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PATRIKA EXCLUSIVE यूपी की राजनीती में आने को  बेताब था बिहार का माफिया डॉन

लालू ने भी तैयार कर रखी थी जमीन, पूर्वांचल का माफिया डॉन था साथ पर सुप्रीम कोर्ट के चाबुक ने फेल किया प्लान

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Vikas Verma

Oct 02, 2016

mfia don shahabuddin and laloo

mfia don shahabuddin and laloo

वाराणसी. बिहार का सबसे खूंखार माफिया डॉन शहाबुद्दीन उत्तर प्रदेश की राजनीति में आने को था तैयार। पत्रिका के हाथ लगी अहम् जानकारी। जेल जाने से बचने के लिए शहाबुद्दीन बिहार छोड़ने को भी तैयार था। सुप्रीम कोर्ट में दलील भी दी लेकिन बात नहीं बनी और माफिया डॉन का सपना चकनाचूर हो गया।

गौरतलब है कि सिवान के माफिया डॉन शहाबुद्दीन को देश के सबसे क्रूरतम काण्ड में से एक तेजाब काण्ड के मामले में पटना हाईकोर्ट से जमानत मिली थी। जमानत को लेकर विरोध शुरू हुआ और बिहार सरकार भी कोर्ट पहुंची। राजीव रोशन की हत्या मामला में सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाई कोर्ट के फैसले को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने शहाबुद्दीन को हिरासत में ले कर वापस जेल भेजने का निर्देश दिया। जस्टिस पिनाकी घोष और जस्टिस अमिताव रॉय की बेंच ने यह फैसला सुनाया. सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत को निर्देश दिया है कि जल्द से जल्द ट्रायल पूरा करे।

इससे पहले, शहाबुद्दीन के वकील शेखर नाफड़े ने कई तकनीकी पहलुओं के सहारे जमानत रद ना करने के लिए जोरदार पैरवी की थी। उन्होंने दलील दी कि चंदा बाबू के जिस तीसरे लड़के की हत्या का आरोप उनके मुवक्किल पर है, उस हत्या के समय तो वो जेल में था। दूसरी तरफ चंदा बाबू के वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट से कहा था कि शहाबुद्दीन जेल में था, लेकिन अपनी मर्जी से जब चाहता था, बाहर आ जाता था और ये बात तो सीवान के मजिस्ट्रेट ने भी अपनी रिपोर्ट में बताई थी।

शहाबुद्दीन के वकील ने दलील दी थी कि उनके मुवक्किल को चार्जशीट की कॉपी तक नहीं दी गई. कोर्ट ने चार्जशीट वाले आरोप पर जब बिहार सरकार के वकील से पूछा तो बिहार सरकार के पास कोई जवाब नहीं था। जिस पर कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि ये तो गंभीर बात है कि 17 महीने तक अभियुक्त को चार्जशीट की कॉपी नहीं दी गई। प्रशांत भूषण ने इस आरोप का जवाब देते हुए कहा था कि शहाबुद्दीन ने कभी भी चार्जशीट की मांग नहीं की। ऐसे में ये आरोप बेबुनियाद है।

आखिर में शहाबुद्दीन ने कोर्ट से ये गुहार लगाई थी कि आप जो चाहें शर्ते लगा दें. आप कहें तो मैं बिहार छोड़ने को तैयार हूं, लेकिन जमानत रद्द न की जाए। कोर्ट ने एक नहीं सुनी। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के बाहुबली नेता मोहम्मद शहाबुद्दीन की जमानत रद कर दी है। इसके बाद शहाबुद्दीन ने सीवान ष्टछ्वरू कोर्ट में सरेंडर कर दिया है। खबरों की माने तो इससे पहले शहाबुद्दीन को गिरफ्तार करने के लिए सीवान के एसपी प्रतापपुर पहुंचे थे।

सूत्र बताते हैं कि शहाबुद्दीन और उसके आका लालू प्रसाद यादव को अच्छे से पता था कि जमानत पर रिहाई से बवेला मचना तय है। इसलिए शाहबुद्दीन को उत्तर प्रदेश की राजनीती में प्रवेश कराने की तैयारी कर रखी थी। इसके लिए शहाबुद्दीन अपने मित्र व पूर्वांचल के माफिया दबंग विधायक मोख्तार अंसारी के संपर्क में था। उधर लालू भी अपनी लालटेन लेकर मुलायम से रिश्तेदारी निभाने के लिए उत्तर प्रदेश आने की हामी भर चुके थे। योजना तो यह थी कि अगर मोख्तार की पार्टी कौमी एकता दल का सपा में विलय होता है तो कौएद के हिस्से से बिहार के किसी सीमावर्ती इलाके से शहाबुद्दीन चुनाव लड़ता। अगर गठबंधन न होता तब कौएद और लालू की पार्टी का यूपी में गठबंधन कर चुनाव लड़ा जाता लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने यूपी-बिहार के माफिया डॉन और ऐसे लोगों को राजनीती में लाने को आतुर राजनेताओं को करारा झटका दे दिया।

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