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खुद की पहचान के लिए संघर्षरत है उन्नाव का वर्ल्ड फेमस पक्षी विहार

जनपद को विश्व के मानचित्र में पर्यटक स्थल के रूप में पहचान दिलाने वाला नवाबगंज पंक्षी विहार आज स्वयं की पहचान बनाने के लिये संघर्ष कर रहा है

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Ruchi Sharma

May 03, 2016

Nawabganj Bird Sanctuary

Nawabganj Bird Sanctuary

उन्नाव. जनपद को विश्व के मानचित्र में पर्यटक स्थल के रूप में पहचान दिलाने वाला नवाबगंज पंक्षी विहार आज स्वयं की पहचान बनाने के लिये संघर्ष कर रहा है। झील सुखी पड़ी है। जिसमें स्थानीय जानवरों को चहल कदमी करते देखा जा सकता है। सुखी झील व बीच बीच में पक्षियों के लिये बनाये टीले आने वालों के मुंह चिढ़ा रहे है।

प्रदेश की राजधानी से लखनऊ से मात्र 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित नवाबगंज पंक्षी विहार को 1984 में प्रदेश सरकार ने पंक्षियों के लिये संरक्षित क्षेत्र घोषित किया था। जहां ठंड के मौसम में पंक्षी रूपी विदेशी मेहमान काफी संख्या में आते है। इसके साथ भी स्थानीय पर्यटक भी घूमने फिरने के लिये आते है। परंतु प्रशासन की उपेक्षा व स्थानीय अधिकारी की आदूरदर्शिता के कारण पर्यटक पंक्षी विहार से दूर होते गये। आज कहने के लिये तो पंक्षी विहार है। परंतु न तो यहां पंक्षी है और न ही पर्यटक। 224.4 हैक्टेयर क्षेत्रफल में फैला पंक्षी विहार वाइल्ड लाइफ प्रोक्टेक्शन एक्ट 1972 के अन्तर्गत संरक्षित है।

सूखी झील पर्यटकों को चिढ़ा रहा मुंह

नहर विभाग की लापरवाही का खामियाजा भी कहीं न कहीं पंक्षी विहार को उठाना पड़ रहा है। सूत्रों के अनुसार कुसुम्भी रेलवे स्टेषन के पास आसीवन ब्रांच से माइनर निकली है। जिससे पंक्षी विहार की पानी की आवश्यकता की पूर्ति होती है। परंतु आसीवन ब्रांच से निकला माइनर साल के बारह माहिने सूखी ही रहती है। वैसे जनपद के लिये सूखा माइनर एक बानगी मात्र है। यह बानगी यह बताने के लिये प्रर्याप्त है कि जनपद के किसानों की आवष्यकता की पूर्ति में माइनर कितनी कारगर है। फारेस्टर मो0 जायर ने बताया कि इस संबंध में नहर विभाग के एक्ससीएन व जेई को कई बार पत्र लिखा गया। परंतु समस्या का समाधान नहीं हुआ।

दस नलकूपों का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया

प्रभारी अधिकारी रघुनाथ मिश्र की अनुपस्थित में वन फारेस्टर मो0 जायर ने बताया कि नलकूप विभाग को दस नलकूप का स्टीमेट बनाकर उपलब्ध कराने को कहा गया है। परंतु एक माह से ऊपर हो गया। अभी तक स्टीमेट नहीं मिला है। उन्होने बताया कि नलकूप विभाग की तरफ से जानकारी दी गयी है कि पंक्षी विहार में 500 मीटर की दूरी के मानक के हिसाब से कुल पांच नलकूप ही लग सकते है। जैसे ही स्टीमेट आता है नलकूप का निर्माण कार्य शीघ्र ही शुरू कर दिया जायेगा।

सात समुंदर पर कर आती है साइबेरियाई मेहमान

कड़ाके की ठंड में जब अफगानिस्तान, चीन, मंगोलिया, युरोप, लद्दाख, आदि स्थानों में बर्फ की चादर बिछ जाती है। पंक्षियों को खाने व रहने की व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो जाती है तब ये पंक्षियां भारत की तरफ का रूख करती है। अक्टूबर से फरवरी मार्च तक विदेषी नवाबगंज में मेहमान के रूप में इठलाती-मचलाती भारतीय पर्यटकों का मन मोहती है। जो हिमालय पर्वत को पार कर आती है।

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