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इंदौर-पटना एक्सप्रेस में खत्म हो गया परिवार,  बच्चे के अंतिम संस्कार में रो पड़ा गांव

परिवार की कहानी सुन कर आंखों से निकल जायेंगे आंसु, मां-बाप व बहनों  के पास ही जली अभय की चिता

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Devesh Singh

Nov 22, 2016

Indore-Patna Express accident

Indore-Patna Express accident

वाराणसी. इंदौर-पटना एक्सप्रेस हादसे में एक पुरा परिवार ही खत्म हो गया। मां-बाप व दो बहने पहले ही मौत की नींद सो चुकी थी। परिवार का अंतिम सदस्य व गंभीर रुप से घायल बच्चे ने भी सोमवार देर रात को दम तोड़ दिया। बेटे के घर जब बच्चे का शव पहुंचा तो सारा गांव ही रो पड़ा। बच्चे की अंतिम यात्रा में पुरा गांव शामिल हुआ और उसका अंतिम संस्कार किया गया। एक दिन पहले ही ग्रामीणों ने माता- पिता व दो बहनों का अंतिम संस्कार किया था।
पिंडरा के फूलपुर थाना क्षेत्र के कायस्थान के संजय (35) अपनी पत्नी प्रतिभा (32) दो बेटी सुरभि (13) व सुहानी (16) व बेटे अभय (4) के साथ इंदौर-पटना एक्सप्रेस में घर आने के लिए सवार हुए थे। कायस्थान निवासी कमलेश श्रीवास्तव की बेटी निधि की 24 नवम्बर को शादी होनी थी और उसी शादी में भाग लेने के लिए संजय अपने परिवार के साथ ट्रेन में सवार हुए थे। इंदौर में नौकरी करने वाले संजय को क्या पता था कि ट्रेन का सफर उनके परिवार का अंतिम सफर हो जायेगा। ट्रेन हादसे में संजय, प्रतिभा, सुरभि व सुहानी की मौत हो गयी थी जबकि चार साल का बेटा अभय गंभीर रूप से जख्मी थी और जीवन व मौत से संघर्ष कर रहा था। चारों के शव सोमवार को काशी में लाये गये थे, जिनका ग्रामीणों ने मिल कर अंतिम संस्कार किया था। एक ही परिवार में चार लोगों की दर्दनाक मौत से सारे गांव में मातम पसरा था सभी लोगों के आंखों में आंसु थे। लोगों को उम्मीद थी कि अभय बच जायेगा तो परिवार का नाम रखने वाला कोई रहेगा। लोगों को नहीं पता था कि वक्त की बेहरहम मार ने पुरे परिवार को उजाडऩे की ठानी थी और सोमवार को देर रात अभय ने भी दम तोड़ दिया। शोक में डूबे गांव के लोगों को जब इसकी सूचना मिली तो कोहराम मच गया। जिसने भी अंतिम बच्चे की मौत की खबर सुनी वह फफक-फफक का रो पड़ा। सभी के जुबान पर एक ही बात थी कि वक्त इतना बेहरहम हो सकता है कि हंसते-खेलते एक परिवार को ही खत्म कर दिया।

बेटे अभय की अंतिम यात्रा में उमड़ा पुरा गांव, मां-बाप के पास ही जली अभय की चिता
बेटे अभय की अंतिम यात्रा में पुरा गांव उमड़ पड़ा। गांव वाले फफक कर रो रहे थे। जिस जगह पर अभय के माता-पिता व बहनों की चिता जली थी वहीं पर अभय की चिता जलायी गयी। ट्रेन हादसे में एक परिवार पुरी तरह से खत्म हो गया। ग्रामीणों का यही कहना था कि वक्त इतना क्रूर हो सकता है जिसकी उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी।

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