पूर्वांचल में आज भी बाहुबलियों की चलती है। सत्ता के साथ रहे या फिर विपक्ष में। क्षत्रिय बाहुबलियों ने अपना रास्ता खुद तैयार किया है। पूर्वांचल के बड़े बाहुबली क्षत्रिय नेता में पहला नाम बृजभूषण शरण सिंह का आता है। बृजभूषण शरण सिंह के यहां यूपी के नामी बाहुबली सलामी करने आते हैं। कैसरगंज से बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह पर कई अपराधिक मुकदमे दर्ज हैं लेकिन क्षत्रिय समाज में बृजभूषण शरण सिंह का इतना नाम है कि उन्हें पार्टी व जगह की जरूरत नहीं होती है जहां से भी चुनाव लड़ते है अपने बाहुबल से जीत कर दिखाते हैं। कुंडा के रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया का नाम तो प्रदेश की जनता के जुबान पर चढ़ा रहता है। राजा भैया को सपा व बीजपी का साथ मिलता है लेकिन उन्हें चुनाव जीतने के लिए किसी पार्टी के सिंबल की जरूरत नहीं होती है। राजा भैया को राजनीतिक कारणों के चलते लम्बे समय तक जेल में भी रहना पड़ा था लेकिन उससे उनके राजनीति कॅरियर पर असर नहीं पड़ा है और आज भी प्रतापगढ़ में एक ही नाम बोलता है वह है क्षत्रिय बाहुबली नेता राजा भैया। धरहरा के मिट्टी में जन्म लिए बाहुबली क्षत्रिय नेता बृजेश सिंह के नाम से यूपी के अतिरिक्त बिहार, उड़ीसा, एमपी भी कांपता था। एक समय बृजेश सिंह के उपर पांच लाख का इनाम था। बृजेश सिंह ने पहली बार वर्ष 2012 में विधानसभा का चुनाव लड़ा था लेकिन वह हार गये थे बाद में उन्होंने वर्ष 2016 में एमएलसी चुनाव जीत कर अपने बाहुबल का दम दिखाया था। खास बात है कि सपा की सरकार होने के बाद भी इस क्षत्रिय बाहुबली ने सीएम अखिलेश के प्रत्याशी को शिकस्त दे दी थी।