इस मिठाई को बनाने के लिए सबसे पहले कच्चे दूध को बड़े-बड़े कड़ाहों में खौलाया जाता है। फिर इसके बाद रात में उस खौले दूध को खुले आसमान के नीचे रख दिया जाता है। पूरी रात ओस पडऩे की वजह से इसमें झाग पैदा होता है। सुबह दूध को मथनी से मथा जाता है। फिर इसके बाद छोटी इलायची, केसर एवं मेवा डालकर पुन: मथा जाता है। इसकी विशेषता यह है कि इसे कुल्हड़ में डालकर बेचा जाता है।