Ahmedabad. साबरमती सेंट्रल जेल में कैदियों के मानसिक और आध्यात्मिक विकास के लिए एक अनोखी पहल की गई। जेल परिसर में पहली बार तीन दिवसीय हिमालयन समर्पण ध्यान-योग शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में कैदियों और जेल कर्मचारियों ने भाग लिया। तीन दिनों तक ध्यान और योग के माध्यम से आत्मचिंतन और सकारात्मक जीवन का संदेश पाया।
हिमालय के योगी शिवकृपानंद स्वामी ने ध्यान एवं योग की विभिन्न विधि और उसके लाभों के बारे में जानकारी दी। मुख्य शिविर से दो दिन पहले जेल परिसर में एक प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें 400 से अधिक कैदियों और जेल कर्मचारियों ने भाग लिया। प्रदर्शनी के माध्यम से उन्हें हिमालयन समर्पण ध्यान-योग की मूल अवधारणा, इसके उद्देश्य और जीवन में इसकी उपयोगिता के बारे में सरल भाषा में समझाया।
आत्म शांति को ध्यान जरूरी: स्वामी
शिवकृपानंद स्वामी ने कैदियों को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य जीवन बहुत मूल्यवान है। इसे बेहतर बनाने के लिए नियमित ध्यान आवश्यक है। जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और आत्मशांति प्राप्त करने के लिए ध्यान और आत्मचिंतन का अभ्यास बेहद जरूरी है।शिविर के समापन अवसर पर सीआइडी इंटेलिजेंस चीफ अशोक यादव, गुजरात के पूर्व डीजीपी एस.एस. खंडवावाला, पुलिस उपमहानिरीक्षक (जेल) राकेश बारोट तथा साबरमती जेल के अधीक्षक गौरव अग्रवाल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।