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पीडीएस में बंट रहा अमानक चावल

चावल में कुलबुला रहे कीड़े

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Non-standard rice distributed in PDS

Non-standard rice distributed in PDS

उमरिया. जिले में नागरिक आपूर्ति निगम के मिली भगत से प्रदेश सरकार की गरीबों के लिए चलाई जा रही 1 रुपये किलो चावल की योजना को पलीता लग रहा है। जिले में इस साल किसानों से खरीदी गई धान को मिलिंग कर लगभग 2 लाख 16 हजार क्विंटल चावल मिलरों के द्वारा वेयर हाउस में जमा किया गया।
वहीं घटिया क्वालिटी का चावल भी नागरिक आपूर्ति निगम के जिला प्रबंधक द्वारा अपने चहेतों से जमा करवाया गया और उस चावल को तत्काल बीपीएल कार्डधारकों के लिए उचित मूल्य दुकानों में भेज दिया गया। जबकि नियमानुसार पुराने चावल को पहले खपत करना चाहिए और नए चावल को बाद में, लेकिन यहां नागरिक आपूर्ति निगम के जिला प्रबंधक 32 हजार 400 क्विंटल नया चावल दुकानों में भिजवा दिए। देखा जाये तो केके वेयर हाउस में अभी लगभग 12 हजार क्ंिवटल चावल सन 2016-17 का रखा हुआ है। विपणन संघ जबलपुर का लाट जो डब्ल्यूएलसी में डंप रखा गया है। वह डीएम एवं मिलर की सांठ गांठ से द्वार प्रदाय में ईशू करने की भी कवायद चल रही है।
वहीं नया चावल 1 लाख 83 हजार क्ंिवटल अभी रखा हुआ है, सबसे बड़ी बात तो यह है कि नागरिक आपूर्ति निगम अपने चावल को रख कर खराब कर रहा है और विपणन संघ जबलपुर के घटिया चावल को मिलरों से सांठ-गांठ कर दुकानों में खपत करवाया जा रहा है। अचानक गोदाम में पहुंच कर जब देखा गया तो पता चला कि वहां पहले से घटिया किस्म का चावल रखा हुआ है और मानपुर के मिलर का भी घटिया चावल रखवाने की तैयारी में थे। जिस ट्रक में चावल लदा हुआ था उसका चालक सरजू साहू ने बताया कि हम मानपुर से उमरिया पंचायती गोदाम डब्ल्यूएलसी में रखने के लिए 540 बोरी अर्थात 27 टन चावल लाये हैं और कोई अधिकारी चावल निकाल कर जांच करने ले गए हैं। ऐसा ही कुछ मानपुर स्थित डब्ल्यूएलसी गोदाम का भी है जहां विपणन संघ जबलपुर का घटिया किस्म का चावल भंडारित किया गया है। जिसकी सत्यता किसी भी समय जांच करके परखी जा सकती है।
इस मामले में जब वेयर हाउस गोदाम में मौजूद नागरिक आपूर्ति निगम के क्वालिटी इन्सपेक्टर एलके पाठक से बात किया गया तो उनका कहना है कि पहले पूरी छल्ली डंप की जाती है बाद में सभी बोरियों से चेक किया जाता है तब गुणवत्ता का पता चलता है। हमने अमानक चावल वापस कर दिया है। वहीं मानपुर से आये हुए नए चावल के बारे कहे कि अभी हमने ऊपर से देख लिया है जो 31.8 प्रतिशत टूटा चावल है जबकि 25 प्रतिशत मान्य है।
नए चावल में कीड़े मिलने पर कहा कि जहां धान रखा होगा वहां दूसरा अनाज भी रखा होगा उससे कीड़ा चढ़ गया होगा और अभी हमारे हिसाब से सब फेल है।
हालांकि नान में मनमानी का दौर चल रहा है, इसकी खबर स्थानीय विधायक, सांसद, मंत्री एवं जनप्रतिनिधियों को बाखूबी है। लेकिन डीएम नान के आगे सभी बौने साबित हो रहे हैं। आज तक समुचित कार्रवाई न होने से इस विभाग के हौसले दिन प्रतिदिन बुलंद होते जा रहे है। जबकि उक्त सभी नेता आदिवासी वर्ग से तालूक रखते है। यह चावल सबसे अधिक आदिवासी क्षेत्रों में बांटा जाता है। प्रशासन भी विभाग का सहयोग देने में कहीं पीछे नहीं दिखाई दे रहा है।
इस मामले में जब जिला आपूर्ति अधिकारी बालेन्द्र सिंह परिहार से बात किया तो उनका कहना है कि घटिया चावल के बारे में आप जो बता रहे हैं हम तत्काल अभी एफओ और जेएसओ की टीम वहां जो ग्रेडर हैं जो इसके लिए नियुक्त किये गए है वो निश्चित करे कि जो शासन के द्वारा निर्धारित हैं उसी के अनुसार वहां मिलिंग का चावल जमा हो। यदि उसमें किसी तरह की लापरवाही की गई है तो सम्बंधित के विरुद्ध कार्यवाही होगी।