कई असफल कदमों के बाद 8 अगस्त, 2005 को यूपीएससीसीएल की संपत्तियों की बिक्री के लिए समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित हुआ। चार कंपनियों मेसर्स जय प्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड, मेसर्स डालमिया सीमेंट लिमिटेड, मेसर्स लफार्ज प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स ग्रासिम इंडस्ट्रीज लिमिडट की निविदाओं को 4 अक्टूबर, 2005 को खोला गया। जय प्रकाश एसोसिट्स लिमिटेड की 459 करोड़ रुपये की निविदा सबसे अधिक थी। दूसरे स्थान पर मेसर्स डालमिया सीमेंट लिमिटेड की 376 करोड़ रुपये और तीसरे स्थान पर मेसर्स लफार्ज (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड की 271 करोड़ रुपये की निविदाएं थीं। जेएएल की 359 करोड़ रुपये की निविदा को उच्च न्यायालय, इलाहाबाद ने 30 जनवरी, 2006 को स्वीकृति प्रदान की। जेएएल ने निविदा की 25 फीसदी धनराशि जमा की और शेष धनराशि को तीन किस्तों में भुगतान करने की पेशकश की। धनराशि का भुगतान होने पर उच्च न्यायालय, इलाहाबाद ने 11 अक्टूबर, 2006 को जेएएल के पक्ष में यूपीएससीसीएल की बिक्री की पुष्टि कर दी।