
बीएचयू के पूर्व कुलपति प्रो जीसी त्रिपाठी
वाराणसी. विदायी समारोह के दौरान रविवार को दिए विवादित बयान के बाद काशी हिंदू विश्वविद्यालय के निवर्तमान कुलपति प्रो जीसी त्रिपाठी फिर से चर्चाओं में आ गए हैं। उनका बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल किया जा रहा है। इधर उनके बयान को लेकर कांग्रेस हमलावर हो गई है। राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) ने बाकायदा मानव संसाधन विकास मंत्रालय और यूजीसी को पत्र भेज कर उनके कार्यकाल में हुई नियुक्तियों को रद्द करने की मांग उठा दी है।
सितंबर महीने में जब बीएफए की छात्रा के साथ विश्वविद्यालय परिसर में छेड़खानी हुई और उसके बाद छात्राएं मुख्य द्वार पर धरने पर बैठी थीं तब भी प्रो. त्रिपाठी के बयान चर्चाओं में थे। उनके बयान ही थे कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय को उन्हें कार्यकाल समाप्ति तक अवकाश पर भेजना पड़ा। उस दौरान उन्होंने एक के बाद एक विवादित बयान दिए थे। जब एमएचआरडी द्वारा उन्हें छुट्टी पर भेजनी की खबर आई तो उन्होंने दिल्ली मे ही कहा था कि छुट्टी पर जाने से बेहतर होगा कि वह इस्तीफा दे दें। लेकिन वह छुट्टी पर भेजे गए।
अब कार्यकाल के अंतिम दिन जब वह विश्वविद्यालय में अपने विदायी समारोह में आए तो उन्होने यह कह कर सबको चौंका दिया कि अपने तीन साल के कार्यकाल में उन्होंने किन्हीं दबावों में ऐसे लोगों की नियुक्ति की और ऐसे लोगों को आगे बढ़ाया जो योग्य नहीं थे। बस क्या था उनके विरोधियों को मौका मिल गया। विरोध तो पहले से ही तत्कालीन वीसी के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों पर सवाल उठाते रहे हैं। अब तत्कालीन वीसी की स्वीकारोक्ति को उन्होंने अपने पूर्व के विरोध का साक्ष्य मान लिया है। इस कड़ी में सबसे पहले फेसबुक वॉल पर राजनीति विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व बीजेपी से गहरे ताल्लुक रखने वाले प्रो कौशल किशोर मिश्र ने अपनी भड़ास निकाली।
अब बीएचयू की एनएसयूआई के प्रभारी विकास सिंह ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय और यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन को पत्र भेज दिया है। यूजीसी को भेजे पत्र में उन्होंने मांग की है कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो जीसी त्रिपाठी के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों को रद्द किया जाए। उन्होंने कहा है कि यह विश्वविद्यालय यूजीसी के अधीन आता है। यह विश्वविद्यालय का देश ही नहीं दुनिया भर में नाम है। देश के कोने-कोने ही नहीं विदेश से भी विद्यार्थी यहां पढ़ने आते हैं। लेकिन प्रो. त्रिपाठी ने अपने कार्यकाल में अयोग्य लोगों की नियुक्ति कर न केवल विश्वविद्यालय की गरिमा को ठेस पहुंचाई है बल्कि शिक्षा के स्तर को भी गिराया है। अब तो वह इस असलियत को स्वीकार कर रहे हैं। उन्होंने अपने विदायी समारोह में यह स्वीकारोक्ति की है। ऐसे में यूजीसी तत्काल प्रभाव से उनके कार्यकाल में हुई सभी नियुक्तियों को रद कर दे। ऐसा ही एक पत्र उन्होंने मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भी भेजा है।
उधर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक अजय राय ने कहा है कि काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के वीसी ने जाते जाते खुद के चरित्र और एक महान शिक्षा संस्था को बर्बाद करने की वर्तमान सत्ता राजनीति के खेल को अपने ही इकबालिया भाषण से जिस तरह नियुक्तियों पर सवाल खड़ा किया है उससे विश्वविद्यालय के कामकाज एवं नियुक्तियों की जांच के लिए एक स्वतंत्र न्यायिक जांच आयोग गठित किया जाना अनिवार्य हो गया है। उन्होंने कहा है कि अपने कार्यकाल के अंतिम दिन कुलपति के भाषण ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की महान परंपराओं को विगत वर्षों में तहस नहस किए जाने की लांछनाओं को प्रमाणित कर दिया। कुलपति ने जिस तरह नियुक्ति जैसे पवित्र दायित्व के निर्वहन में दबाव और बेईमानी कबूल करते हुए अयोग्य नियुक्तियां होना स्वीकार किया है, वह शर्मनाक है। विश्वविद्यालय की गौरवशाली परंपरा से जुड़े लोग इस सच के खुलासे से शर्मसार हुए हैं।
कांग्रेस नेता ने कहा है कि यह बात स्पष्ट होना विश्वविद्यालय की साख बचाने के लिए बेहद जरूरी है कि कितने अयोग्य व अपात्र लोगों की नियुक्तियां हुईं,किनके कैसे दबाव में हुईं? संस्था के भगवाकरण में संघ की सूचियों के लिए दबावों से लेकर पैसे तक की भूमिकायें चर्चा में रही हैं,जिनकी जांच जरूरी है। इसके लिए न्यायिक जांच आयोग गठित हो। ऐसा नहीं हुआ तो न केवल महामना मालवीय जी की आत्मा मर्माहत बनी रहेगी, बल्कि संस्था की साख पर भविष्य में बदनुमा दाग का साया भी कायम रहेगा।विद्यार्थियों के जेहन में यह सवाल बना रहेगा कि कौन कौन अपात्र एवं अयोग्य शिक्षक उन्हें पढ़ा रहे हैं।
Published on:
27 Nov 2017 05:57 pm

बड़ी खबरें
View Allवाराणसी
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
