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उमरिया- जिला अस्पताल की अव्यवस्थाओं में कोई सुधार नहीं हो रहा है। दूर-दराज से आए हुए ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। ओपीडी में डाक्टरों की अनुपस्थिति उसी प्रकार से चल रही है, जैसी पहले चलती थी।
वार्ड ब्यॉय कहां है, किसी को नहीं पता और किस स्थान पर काम कर रहे हैं। वार्ड ब्यॉय नहीं होने की स्थिति परिजनों को अपने हाथों में ही मरीजों को उठा कर ले जाना पड़ रहा है। आलम यह है कि आये दिन मरीज व परिजनों को खासा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में कोई भी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है, इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा।
गर्मी में ये हाल है, तो बरसात के मौसम में संक्रामक रोगों का क्या हाल होगाïï? इसका अंदाजा इसी बात से लग जाता है कि ओपीडी में रोगियों की संख्या बढऩे लगी है। मंगलवार को दोपहर तक ओपीडी में लगभग 500 पर्चियां कट चुकी थीं। अभी पूरा दिन बांकी था और शाम तक रोगियों की आवक बनी हुई थी। बताया गया है कि प्रतिदिन यह संख्या एक हजार के ऊपर पहुंच रही है। इस स्थिति में डॉक्टरों की कमी से कितना बड़ा संकट उत्पन्न होता होगा, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।
ओपीडी में नहीं मिलते डॉक्टर
कुछ साल पहले की तुलना में जिला अस्पताल में चिकित्सकों की संख्या में वृद्धि हो गई है, लेकिन मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी की कार्यशैली की शिथिलता के कारण अधिकांश चिकित्सक ओपीडी में चिकित्सा करने के बजाय अपने बंगलों में ज्यादा चिकित्सकीय कार्य करते हुए दिखाई देते हैं। इस सबकी शिकायत कई स्तरों पर जागरूक नागरिकों के द्वारा की गई है। जिम्मेदार प्रशासकीय अधिकारियों के औचक निरीक्षण में यह बात हमेशा सही साबित होती हुई दिखाई दे रही है।
आरसीएच में डीपीएम की समस्या
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं और एनआरएचएम की व्यवस्थाओं को सुचारू रुप से करवाने की जिम्मेदारी आरसीएच विभाग की है। यहां के डीपीएम बनने की होड़ हमेशा बनी रहती है। डीपीएम बनने के लिए कई अधिकारी जोड़-तोड़ करने की राजनीति करते हुए दिखाई देते है, मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी फैसला नहीं कर पा रहे हैं, किसे डीपीएम का प्रभार सौंपा जाये।
नहीं दिखते वार्ड ब्यॉय
जिला अस्पताल में वार्ड ब्यॉय के लिए जितने पद स्वीकृत हैं, उतने वार्ड ब्यॉय होने के बावजूद भी जिला अस्पताल में एक भी वार्ड ब्यॉय अपनी निर्धारित डे्रस में दिखाई नहीं देते हैं। अधिकांश वार्ड ब्यॉय जिन्हें अपना काम करने में कोताही बरते हुये अन्य दूसरे कार्यों में लगे हुए दिखाई देते हैं। जिसके कारण अस्पताल की पूरी व्यवस्था चरमराती हुई दिखाई देती है।
सुधार के प्रयास लगातार जारी है
उमरिया सीएमएचओ डॉक्टर उमेश नामदेव के मुताबिक जिला अस्पताल की पुरानी व्यवस्थाओं को सुधारने के प्रयास लगातार किये जा रहे हैं, जो अव्यवस्थाएं पुराने समय से चली आ रही है, उन्हें सुधारने में कुछ समय तो लगेगा। वार्ड ब्याय को मरीजों की सेवा का कार्य करने की जिम्मेदारी सौंपी जायेगी।