24 अक्टूबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

अहमदाबाद
नाक से सांस नहीं ले पा रही नवजात का जटिल आपरेशन कर बचाई जान
Play video

नाक से सांस नहीं ले पा रही नवजात का जटिल आपरेशन कर बचाई जान

पी़डियाट्रिक विभागाध्यक्ष व चिकित्सा अधीक्षक डॉ. जोशी के अनुसार यह बीमारी एक दुर्लभ जन्मजात खामी है जिसमें बच्चे के दोनों नाक के छिद्र पीछे से बंद रहते हैं। ऐसे शिशु नाक से सांस नहीं ले पाते और केवल रोने पर ही मुंह से थोड़ी हवा ले पाते हैं। ऑक्सीजन की कमी से जान का खतरा बढ़ जाता है। लड़कियों में इसका अनुपात अधिक होता है।निशुल्क किया
Follow Patrika on Google News
Google source verification

अहमदाबाद

•

image

Omprakash Sharma

•

Updated: 29 May 2026, 10:09 PM IST

कच्छ जिले के श्रमिक परिवार की नवजात बच्ची, जो बायलेट्रल कोएनल एट्रेसिया जैसी अत्यंत दुर्लभ और जानलेवा जन्मजात खामी के साथ पैदा हुई थी, उसे सिविल अस्पताल के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के चिकित्सकों की टीम ने सफल ऑपरेशन के बाद नया जीवन दिया है। दरअसल इस नवजात के नाक के छिद्र पीछे के भाग से बंद थे जिन्हें ऑपरेशन के जरिए खोला गया है। आंकड़ों के आधार पर देखें तो लगभग पांच से आठ हजार बच्चों में से किसी एक बच्चे को यह खामी हो सकती है।

सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी ने बताया कि बच्ची का जन्म 1 मई 2026 को कच्छ जिले के नलिया में हुआ था। जन्म के तुरंत बाद सांस न ले पाने पर उसे भुज और फिर अहमदाबाद रेफर किया गया। जांच में पता चला कि बच्ची के दोनों नाक के छिद्र पीछे से पूरी तरह बंद हैं। 12 मई को एंडोस्कोपिक ट्रांसनेजल कोएनोप्लास्टी सर्जरी की गई, जिसमें नाक का बंद मार्ग खोलकर सांस लेने का रास्ता बनाया गया।

ऑपरेशन के बाद बच्ची को एनआइसीयू में वेंटिलेटर पर रखा गया और विशेषज्ञ टीम ने पांच दिन तक गहन देखभाल की। इसके बाद बच्ची धीरे-धीरे स्वस्थ होती गई। वह अब बिना किसी सपोर्ट के सामान्य रूप से सांस ले रही है और मां का दूध भी पी रही है।

क्या है बायलेट्रल कोएनल एट्रेसिया

पी़डियाट्रिक विभागाध्यक्ष व चिकित्सा अधीक्षक डॉ. जोशी के अनुसार यह बीमारी एक दुर्लभ जन्मजात खामी है जिसमें बच्चे के दोनों नाक के छिद्र पीछे से बंद रहते हैं। ऐसे शिशु नाक से सांस नहीं ले पाते और केवल रोने पर ही मुंह से थोड़ी हवा ले पाते हैं। ऑक्सीजन की कमी से जान का खतरा बढ़ जाता है। लड़कियों में इसका अनुपात अधिक होता है।निशुल्क किया

ऑपरेशन, स्वास्थ्य मंत्री ने सराहा

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया ने इस उपलब्धि को सराहते हुए कहा कि निजी अस्पतालों में लाखों रुपये खर्च वाली ऐसी जटिल सर्जरी यहां पूरी तरह नि:शुल्क की गई। आधुनिक तकनीक, कुशल डॉक्टरों और टीमवर्क का यह शानदार उदाहरण है।