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माफिया से माननीय बने बृजेश सिंह को जब मिला था इस बाहुबली का साथ, विरोधी गैंग की टूट गयी थी कमर

दोनों पर ही था पांच-पांच लाख का इनाम, अब साथ हो रहे मुकदमों से बरी
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वाराणसी

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Devesh Singh

•

Updated: 24 Jul 2018, 4:42 PM IST

Mafia Don Tribhuvan Singh

Mafia Don Tribhuvan Singh

वाराणसी. माफिया से माननीय बने बृजेश सिंह की ताकत तब बढ़ गयी थी जब इस बाहुबली का साथ मिल गया था। फरारी के दौरान दोनों बाहुबलियों ने विरोधी खेमे की कमर तोड़ दी थी। पुलिस की गिरफ्तारी व सरेंडर करने के बाद से अपने उपर लगे आरोपों से बरी हो रहे हैं। बृजेश सिंह के इस सहयोगी को भी राजनीति की दुनिया में जाना है जिसके लिए सही समय का इंतजार किया जा रहा है।
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बाहुबली बृजेश सिंह पर यह आरोप लगता है कि पिता की हत्या का बदला लेने के लिए ही वह जरायम की दुनिया में आये थे। पिता के हत्यारों को मौत के घाट उतराने के लिए जब बृजेश सिंह जेल में बंद थी तो वही पर उनकी मुलाकात गाजीपुर के मुडियार गांव निवासी त्रिभुवन सिंह से हुई थी। आरोपों की माने तो बृजेश सिंह की तरह त्रिभुवन सिंह भी अपने पिता व भाई की मौत का बदला लेने के लिए जरायम की दुनिया में उतरे थे। त्रिभुवन सिंह के भाई हेड कॉस्टेबल राजेन्द्र सिंह की हत्या में साधु सिंह व बाहुबली मुख्तार अंसारी का नाम आया था और बनारस के कैंट थाने में 1998 में दोनों लोग पर नामजद मुकदमा दर्ज कराया गया था। इसके बाद साधु सिंह जेल चले गये थे और पुलिस कस्टडी में अपने नवजात बेटे को देखने पहुंचे थे इसी समय पुलिस की वर्दी में कुछ लोग वहां पर पहुंचे थे और ताबड़तोड़ गोली चला कर साधु सिंह की हत्या कर दी गयी थी इस हत्या का आरोप बृजेश सिंह व त्रिभुवन सिंह पर लगा था। माना जाता था कि भाई की हत्या के बदला लेने के लिए त्रिभुवन सिंह ने बृजेश के साथ मिल कर इस हत्याकांड को अंजाम दिया था। इसके बाद से बृजेश व त्रिभुवन सिंह की जोड़ी पर अपराध करने के आरोप में मुकदमे दर्ज होते गये।
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बृजेश सिंह की फरारी में बेहद खास जिम्मेदारी मिली थी त्रिभुवन सिंह को
बृजेश सिंह की फरारी के दौरान गैंग को संभालने की जिम्मेदारी त्रिभुवन सिंह को ही मिली थी। सूत्रों की माने तो बृजेश सिंह सबसे अधिक भरोसा त्रिभुवन पर करते थे। पुलिस के लिए बृजेश सिंह व त्रिभुवन सिंह की जोड़ी इतना सिरदर्द वाली साबित हुई थी कि दोनों लोगों पर पंाच-पांच लाख का इनाम रखा गया था। पुलिस सरगर्मी से त्रिभुवन सिंह की तलाश कर रही थी वह जानती थी कि एक बार त्रिभुवन सिंह का पता मिल जायेगा तो बृजेश सिंह को खोजना सबसे आसान हो जाता।
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बृजेश सिंह की हुई थी गिरफ्तारी, त्रिभुवन सिंह ने किया था सरेंडर
बृजेश सिंह की दिल्ली पुलिस ने नाटकीय ढंग से गिरफ्तारी की थी जबकि त्रिभुवन सिंह अपनी बुलेटप्रूफ वाहन से लखनऊ स्थित एसटीएफ के कार्यालय में पहुंचे थे। रजिस्टर पर सही नाम से एंट्री करने के बाद एसटीएफ के एसएसपी अमिताभ यश से मिले और कहा कि मेरा नाम त्रिभुवन सिंह है और मैं सरेंडर करने आया हूं। उस समय कहा गया कि सरेंडर करना था तो कोर्ट में करते। त्रिभुवन सिंह ने कहा कि कोर्ट भी तो पुलिस के पास ही भेजती। इसके बाद से बृजेश सिंह व त्रिभुवन सिंह जेल में है और लगातार मुकदमों से साथ ही बरी होते जा रहे हैं। इसी क्रम में गाजीपुर में कुंडेसर चट्टी कांड में अंसारी बंधु के काफिल पर फायरिंग का आरोप बृजेश व त्रिभुवन सिंह पर लगा था जिसमे उन्हें अब बरी कर दिया गया है।
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