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कोपि-कोपि बोलेलीं छठिय मइया, सुना…

सृष्टि के एक मात्र प्रत्यक्ष देव सूर्य नारायण का चार दिवसीय व्रत अनुसरण शुरू. जानें क्या हुआ पहले दिन...

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Ajay Chaturvedi

Nov 04, 2016

Dala Chhath Puja 2016

Dala Chhath Puja 2016

वाराणसी. सृष्टि जिनके बगैर है अधूरी, जिनके बगैर दिवस की कल्पना नहीं की जा सकती, ऐसे देव जिन्हें हर धर्म संप्राय की है मान्यता। समस्त जीव जंतु वनस्पति का वजूद है जिन पर निर्भर, ऐसे भगवान भाष्कर की आराधना का पर्व शुक्रवार से आरंभ हुआ। नहाय-खाय से आरंभ यह अनुष्ठान चार दिन यानी सोमवार तक चलेगा।


आत्मिक शुद्धि से होती है शुरूआत
यूं तो हिंदू धर्म पूरी तरह से आत्म शुद्धि पर केंद्रित है। भारतीय परंपरा संस्कृति आत्मिक शुद्धता का पर्याय है। ऐसे में उदित नारायण की पूजा में शुद्धता स्वच्छता का ध्यान कुछ विशेष ही हो जाता है। अंतः मन से लेकर शारीरिक शुद्धि, वचन और कर्म की पवित्रता पर भी जोर रहता है। ऐसे में पूजन स्थल कैसे अछूता रह जाय सो उसकी भी हुई सफाई। घाटों पर पूजा वेदी बनाने को जुटे श्रद्धालु, मची होड़।


कद्दू की अनोना सब्जी के साथ शुरू हुआ 36 घंटे का व्रत अनुष्ठान
कद्दू की अनोना सब्जी (बिना नमक की) और रोटी (वह भी स्वच्छ आटे की) के अल्पाहार के साथ सुख, समृद्धि एवं ऐश्वर्य की कामना से चार दिवसीय सूर्य षष्ठी व्रत अनुष्ठान शुक्रवार से आरंभ हो गया। अनुष्ठान के पहले दिन कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को व्रती जनों ने आत्मिक एवं शारीरिक शुद्धि का संकल्प लिया। पूजन गृह को स्वच्छ कर भूमि पर कंबल का आसन बिछाया गया। इसके साथ ही लीन हो गए भगवान भास्कर की आराधना में।


अद्येत्यादि वाक्य के उच्चारण से शुरू हुआ अनुष्ठान
अद्येत्यादि वाक्य के उच्चारण से अनुष्ठान का साथ संकल्प लिया गया। अब शनिवार को पूजन गृह को पुनः स्वच्छ कर कमरे के एक निश्चित स्थल पर कलश स्थापित किया जाएगा। कमरे में बनेगा अष्टकमलदल उस पर लिखा जाएगा द्वादश सूर्य नाम। फिर पंचोपचार विधि से आरंभ होगा पूजन। मान्यता के अनुसार कार्तिक शुक्ल पक्ष की सप्तमी युक्त षष्ठी होने पर सर्वमनोरथ सिद्धि होती है।


चंद्र दर्शन और शशि को अर्घ्यदान के साथ शुरू होगा कठिन व्रत
अब पंचमी तिथि (शनिवार) को दिन भर का व्रत रखा जाएगा। फिर शाम ढलने पर शशि दर्शन और अर्घ्य दान के पश्चात चावल और गुड़ की बनी बखीर तथा रोटी का अल्पाहार ग्रहण करने के साथ रात्रि पर्यंत भजन कीर्तन का दौर चलेगा। विधानतः व्रती को अनुष्ठान के दौरान जमीन पर ही विश्राम करना चाहिए। रात्रि जागरण का भी नियम है।


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सूर्य के दिन रविवार को दिया जाएगा अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य
सप्तमी युक्त षष्ठी को निराजल व्रत रखने के साथ ही दिन में चार रंगों से सुशोभित मंडप में सूर्य नारायण का पूजन किया जाएगा। अनेक प्रकार के व्यंजन यथा मौसमी फल यथा शरीफा, गागल, नाशपाती, कच्ची हल्दी, नारियल, संतरा, मोसंबी, ईंख आदि के साथ सूर्य की आकृति वाले ठेकुआ का नैवेद्य चढेगा। फिर सूर्य नारायण की प्रीति के लिए गायन वादन होगा। षष्ठी की शाम को अस्ताचलगामी सविता को 'ऊं नमः सवित्रे जगदेकचक्शुवे जगत्प्रसूतिस्थ नाशहेतवे. त्रयी मनया त्रिगुणात्म धारिणे विरिचिं नारायण शंकरात्मने', इस मंत्र से श्रद्धलु गंया सरोवर में स्नान के बाद गीले बदन कमर तक जल में खड़े हो कर सूर्य के 12नाम से अर्घ्य देंगे। अगले दिन सप्तमी को अरुणिम सूर्य को अर्घ्य दान के साथ चार दिवसीय रवि षष्ठी व्रत अनुष्ठान का उद्यापन किया जाएगा।


घाट सफाई गीत
'कोपि-कोपि बोलेलीं छठिय मइया, सुना महादेव। मोरा घाटे दुबिया उपरजि गइले, मकड़ी बसेढ़ लेले..',
'हंसि हंसि बोलेलें महादेव, सुना ए छठिय मइया. हम राउर दुबिया छिलाई देबों, चनन छिरिक देबों..'

सफाई वेदी बनाने का गीत
'ए कवन देव पोखरा खनावे लें पयिटा बन्हावेलें रे। एक कवन देवी छठी के बरत कइलीं, कइसे जल जगाइब रे..',
'ए घाट मोरे छेके घटवरवा, दुअरे पियदवा लोग रे। एक रुपया त गेहु घटवरवा भइया ढेबुआ पियदवा लोग रेय़। ए दही भात देहु गनपति पूता अइसे जल जगइबि रे..'।

तैयारी गीत- 'भोर भइया जायेला मगह मुंगेर ले ले अइह हो भइया गेहूं के मोटरिया; अबकी के गेहुंआं महंग भइलें बहिनी छोड़ देहू ए बहिनी छठी के बरतिया'।

अर्घ्य दान गीतः-'कांचहि बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाई. रउरा भरहा होइहे कवन राम, बहंगी घाटे पहुंचाई'।.

व्रती जन की अभ्यर्थ का गीतः- 'कल सुपवा चढ़इबो छठिय मइया, छठी मइया के सुहाक. खोरिया रउरी बहारों, धन सम्पति हमरा के देईं'।

सूर्य के स्वरूप का वर्णन गीतः- 'ए गोड़े खरउवां ए दीनानाथ, हाथ में सोबरन के सौंटी. ए कान्हें जनेउआ ए दीनानाथ, चनन बांटे लिलार..'



डीरेका सूर्य सरोवर पर तैयारियां अंतिम दौर में
डीरेका के सूर्य सरोवर पर सूर्य षष्ठी व्रत अनुष्ठान की तैयारिया अंतिम चरण में हैं। सूर्य षष्ठी व्रत अनुष्ठान का संकल्प करने वाले लोग सूर्य सरोवर पर जा कर पूजन स्थल की साफ सफाई कर रहे हैं। वहीं आयोजक व्रतियो की सुविधा के लिए जी जान से जुटे हैं। डीरेका के सूर्य सरोवर पर व्रती जन जगह छेकाई और सफाई में खुद ही जुट गए हैं। वेदी बनाने का काम भी शुरू हो गया है। कोई कच्चा तो कोई पक्का वेदी बनाने में लगा है। बता दें कि यहां डीरेका सरोवर पर डीरेका कर्मचारियों के परिवार के अलावा बाहरी लोग भी सूर्य़ षष्ठी व्रत अनुष्ठान को आते हैं।


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सरोवर में जमा काई हटाने को डाली गई फिटकरी

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डीरेका छठ पूजा समिति के अध्यक्ष सोमश्वर राम ने बताया कि सूर्य षष्ठी व्रत में सफाई का विशेष खयाल रखा जा रहा है। समिति के कमलेश सिंह ने बताया कि सूर्य सरोवर पर छह नवंबर को व्रती महिलाओं के लिए 35 चेंजिंग रूम बनाए जा रहे हैं। तालाब में आई काई को दूर करने के लिए डीरेका प्रशाशन की ओर से फिटकरी डाली गई है।

रात्रि जागरण को होगा हनुमान चालीसा का 108 पाठ

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व्रत अनुष्ठान को भव्य रूप देने के लिए यहां छठ पूजा समिति की तरफ से रात भर निशुल्क चाय वितरण की व्यवस्था की गई है। रात में 108 बार हनुमान चालीसा का पाठ किया जायेगा जिसका उद्यापन सात नवंबर की सुबह सुंदर कांड के पाठ से होगा।



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सूर्य सरोवर की चौहद्दी सजाई जा रही झालरों से
समिति के अध्यक्ष सोमेश्वर राम, कमलेश सिंह, अमरेश कुमार चंद्रेश्वर ओझा आदि की टीम व्रती महिलाओं और उनके परिजनों का खयाल रखने को कटिबद्ध हैं। सांस्कृतिक संध्या का आयोजन के साथ मेले का आयोजन डीरेका इंटर कालेज के खेल मैदान में किया गया है। सरोवर को चारों तरफ झालरों से सजाने का काम चल रहा है।



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घाटों की बुरा हाल, तटों पर जमा है मिट्टी
एक तरफ जहां डीरेका में छठ पूजा समिति पूरे मनोयोग सो सूर्य सरोवर की सफाई व्रती जनों की सुविधा के लिए तन,मन, धन से जुटी है। डीरेका प्रशासन भी सहयोग कर रहा है। वहीं काशी के घाटों का बुरा हाल है। हाल में आई बाढ़ के बाद से गंगा तट पर जमा मिट्टी के ढूहों तक को नहीं हटाया जा सका है। जिम्मेदार लोगों को इसकी तनिक भी परवाह नहीं। यह जानते हुए कि इस पर्व में स्वच्छता का विशेष महत्व होता है, फिर भी जिला प्रशासन भी मौन है। नगर निगम से तो अपेक्षा करना ही फिजूल है।




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