालय की भूमि को अफरा-तफरी से बेचने की जानकारी दी। विधायक ने लिखा कि उच्च शिक्षा विभाग के मंत्री पुन:घनत्वीकरण योजना के माध्यम से बेशकीमती जमीन कम दाम में बेचकर कई सौ करोड़ का घोटाला करने जा रहे हैं। इसकी जांच होनी चाहिए। विधायक बोले, लोकायुक्त भोपाल ने 10 जून को बयान देने बुलाया है।
पुरानी धरोहर को बेचने की नीति का विरोध, आज सुबह 11 बजे बैठक
शहर के अति प्राचीन 133 वर्ष पुराने माधव महाविद्यालय को बेचने का शहर कांग्रेस एवं शहर के सभी छात्र नेता रहे विभिन्न पदाधिकारियों ने इसका पुरजोर विरोध किया गया है। इस संबंध में मंगलवार को एक संयुक्त बैठक का आयोजन हुआ है। इसमें अति प्राचीन कॉलेज को बेचने की उच्च शिक्षा विभाग की नीति का विरोध किया। बैठक में आक्रोश नजर आया। बैठक में छात्र नेताओं ने इसकी घोर ङ्क्षनदा की। नेता प्रतिपक्ष रवि राय ने बताया कि इसी महाविद्यालय ने शहर और समाज को सांसद, विधायक, मंत्री, पार्षद, कई वरिष्ठ अधिकारी, पत्रकार दिए हैं। बैठक में डॉ. बटुकशंकर जोशी, महेश सोनी, योगेश शर्मा, रवि भदौरिया, अशोक यादव, प्रमोद चौबे, विवेक यादव, चेतन यादव, सलीम कप्तान, हरनाम ङ्क्षसह यादव समेत कई नेता कार्यकर्ता उपस्थित रहे। बुधवार 7 जून को सुबह 11 बजे शहर कांग्रेस में इसकी बैठक होगी और 12 बजे मध्य प्रदेश के राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन दिया जाएगा।
ये बोले लोग - नहीं बिकना चाहिए
माधव कॉलेज पुरातत्व धरोहर घोषित होना चाहिए, बिकना नहीं चाहिए। रामलाल-जवाहरलाल की बिङ्क्षल्डग प्राइवेट होते हुए धरोहर घोषित की गई।
वंदाना कुसुम मेहता
माधव कॉलेज का 133 साल का शानदार इतिहास है और इसे किसी भी कीमत पर बेचा नहीं जाना चाहिए। अब तक के सबसे महान संस्थानों में से एक है। डॉ. अम्बेडकर विद्यार्थी संगठन इस निर्णय का विरोध करता है।
हर्ष मालवीय
पुराना माधव आर्ट कॉलेज भवन नहीं बेचना चाहिए।
सौरभ केशवानी
माधव आट््र्स कॉलेज उज्जैन की पहचान है। देवास गेट की शान है। उसे बेचना छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। इस महाविद्यालय में उज्जैन जिलों की सातों तहसील के विद्यार्थी पढऩे आते हैं, उस स्थान को बेचने की बजाय वहां पर शिक्षा के क्षेत्र में कार्य होना चाहिए। वहां पर बड़ा महाविद्यालय बनना चाहिए। डॉ. अम्बेडकर विद्यार्थी संगठन इसका विरोध करता है और जरूरत पडऩे पर सड़क पर भी उतरेगा।
राम सोलंकी
पुरानी धरोहर जो कि आने वाली पीढ़ी को अपने इतिहास की जानकारी देता है। इसको नहीं बचेना चाहिए।
मुकेश शर्मा
केवल आकलन कर रहे, बेचने का प्रश्न ही नहीं
&इस भवन को कभी बिकने नहीं दूंगा। यहां तो और राशि लगाकर इसका विकास करेंगे। यह तो कांग्रेस की योजना है, जिसे हम अपना कर प्रदेश भी कर शिक्षा संपत्तियों का आकलन कर रहे हैं। केवल आकलन हो रहा है। बेचने का प्रश्न ही नहीं है।
-डॉ. मोहन यादव, उच्च शिक्षा मंत्री