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18 साल से नहीं हुआ गंदी बस्तियों का उन्मूलन

ठण्डे बस्ते में डाल दिए गए बुनियादी नव निर्माणतत्कालीन डीएम ने लिखा पत्र लिख बताई थी जरूरत

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Shahdol online

Apr 26, 2016

18 years is not the elimination of slums news

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उमरिया। नगर पालिका क्षेत्रांतर्गत विभिन्न वार्डों में निवासरत पिछड़े और आदिवासी समुदाय के जीवन स्तर को उठाने कुछ बस्तियों को चिन्हित कर उनमे विकास के नव निर्माण कराने थे। सड़क, बिजली और पानी जैसे बुनियादी सुविधाएं मुहैया करानी थी लेकिन नगर पालिका ने अभी तक बस्तियों के उन्मूलन में कछुए की गति अख्तियार की हुई है।
वार्डों में सफाई से लेकर सड़क और पानी की समस्या जस की तस है। गंदी बस्ती उन्मूलन के तहत वार्ड क्रमांक एक छटन, भगहा एवं लोहारगंज वार्ड क्रमांक 2 लालपुर, वार्ड क्रमांक 4 नैगवां, डोमरान टोला, वार्ड नं. 9 खलेसर तथा चमरानटोला, वार्ड नं. 10 कैम्प हरिजन मोहल्ला एवं वार्ड क्रमांक 12 ज्वालामुखी एवं विकटगंज शामिल है। इन वार्डो का क्षेत्रफल 61.34 हेक्टेयर शामिल किया गया है जबकि इन वार्डो की जनसंख्या 4427 बताई गई है एवं परिवारो की संख्या 1322 है।
पुराने वार्ड में नहीं पानी
बहुत पहले गंदी बस्ती से जुड़े लोहारगंज में एक पानी की टंकी बनाई गई थी उसी पानी की टंकी से वार्डवासियों को पानी नसीब होता था, लेकिन अब उन्हे इस टंकी से पानी नसीब नहीं होता है। यूं तो शहर के वार्ड क्रमांक एक में जुड़ा यह क्षेत्र परिषद के सबसे पुराने वार्ड में शामिल है लेकिन अभी तक इस क्षेत्र का वो विकास नहीं हो सका है जो होना चाहिए बिजली, पानी और सड़क इस वार्ड में नहीं दिखाई देती।
ठण्डे बस्ते में डीपीआर
पिछले छह वर्ष पूर्व लोहारगंज में एक बोरिंग का निर्माण भी किया गया था जो वार्डवासियो की प्यास बुझाने का काम करता था लेकिन वह भी बंद पड़ा है पानी की किल्लत गंदी बस्ती क्षेत्र में स्पष्ट तौर पर देखी जा सकती है। यहां रहने वाले लोग आज भी नदी के भरोसे अपने निस्तार का काम कर रहे है। हैंडपंप तो है पर प्यास नहीं बुझ रही है। आज भी सड़को की हालत दयनीय बनी हुई है अभी अब इस दिशा में कदम नहीं उठाया गया है। गंदी बस्तियो के उन्मूलन के लिए नपा में अब डीपीआर बनाने की तैयारी शुरु कर दी गई है कब डीपीआर बनेगा और कब इन गंदी बस्तियों का उन्मूलन बनेगा यह भी विचारणीय प्रश्न है।
नागरिकों की व्यथा
शेखवजीर, रहीम, सुरेश महोबिया, दादूराम बर्मन ने बताया कि हम लोग केवल सरकार चुनने का काम करते है उनके वार्ड में न तो सड़को की हालत अच्छी है और न ही पीने का पानी मिल पा रहा है और बिजली के खंभो में स्ट्रीट लाइट नदारत है। इस क्षेत्र में किसी ने अब तक ध्यान ही नहीं दिया है आज भी इन वार्डो के लोगो की स्थिति किसी ग्रामीण क्षेत्र से कम नहीं है।
18 साल में भी परिणाम शून्य
अभिभाजित शहडोल के तत्कालीन कलेक्टर अजय सिंह यादव ने 11 मार्च 1987 को एक पत्र लिखा था जिसमें इन छह वार्डो को गंदी बस्ती के तहत जोड़ा गया था और इन बस्तियो के विकास के लिए बात कही गई थी। पर 27 वर्ष बीत जाने के बाद भी इन वार्डो का विकास नहीं हो सका है। गौरतलब है कि 1998 में उमरिया को जिले का दर्जा प्राप्त हुआ। जिले का दर्जा प्राप्त हुए भी सोलह वर्ष बीत गए है पर अब तक इन गंदी बस्तियों का उन्मूलन संभव नहीं हो सका है।
गंदी बस्ती में डीपीआर बनाने के लिए निविदा निकाली गई थी। योजना में काम चल रहा है। वार्डो में पर्याप्त सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं।
अनिल दुबे, मुख्य नगरपालिका अधिकारी उमरिया।

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