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यहां की रामलीला कुछ अलग हटकर, क्योंकि लीलाओं का मंचन शहर के विभिन्न हिस्सों में कुछ इस प्रकार होता है

1873 ई. में ब्रिटिश हुकूमत के सर जॉन डायसन अनुमति से शुरू हुई थी जनपद की रामलीला, पहुंची अपने 146वें संस्करण में

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जनपद की रामलीला, पहुंची अपने 146वें संस्करण में

यहां की रामलीला कुछ अलग हटकर, क्योंकि लीलाओं का मंचन शहर के विभिन्न हिस्सों में कुछ इस प्रकार होता है

उन्नाव. 145 वर्ष पूर्व 1873 में ब्रिटिश हुकूमत के सर जॉन डायसन ने पहली बार व्यापारियों को रामलीला करने की अनुमति दी थी। जिसके बाद से लगातार रामलीला का मंचन किया जा रहा है। चार चरणों में होने वाली रामलीला मंचन की प्रक्रिया अब तीन भागों में सिमट कर रह गई है। अतिक्रमण के कारण राज तिलक का कार्यक्रम कलेक्टर गंज फाटक के अंदर ना होकर साकेत धाम में संपन्न करा लिया जाता है। श्री रामलीला कमेटी के उपाध्यक्ष चंद्र प्रकाश अवस्थी ने उक्त जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 1997 में तत्कालीन जिलाधिकारी अरुण आर्या ने रामलीला कमेटी के अनुरोध पर पीडब्ल्यूडी, उन्नाव शुक्लागंज विकास प्राधिकरण और नगर पालिका से सर्वेक्षण कर इस विषय में रिपोर्ट देने को कहा। सर्वे में पाया गया कि रामलीला विगत 123 वर्षों से लगातार चल रही है।


तत्कालीन जिलाधिकारी ने चारदीवारी बनाने की दी थी अनुमति

सरकारी विभागों द्वारा रामलीला के मंचन पर मुहर लगाने के बाद जिलाधिकारी तत्कालीन जिलाधिकारी अरुण आर्य ने 3.75 हेक्टेयर भूमि पर चारदीवारी बनाकर चारदीवारी बनाकर फौजी पड़ाव या सार्वजनिक कार्य रामलीला के लिए भूमि के प्रयोग की अनुमति दे दी। रामलीला का प्रारंभ 1873 ई. में मनीषा शाह व विष्णु दयाल के द्वारा किया गया था। जिसमें स्थानीय कलाकारों के अलावा बाहर से भी कलाकार आते थे। उन्होंने बताया कि रामलीला कमेटी में कई मुस्लिम भी शामिल है। जिनमें एसके जैदी, निहाल अहमद सहित अन्य लोग रामलीला महोत्सव में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं। इसके साथ ही रामलीला कमेटी में दलित और पिछड़ों का भी समावेश है।


श्री रामलीला कमेटी में सभी धर्म व जाति का समावेष

कमेटी में विशिष्ट संरक्षक के रूप में सरदार गुरबीर सिंह शामिल है, इसके अतिरिक्त सोहन लाल आर्य मुख्य संरक्षक के तौर पर श्री राम लीला कमेटी में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे करा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष राम लीला कमिटी का 6 लाख का बजट है। जिसे अगले साल बढ़ाकर 11 लाख करने का विचार है। उन्होंने बताया कि 10 साल पूर्व लगभग तीन लाख का बजट था। चंद्र प्रकाश अवस्थी ने बताया कि उन्होंने 35 साल पूर्व श्री रामलीला कमेटी को ज्वाइन किया था। उस समय बजट ₹6 हजार का था। सभी लोगों के सहयोग से, चंदा लेकर रामलीला का बजट एकत्र किया जाता है।


राम गमन के दौरान नौका विहार सिद्धनाथ मंदिर में तो भरत मिलन, भरत मिलाप मैदान में

उन्होंने बताया कि श्री राम लीला कमेटी के द्वारा की जाने वाली रामलीला का मंचन आज तीन स्तर पर संपन्न होता है। पहले में साकेत धाम में गणेश पूजन रामजन्म विश्वामित्र आगमन जैसे कार्यक्रम आयोजित होता है। जबकि राम गमन का कार्यक्रम के अंतर्गत नौका विहार का आयोजन होता है। जिसमें सिद्धनाथ मंदिर में संपन्न कराया जाता है। इसी प्रकार राम भरत मिलन का कार्यक्रम हनुमानगढ़ी स्थित भरत मिलाप मैदान में संपन्न होता है। जबकि राज्याभिषेक कलेक्टर गंज फाटक के अंदर किया जाता था। लेकिन जगह की कमी के कारण अब यह कार्यक्रम साकेत धाम में ही संपन्न कराया जाता है। श्री अवस्थी ने बताया कि साकेत धाम में होने वाली रामलीला के मंचन में पूरे शहर का प्रतिनिधित्व होता है। जिसके कारण यहां दर्शकों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है।

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