पार्षदों का आधिकारिक टूर कहां जाए इसको लेकर निगम पार्षद एकमत नहीं थे। यही वजह है कि पार्षद दो खेमों में बंट गए और दोनों खेमों का टूर अलग-अलग जगहों पर तय हुआ। निगम के सूत्रों की मानें तो जब यह तय हो गया कि पार्षदों का आधिकारिक टूर जाएगा, तो इसके बाद पार्षद देश के बेहतरीन नगर निगमों और नगर पालिकाओं को दरकिनार कर अपनी पसंदीदा पर्यटन की जगहों का सुझाव देने लगे। धीरे-धीरे पार्षद दो खेमों में बंट गए। चूंकि नगर निगम में बीजेपी के पार्षद ज्यादा हैं और मेयर भी बीजेपी का ही है ऐसे में एक खेमा बीजेपी पार्षदों का हो गया तो दूसरे खेमें में सपा, कांग्रेस और बसपा आदि हो गए। बीजेपी खेमे का टूर बेंगलूरू और उसके आसपास के शहरों का तय हुआ तो दूसरे खेमे का केरल के कोच्चि व उसके निकट के शहर।