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घर के जानवर और पक्षियों से हो सकती हैं ये गंभीर बीमारियां, बचने के ये हैं उपाए

घर के जानवर और पक्षियों से हो सकती हैं ये गंभीर बीमारियां, बचने के ये हैं उपाए  

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जबलपुर। हम सभी पशु-पक्षियों से प्रेम करते हैं। खासकर गाय, डॉग्स, बड्र्स और मछलियां अधिकतर घरों में मिल जाएंगे। इनकी केयर से हेल्थ तक का पूरा खयाल भी रखते हैं। लेकिन, इनसे होने वाली बीमारियों से बचना भी जरूरी है। नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. देवेंद्र गुप्ता और डॉ. निधि गुप्ता पशुओं से मनुष्यों में होने वाले रोगों और उनसे बचाव के तरीके बता रहे हैं।

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इसलिए मनाते हैं
विश्व पशु जन्य रोग दिवस (वल्र्ड जूनोसिस डे) 6 जुलाई 1885 को रैबीज बीमारी का सफल टीकाकरण करने वाले वैज्ञानिक ल्यूस पाश्चर के सम्मान में मनाया जाता है। इस दिन पशुओं की बीमारी व बचाव के तरीके बताए जाते हैं।

ये हैं प्रमुख पशुजन्य बीमारियां
रेबीज : रेबीज लगभग सभी पशुओं और मनुष्य को हो सकने वाला घातक रोग है, जो एक प्रकार के विषाणु से होता है। यह विषाणु संक्रमित पशु की लार, शरीर से निकलने वाले द्रव्यों में पाया जाता है। यह मुख्य रूप से रोगी या प्रभावित डॉग्स के काटने से होता है। डॉग्स इस रोग को मनुष्यों व अन्य पशुओं में फैलाते हैं।
लेप्टोस्पाइरोसिस : यह डॉग्स का जीवाणु जनित रोग है, जो फेफड़ों, आमाशय, आंत और गुर्दों को प्रभावित करता है। इन अंगों पर रक्त के धब्बे बन जाते हैं।
टीबी : मायकोबैक्टेरियम ट्यूबरकूलोसिस नामक जीवाणु से यह रोग होता है। इसे टीबी भी कहा जाता है। यह रोग किसी भी उम्र के लोगों में हो सकता है। यह मुख्यत: फेफड़ों पर असर करता है।
ब्रूसेलोसिस : यह एक संक्रमित रोग है, जो बू्रसेला जीवाणु से उत्पन्न होता है। ब्रूसेला गाय, शूकर, भेड़, डॉग्स और घोड़ों पर भी असर कर सकता है। यह पशुओं से मनुष्यों में भी फैल सकता है। मनुष्यों में इस रोग की शुरुआत में सिरदर्द, कमजोरी, पसीना निकलना, बदन में दर्द होता है। बाद में तीव्रता बढऩे लगती है। यह आंशिक रूप से जनन-व्याधियां उत्पन्न करता है।
बर्ड फ्लू : यह मुर्गियों में होने वाला एक विषाणु जनित रोग है, जो व्यावसायिक मुर्गी पालन को आर्थिक नुकसान पहुंचाता है। इन्फ्लूएंजा विषाणु की तीन किस्में होती हैं।

150 पशुजन्य बीमारियां चिह्नित
डॉ. देवेंद्र गुप्ता के अनुसार अभी तक 150 से अधिक पशुजन्य रोग चिह्नित किए गए हैं, जो संक्रमित पशु, पक्षी, कीड़े-मकोड़े, जलीय एवं वन्य जीवों के सम्पर्क में आने से फैलते हैं। इनमें टीबी, ब्रुसोलोसिस, गैलेंडरर्स एन्थ्रेक्स, लेप्टोस्पाइरोसिस प्लेग, रेबीज, फीताकृमि, गोलकृमि, बर्ड फ्लू, स्वाइन फ्लू, इबोला, सार्स प्रमुख हैं। पशु जन्य रोग (जूनोसिस) संक्रमित रोग हैं, जो पालतू पशुओं, वन्य जीवों से मनुष्यों में या मनुष्यों से पशुओं में हो सकते हैं। मनुष्य से पशुओं के संक्रमित होने पर इसे रिवर्स जूनोसिस या एन्थ्रोपोनोसिस
कहते हैं।


डरने की जरूरत नहीं
डॉ. निधि गुप्ता के अनुसार समस्त पशु (पालतू, वन्य तथा घुमन्तु) चर्म रोग के वाहक के रूप में कार्य करते हैं। लेकिन, इससे हमें भयभीत होने या भ्रमित होने की आवश्यकता नहीं है। पशु चिकित्सक की सलाह से नियमित रूप से कृमिनाशक दवा (आंतरिक एवं बाह्य कृमि) और रोग से बचाव के लिए टीकाकरण कराते रहें और स्वच्छता का ध्यान रखें तो उपरोक्त रोगों से बचाव हो सकता है।