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पटना हाई कोर्ट ने नर्सिंग होम की लापरवाही पर लगाई फटकार, कहा- सपने दिखाकर स्ट्रेचर पर बेजान लाश सौंप देते हैं

पटना हाई कोर्ट ने प्राइवेट नर्सिंग होम की लापरवाही पर लगाई फटकार, कहा- सपने दिखाकर मौत बेचते नर्सिंग होम

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bihar excise act | पटना हाई कोर्ट

पटना हाई कोर्ट

पटना मेडिकल लापरवाही के एक मामले की सुनवाई करते हुए पटना हाई कोर्ट ने कहा कि इलाज के दौरान बिहार के प्राइवेट नर्सिंग होम में मरीजों का मरना एक आम बात हो गई है। जबकि प्राइवेट नर्सिंग होम परिवारों से भारी फीस लेकर मरीज को अपने यहां भर्ती लेते हैं। एक प्राइवेट नर्सिंग होम में बच्चे के जन्म के दौरान माँ की मौत मामले से जुड़े एक याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना हाई कोर्ट ने बातें कही।

सपने दिखाकर वसूलते हैं बड़ी रकम

दरअसल, जस्टिस राजीव रॉय एक प्राइवेट नर्सिंग होम के मालिक की अग्रिम ज़मानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिस पर हत्या न करने योग्य गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया था। एक बच्चे को जन्म देते वक्त माँ की मौत उस नर्सिंग होम में हुई, जो नर्स-याचिकाकर्ता का था और कैमूर ज़िले के मोहनिया में बिना रजिस्ट्रेशन के अवैध रूप से चल रहा था। कोर्ट ने 28 जनवरी को कहा, "एक जवान गर्भवती महिला बच्चे को जन्म देने के लिए राज्य में कहीं भी एक प्राइवेट नर्सिंग होम जाती है, उसकी आँखों में खुशी होती है, फिर बिना रजिस्ट्रेशन वाले प्राइवेट नर्सिंग होम माता-पिता से भारी रकम वसूलते हैं और उन्हें बड़े-बड़े सपने दिखाते हैं।"

बेजान लाश को स्ट्रेचर पर सौंप देते हैं

आदेश में आगे कहा गया कि, हालांकि, सच्चाई यह है कि वहाँ बुनियादी ज़रूरतें/उपकरण भी नहीं हैं, विशेषज्ञ/डॉक्टर की मौजूदगी की तो बात ही छोड़ दें, और नतीजा यह होता है कि डिलीवरी के बाद, बच्चे के साथ, माता-पिता उस जवान महिला की बेजान लाश को स्ट्रेचर पर रखकर हॉस्पिटल से बाहर ले जाते हैं। कोर्ट ने आगे कहा कि चूंकि याचिकाकर्ता एक नर्स के तौर पर काम कर रही है, ऑपरेशन दूसरे डॉक्टर ने किया था, और उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। इस आधार पर उसे अग्रिम ज़मानत का लाभ दिया जा सकता है। बशर्ते वह नवजात बच्चे को 1 लाख रुपये का भुगतान करे। यह रकम बच्चे के नाम पर फिक्स्ड डिपॉज़िट के रूप में सभी डिटेल्स के साथ जमा की जाएगी, जिसे वह बच्चा सोलह साल की उम्र पूरी करने के बाद ही अपनी पढ़ाई के लिए कैश करवा पाएगा।

अवैध नर्सिंग होम फल-फूल रहे

कोर्ट ने बिहार के विभिन्न जिलों बिहार में बिना रजिस्ट्रेशन वाले अवैध नर्सिंग की चर्चा करते हुए कहा कि ज़िलों के सिविल सर्जन-सह-मुख्य चिकित्सा अधिकारियों के संरक्षण में ऐसे नर्सिंग होम चल रहे हैं। वे अपने ज़िले का डेटा कभी इकट्ठा नहीं करते ताकि यह पता चल सके कि बिना रजिस्ट्रेशन वाले नर्सिंग होम की ऐसी आपराधिक लापरवाही के कारण कितनी जवान महिलाओं ने इस दुनिया को अलविदा कहा।

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