UP Board Exam: छात्र बोर्ड परीक्षा देने के लिए दिन-रात तैयारी करते हैं लेकिन इनमें कुछ छात्र पास होने के चक्कर में नकल माफिया का शिकार हो जाते हैं।
16 फरवरी से उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद यानी यूपी बोर्ड की परीक्षा चल रही है। लाखों छात्र परीक्षा दे रहे हैं। इनमें से कुछ छात्रों को परीक्षा देने को नहीं मिला। गुरुवार को जब छात्र सेंटर पर परीक्षा देने के लिए पहुंचे तो अंतिम समय में उन्हें एडमिट कार्ड नहीं मिला। इसलिए परीक्षा नहीं दे पाए।
दरअसल, यह मामला सिर्फ परीक्षा छूटने का नहीं, बल्कि शिक्षा माफिया और स्कूलों के गठजोड़ का है। नकल माफिया पास करवाने नाम पर हर साल हजारों बच्चों को चंगुल में फंसा लेते हैं। यह कोई आज का मसला नहीं है। ऐसे जानते हैं कैसे नकल माफिया के चंगुल में छात्र फंस जाते हैं?
कैसे चलता है नकल माफिया का गोरखधंधा?
नकल माफिया हर साल हाईस्कूल और इंटर में पास करवाने के नाम का झांसा देकर छात्रों को फंसाते हैं। माफियों का एक मजबूत तंत्र हैं। इसी तंत्र की मदद से माफिया काम करते हैं। नकल माफिया बिना मान्यता वाले स्कूल, मान्यता प्राप्त स्कूलों के एजेंट की तरह काम करते हैं। ये लोग बिना पढ़ें छात्रों को पास कराने की गारंटी लेते हैं।
ऐसे छात्रों का मान्यता वाले स्कूलों से रजिस्ट्रेशन और बोर्ड परीक्षा फार्म भरवाते हैं। इनकी स्कूलों के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत रहती है। इसी मिलीभगत से अंतिम समय तक भी नौवीं और 11वीं का रजिस्ट्रेशन होता है और बोर्ड परीक्षा फॉर्म भर जाता है।
जिन छात्रों का समय रहते ही रजिस्ट्रेशन फॉर्म भर जाता है, वें परीक्षा के समय शामिल हो जाते हैं। जिनका दस्तावेज में कोई कमी रह गई तो छात्रों का फॉर्म नहीं भर पाता। उनका या तो रिजेक्ट हो जाता है या वें परीक्षा से वंचित हो जाते हैं।
मान्यता प्राप्त स्कूलों से छाओं की होती है सेटिंग
माफिया छात्रों के फॉर्म मान्यता वाले स्कूल में भरवाता है। इस सब के बदले में नकल माफिया छात्रों से मोटी रकम लेते है। माफिया और स्कूल अपना हिस्सा तय करते हैं। जानकारों के अनुसार विभाग में भी जो लोग मिले होते हैं, वहां तक भी हिस्सा पहुंचता है। अगर कहीं किसी का हिस्सा नहीं पहुंच पाता है तो फॉर्म रिजेक्ट हो जाता है। इस सब खेल में मोटी रकम चलती है।
नकल माफिया पास करवाने के लिए हर साल हजारों छात्रों का भविष्य बर्बाद कर रहे हैं। वर्षों से हाईस्कूल और इंटर में पास करवाने के नाम का झांसा देकर धंधा चला रहे हैं। नकल माफिया पर कार्रवाई न होने से यह धंधा फलता-फूलता जा रहा है। वहीं प्रशासन नकल माफिया के खिलाफ कार्रवाई करने की बात करता रहता है।