
Mahamana Pandit Madan Mohan Malviya Cancer Hospital
वाराणसी. उत्तर भारत के कैंसर रोगियों के लिए अच्छी खबर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महामना मदन मोहन मालवीय की कर्म स्थली बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में जिस कैंसर हॉस्पिटल की आधारशिला रखी थी। बता दें कि इसी साल मार्च में हॉस्पिटल का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। अब तक लगभग 85 फीसद काम पूरा हो चुका है। कार्यदायी कंपनी का दावा है कि विश्वविद्यालय के सुंदर बगिया में निर्माणाधीन महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर अस्पताल दिसंबर में टाटा मेमोरियल सेंटर को सौंप दिया जाएगा। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 दिसंबर 2016 को इस अस्पताल की आधारशिला रखी थी।
वैसे पीएम के आधारशिला रखने के बाद करीब साल भर तक केवल कागजों पर ही काम होता रहा। इसी साल मार्च में इसी साल मार्च में अस्पताल परिसर का निर्माण शुरू हुआ। आवासीय निर्माण का कार्य केंद्रीय लोक निर्माण विभाग ने पहले ही शुरू कर दिया था। लेकिन कार्य में देरी को देखते हुए अस्पताल परिसर का जिम्मा खुद टाटा ट्रस्ट ने ले लिया। टाटा ने तीन कंपनियों को कार्य आवंटित किया है। अस्पताल निर्माण जेएसएसएल जबकि कैपासाइट कंपनी करा रही है। मैनेजमेंट, क्वालिटी व इंजीनियरिंग का जिम्मा वन ग्रुप कंपनी को मिला है। कैपासाइट का पोर्टेबल कार्यालय तैयार हो गया है। कैपासाइट कंपनी के अधिकारी शैलेंद्र शर्मा के मुताबिक कैंसर अस्पताल के आरसीसी निर्माण का कार्य तकरीबन 85 फीसदी तक हो चुका है। जहां तक बिजली, पानी, फायर फाइटिंग, फनिशिंग का सवाल है तो ये सारे कार्य भी तेजी से चल रहे हैं। वैसे यह पहले से ही तय था कि कैंसर सेंटर की बिल्डिंग 'प्री-फैब्रिकेशन तकनीक पर आधारित होने से कम समय में निर्माण संभव होगा।
बीएचयू में प्रस्तावित पं. मदन मोहन मालवीय कैंसर सेंटर देश का अपनी तरह का ऐसा अकेला हॉस्पिटल होगा, जिसका भवन प्री-फैब्रिकेशन तकनीक से निर्मित होगा। यहां कैंसर के इलाज की हरसंभव व्यवस्था होगी। चिकित्सा विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. वीके शुक्ला के अनुसार तकरीबन 600 करोड़ की लागत से निर्माणाधीन इस कैंसर सेंटर की मानीटरिंग खुद पीएमओ कर रहा है।
क्या है प्री फैब्रिकेटेड बिल्डिंग
प्री-फैब्रिकेटेड बिल्डिंग के अधिकतर भाग को पहले ही फैक्ट्रियों में तैयार कर लिया जाता है, जिसे कंस्ट्रक्शन साइट पर लाकर असेंबल करते हैं। बिल्डिंग की दीवार, छत सभी चीजें जरूरत के हिसाब से सीमेंट व फाइबर आदि चीजों से बनी होती हैं। इस तरह की बिल्डिंग के निर्माण में कम समय लगता है।
बता दें कि बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में ही हर साल करीब 50 हजार कैंसर के मरीज आते हैं। इसके अलावा बनारस के अन्य अस्पतालों में भी कैंसर के हजारों मरीज आते हैं। विशेष सुविधा के लिए पूर्वाचल ही नहीं पूरे उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, नेपाल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों के मरीजों को मुंबई स्थित टाटा कैंसर सेंटर जाना पड़ता है। इसके कारण मरीजों को आर्थिक, मानसिक व शारीरिक परेशानी झेलनी पड़ती है। इसी के मद्देनजर प्रधानमंत्री मोदी ने काशी में कैंसर सेंटर बनाने की घोषणा की थी। उनकी पहल पर 12 दिसंबर 2016 को पीएमओ की विशेष टीम यहा आई और पूरी रिपोर्ट मागी। इसके बाद यहा से आइएमएस निदेशक प्रो. वीके शुक्ला व एसएस अस्पताल के तत्कालीन एमएस डॉ ओपी उपाध्याय ने पीएमओ में जाकर पूरी रिपोर्ट सौंपी। इसमें सुपर स्पेशियलिटी काप्लेक्स भी शामिल किया।
Published on:
08 Oct 2018 05:51 pm

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