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मीराबाई के भजन की नाम रही गंगा किनारे की घाट संध्या

उभरते कलाकारों ने दिखायी प्रतिभा, जानिए क्या है कहानी

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Devesh Singh

Jul 17, 2017

Ghat Sandhya

Ghat Sandhya



वाराणसी. रीवा घाट पर प्रतिदिन आयोजित होने वाली घाट संध्या अपने 167 वें पड़ाव पर पहुंच चुकी है। एक युवा आईएएस पुलकित खरे ने स्थानीय कलाकारों को मंच देने के उद्देश्य से इस कार्यक्रम का तानाबाना बुना था जो अपनी सार्थकता को साबित करने में सफल रहा है। सावन के दूसरे सोमवार को घाट संध्या की शाम मीरा भाई के भजन के नाम रही।
Mirabai

Bhajan

कार्यक्रम की शुरूआत गेणश वंदना से की गयी। इसके बाद सौम्या गुप्ता ने कथक की दमदार प्रस्तुति कर समारोह में जान डाल दी। सौम्या ने थाट, आमद, टुकड़े, तिहाई व परन के साथ पाराम्परिक कथक को जरिए सबको यह बताया कि हमारे शास्त्रीय संगीत में कितनी विविधता व क्षमता है। युवा कलाकार ने बताया कि शास्त्रीय संगीत एक तपस्या है और मेहतन व निष्ठा के साथ यह तप करता है उसे संगीत में निपुणता का फल पाने से कोई नहीं रोक सकता है। कार्यक्रम के अंत में मीराबाई के भजन मेरे श्याम सुन्दर को नृत्य के जरिये मनोहारी ढंग से प्रस्तुत किया गया। गायन व हारमोनियम पर आनंद किशोर, तबला अमित किशोर व बोल डा.विधा नागर के थे। कलाकारों को राम मोहन लखेटिया ने प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया।
Reeva Ghat

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कला वीथिका में पूजा केशर की प्रदर्शनी को सबने सराहा
कार्यक्रम में सबसे खास बात उसका तानाबाना है। एक मंच कलाकारों को मिलता है जो नृत्य व संगीत के जरिए अपनी क्षमता दिखाते हैं तो दूसरा मंच चित्रकार व फोटोग्राफर को दिया जाता है। यह एक ऐसा मंच है, जहां से काशी की संस्कृति, सभ्यता व प्राचीनता का अवलोकन किया जा सकता है। पूजा केशरी की कला प्रदर्शनी ने सबका मन मोह लिया।

Kathak

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