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शहर में शुक्रवार को मौसम का मिजाज बदला नजर आया। सुबह मंद-मंद हवा चलने से राहत मिली, हालांकि धूप निकलने के बाद गर्मी और उमस ने पसीने बहाए। शाम को तेज हवा संग धूल उड़ी। घनघोर घटाओं ने तेज बरसात से शहर को तरबतर कर दिया। बरसात से कई जगह सड़कों पर पानी भर गया। नाले-नालियां भी बह निकले। लोगों को भीषण गर्मी और धूप से राहत मिली। अधिकतम तापमान 37.3 और न्यूनतम 27.1 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग के अनुसार शाम 5.30 बजे तक 36.7 मिलीमीटर बरसात दर्ज की गई।बादलों के बीच सूरज तांक-झांक का दौर चला। दोपहर में गर्मी और उमस ने लोगों को परेशान कर दिया। दोपहर 2 बजे बाद काले बादलों ने घेर लिया। शाम करीब 4 बजे तेज हवा संग धूल उड़ी। शाम 4.30 बजे बादलों ने चुप्पी तोड़ी। शास्त्री नगर, लोहागल रोड, कायड़, वैशाली नगर, फाॅयसागर रोड, रीजनल कॉलेज, बी.के. कौलनगर, हरिभाऊ उपाध्याय नगर, कोटड़ा, पंचशील, कोटड़ा, रामगंज, केसरगंज सहित अन्य इलाकों को तेज बरसात ने भिगोया। इससे कुछ इलाकों में सड़कों पर पानी भर गया। आंतेड़, क्रिश्चियनगंज और अन्य नालों-नालियों में पानी बह निकला।
रुकना पड़ा लोगों को
घटाओं के बरसने से सड़कों पर एकबारगी कुछ नजर नहीं आया। दोपहिया, तिपहिया और चौपहिया वाहन चालकों को लाइट जलानी पड़ी। कई जगह पानी भरने से वाहन चालकों और राहगीरों को पेड़ों और दुकानों के नीचे रुकना पड़ा।
बरसात से मिली राहत
मानसून पूर्व पहली अच्छी बरसात से लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिली। बच्चों, राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों ने भीगने का लुत्फ उठाया। नालों-नालियों से आनासागर झील में भी पानी पहुंचा। लगातार दो दिन बरसात होने और बादल छाने से तापमान में 2.7 डिग्री सेल्सियस की गिरावट हो गई है।
बचे मानसून के 101 दिन
मानूसन की अवधि 1 जून से 30 सितम्बर यानी 122 दिन तक मानी जाती है। इस लिहाज 21 दिन निकल चुके हैं। अब मानसून के केवल 102 दिन बचे हैं। मालूम हो कि राज्य में मानसून की मुख्य सक्रियता आषाढ़, सावन, भादों और आश्विन माह तक रहती है।
खाली पड़े हैं जलाशय
जिले के अधिकांश जलाशय खाली हैं। इनमें राजियावास, बीर, मूंडोती, पारा प्रथम और द्वितीय, बिसूंदनी, मकरेड़ा, रामसर, अजगरा, ताज सरोवर अरनिया, नारायण सागर खारी, मानसागर जोताया, देह सागर बडली, भीम सागर तिहारी, खानपुरा तालाब शामिल है। इसी तरह चौरसियावास, लाकोलाव टैंक हनौतिया, पुराना तालाब बलाड़, जवाजा तालाब, देलवाड़ा तालाब, छोटा तालाब चाट व अन्य शामिल हैं।