सप्तमी युक्त षष्ठी को निराजल व्रत रखने के साथ ही दिन में चार रंगों से सुशोभित मंडप में सूर्य नारायण का पूजन किया जाएगा। अनेक प्रकार के व्यंजन यथा मौसमी फल यथा शरीफा, गागल, नाशपाती, कच्ची हल्दी, नारियल, संतरा, मोसंबी, ईंख आदि के साथ सूर्य की आकृति वाले ठेकुआ का नैवेद्य चढेगा। फिर सूर्य नारायण की प्रीति के लिए गायन वादन होगा। षष्ठी की शाम को अस्ताचलगामी सविता को 'ऊं नमः सवित्रे जगदेकचक्शुवे जगत्प्रसूतिस्थ नाशहेतवे. त्रयी मनया त्रिगुणात्म धारिणे विरिचिं नारायण शंकरात्मने', इस मंत्र से श्रद्धलु गंया सरोवर में स्नान के बाद गीले बदन कमर तक जल में खड़े हो कर सूर्य के 12नाम से अर्घ्य देंगे। अगले दिन सप्तमी को अरुणिम सूर्य को अर्घ्य दान के साथ चार दिवसीय रवि षष्ठी व्रत अनुष्ठान का उद्यापन किया जाएगा।