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बाढ़ में डूबता रहा बनारस, टूर के लिये पैकिंग करते रहे पार्षद

एक सप्ताह पहले ही टूर कर वापस आए थे बनारस के पार्षद। बाढ़ की विभीषिका के बावजूद भी दोबारा टूर पर चले गए नगर निगम वाराणसी के पार्षद।

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Varanasi Uttar Pradesh

Aug 26, 2016

Nigam parshad at Kochi airport

Nigam parshad at Kochi airport

वाराणसी. जनता को बाढ़ से कराह रहे बनारस के पार्षद सैर के लिये टूर पर निकल गए। उनका आधिकारिक टूर भी काफी गुपचुप तरीके से था। पर पत्रिका ने सबसे पहले इसका खुलासा किया। इधर पार्षद बनारस से उड़कर मुंबई पहुंचे उधर पत्रिका ने उनकी पोल खोल दी। अब आपको बताते हैं पार्षदों के लिये टूर कितना जरूरी था। शायद इतना जरूरी कि उन्हें उस जनता का खयाल भी नहीं आया जिनके वोटों से जीतकर वो नगर निगम पहुंचे। हालात ये हैं कि जनता बाढ़ से कराह रही है और पार्षद टूर के मजे ले रहे हैं।



नगर निगम के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पार्षद अपने टूर को लेकर कितने उतावले थे। वह भी तब जब महज सप्ताह भर के अंदर ही पार्षद पीएम मोदी से मुलाकात के लिये गए हुए थे और गुजरात भी घूमे। इसके बाद भी जब टूर की बात आई तो पार्षद झट तैयार हो गए।






ऐसा नहीं कि टूर के समय और बाढ़ की विभीषिका पर कोई बात नहीं हुई। यदि हुई भी तो उतनी ही जितने पर दुख जताया जा सके। जब बाता आई कि पार्षदों का टूर रद्द कर दिया जाए तो अधिकारियों ने यह जानकारी दी कि टिकट कन्फर्म हो चुके हैं और होटल में रूम तक बुक हो चुके हैं। इन सब पर तकरीबन चार लाख तक रुपये खर्च किये जा चुके हैं।



फिर क्या था, इतना बहाना तो काफी था। अधिकारियों की इसी जानकारी को आधार बनाकर पार्षदों ने इस बात के लिये नगर निगम को मना लिया कि पार्षदों का टूर न कैंसिल किया जाय। फिर क्या था इधर बनारस बाढ़ में डूबता रहा और पार्षद अपनी पैकिंग में व्यस्त। बीच-बीच में बाढ़ पीड़ितों के लिये भी कुछ कर देते ताकि सनद रहे कि उन्हें अपनी जनता की फिक्र है।






टूर कहां जाए इसको लेकर भी नहीं थे एकमत
पार्षदों का आधिकारिक टूर कहां जाए इसको लेकर निगम पार्षद एकमत नहीं थे। यही वजह है कि पार्षद दो खेमों में बंट गए और दोनों खेमों का टूर अलग-अलग जगहों पर तय हुआ। निगम के सूत्रों की मानें तो जब यह तय हो गया कि पार्षदों का आधिकारिक टूर जाएगा, तो इसके बाद पार्षद देश के बेहतरीन नगर निगमों और नगर पालिकाओं को दरकिनार कर अपनी पसंदीदा पर्यटन की जगहों का सुझाव देने लगे। धीरे-धीरे पार्षद दो खेमों में बंट गए। चूंकि नगर निगम में बीजेपी के पार्षद ज्यादा हैं और मेयर भी बीजेपी का ही है ऐसे में एक खेमा बीजेपी पार्षदों का हो गया तो दूसरे खेमें में सपा, कांग्रेस और बसपा आदि हो गए। बीजेपी खेमे का टूर बेंगलूरू और उसके आसपास के शहरों का तय हुआ तो दूसरे खेमे का केरल के कोच्चि व उसके निकट के शहर।

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