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यह घोड़े की नाल है खास, 20 से 25 दिन बनाए रखेगी रफ्तार

धातु व निर्माण प्रक्रिया में बदलाव करके प्रोफेसर डॉ. संदीप संघल ने नाल बनाने की नई तकनीक विकसित की है।

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Sujeet Verma

Jan 07, 2016

कानपुर.
शहर के आईआईटी के मेटस साइंस एंड इंजीनियरिंग डिर्पाटमेंट के प्रोफेसर डॉक्टर संदीप संघल ने एक ऐसी घोड़े की नाल बनाई है, जो खुरों में लगने के बाद 25 से 30 दिन तक चलेगी। इससे घोड़ा पालने व उससे काम लेने वालों को हर हफ्ते नाल बदलने के झंझट से छुटकारा मिल जाएगा। धातु व निर्माण प्रक्रिया में बदलाव करके प्रोफेसर डॉ. संदीप संघल ने नाल बनाने की नई तकनीक विकसित की है।

एक साल पहले इस पर रखी नीव
डॉ. संघल ने लोहे में कार्बन का प्रतिशत बढ़ाकर प्रायोगिक क्रियाओं के बाद यह तकनीकी बनाई है। इस नई तकनीक से महीने भर तक घोड़े के पैर में नाल को सही सलामत रखा जा सकता है। एक टीम गठित करके डॉ़ संघल ने साल भर पहले इस पर काम शुरू किया था। उन्होंने शहर की मलिन बस्तियों व बीहड़ में रहने वाले घोड़ा मालिकों, नालबंदों व नाल बनाने वाले लोहारों से बात करके उनकी समस्या को समझने के बाद लोहे में बदलाव की प्रक्रिया शुरू की।

डॉ. संघल ने बताया कि अभी तक जो लोहे की नाल बनाई जा रही थी उसमें कार्बन का प्रतिशत बहुत कम
था। लोहे में 0.8 फीसद कार्बन मिलाने से उसकी क्षमता बढ़ गई। इसके बाद छह महीने तक आईआईटी की प्रयोगशाला में उसकी टेस्टिंग की गई। जब उसे नाल बनाए जाने के योग्य तैयार कर लिया गया तब लोहारों को दिया गया। उन्हें नाल बनाने की प्रक्रिया भी बताई गई इसके बाद तैयार की गई नाल का इस्तेमाल ईट-भट्टा में माल ढोने वाले घोड़ों पर किया गया और यह टेस्टिंग में सफल रही।

कई चरणों में हुई जांच
आईआईटी की प्रयोगशाला में स्थित साइंटिफिक इलेक्ट्रानिक व माइक्रोस्कोपी समेत उच्च तकनीक वाली मशीनों से इन नालों का टेनसाइल टेस्ट, हाईनेस टेस्ट व वेयर टेस्ट किया गया। टेस्ट में सफल
होने के बाद यह घोड़ों को एक महीने तक पहनाई गई जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए।

डॉ. संघल ने बताया कि कम कीमत में तैयार होने वाली ऐसी नाल उस लोहे से बनाई जा सकती है जिसके नट बोल्ट बनते हैं। वर्तमान समय में यह नाल लोहे की सरिया से बनाई जाती है। बताया कि घोड़े की नाल के घिसने का समय महीने भर से अधिक भी बढ़ाया जा सकता है लेकिन महीने भर बाद घोड़े के खुर इतने बड़े हो जाते हैं कि उसे काटने की जरूरत होती है। इसलिए इसके बाद नाल निकालना वैसे भी जरूरी हो जाता है।