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 गजब गड्ढा खोदते समय मिली सुरंग, क्षेत्र में अफवाहों का बाजार गर्म

क्या सुभाष चन्द्र बोस करते थे इस सुरंग का प्रयोग, जानिए क्या है मामला

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Devesh Singh

Dec 20, 2016

cathy

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वाराणसी. गंगा तट स्थित कैथी के प्राचीन गांव में शौचालय के लिए खोदे जा रहे गड्ढे में सुरंग मिलने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। सुरंग की जानकारी होते ही ग्रामीणों की भीड़ वहां पर जमा हो गयी। सुरंग की गहराई लगभग 20 फीट है और सुरंग से अंदर जाने के लिए रास्ता भी घुमा हुआ है। काफी समय पहले पास स्थित गंगा नदी में रत्न, आभूषण, मुद्रा आदि मिल चुकी है जिससे बाद से इस बात की चर्चा है कि यहां पर खजाना भी दबा हो सकता है। फिलहाल ग्रामीणों ने फोन से जिले के वरिष्ठ अधिकारियों को सुरंग की जानकारी दे दी है, जिससे पुरातत्व विभाग के लोग सुरंग की सच्चाई का पता लगा ले।
कैथी प्राइमरी स्कूल के बगल स्थित अति प्राचीन पकड़ी का पेड़ के नीचे रहने वाले राम सेवक उर्फ पप्पू गिरी के यहां खुले में शौच करने से मुक्ति दिलाने के लिए शौचालय का निर्माण कराया जा रहा है। शौचालय के सोखता के लिए गड्ढा खोदा जा रहा था। इस कार्य में राम सेवक के पुत्र अंकित गिरी व सूरज गिरी लगे हुए थे। लगभग पांच फीट चौड़ाई का गड्ढा पांच फीट गहराई तक ही खोदा गया था कि अचानक गड्ढे के मिट्टी धंस गयी और सूरज का फावड़ा भी मिट्टी के साथ नीचे चला गया। सूरज भी मिट्टी के साथ नीचे गिर जाता, लेकिन उसने पेड़ की जड़ को पकड़ कर अपनी जान बचायी। सूरंग का मुंह खुलते ही उसमे से जहरीली गैस निकलने लगी। इससे ग्रामीणों ने सुरंग के अंदर झांकने की हिम्मत नहीं जुटायी। लगभग दो घंटे बाद ग्रामीणों ने टार्च और बल्ब की रौशनी में सुरंग के अंदर झांका तो देखा कि सुरंग लगभग 20 फीट गहरी है और भीतर जाकर उत्तर दिशा की और मुड गयी है। सुरंग के बारे में राम सेवक गिरी ने बताया कि उनका परिवार इस जगह पर पिछलं पांच पीढ़ी से रहता आया है। उन्हें कभी इस बात का अंदाजा नहीं लगा था कि यहां पर सुरंग हो सकती है। अन्य ग्रामीणों ने भी दावा किया है यहां पर कोई निर्माण, कुंआ आदि नहीं है इसलिए यहां पर सुरंग का मिलना अचंभित करने वाला है।

छिपा हो सकता है बड़ा खजाना
कैथी क्षेत्र का बहुत ऐतिहासिक महत्व है। चंद्रवती गांव स्थित राजा डोमनदेव के किसे से गंगा गोमती संगम से कैथी तक सुंरग होने की बात कही जाती है। चर्चा है कि राजा ने अपना बहुमूल्य खजाना भी यहां पर छिपा कर रखा होगा। इस बात की संभावना इसलिए बलवती हो गयी कि कुछ वर्ष पूर्व गंगा नदी में बहुमूल्य आभूषण, सिक्के, रत्न आदि मिले थे जिसे जांच के लिए पुरात्तव विभाग ने अपने कब्जे में ले लिया था। ग्रामीणों का कहना है कि सुरंग की सही से जांच करायी जाये तो सालों पुराना राज सामने आ सकता है।

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नेताजी सुभाष चन्द्र बोस करते थे इस सुरंग का प्रयोग
कैथी में एक हवाई पट्टी भी बनी हुई है जो अंग्रेजों के समय बनायी गयी है और आजादी के पहले इसका उपयोग अंग्रेजी सेना भी करती थी लेकिन अब उसका उपयोग नहीं होता है। ग्रामीणों ने बताया कि उनके बड़े लोग बताते थे कि यहां पर स्वामी सारदानंद के नाम से नेता जी सुभाष चन्द्र बोस एक कंदरा में अंग्रेजों से बचने के लिए छिप कर रहते थे ओर इसी सुरंग का प्रयोग करते थे।


ग्रामीणों को सुरंग के राज खुलने का इंतजार
ग्रामीणों को सुरंग का राज खुलने का इंतजार है। ग्रामीणों ने बताया कि काशी नरेश की टकसाल वाराणसी से सारनाथ होते हुए राजा डोमन देव के किले से होते हुए राजा की वाडी राजवारी गांव तक जाती है। इसी रास्ते से राजा के खजाने को ले जाने व ले आने का काम होता था। फिलहाल सुरंग को लेकर तरह की चर्चा व्याप्त है और सही बात सुरंग कर रहस्य खुलने के बाद ही सामने आ पायेगा।

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