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बालाघाट

28 परिवारों के उजड़े आशियाने, 401 को हुआ आंशिक नुकसान

आंकड़ों में सामने आया तबाही का मंजर-छह लोगों की नदी-नालों में बहने से हुई अकाल मौतभू अभिलेख कार्यालय से जारी किए गए नुकसानी के प्रारंभिक आंकड़ेफसलों के सर्वे को लेकर अब भी फस रहा पेंचपटवारियों की हड़ताल बन रही बाधा

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बालाघाट. जिले में बीते 14-15 सितंबर को हुई अति वर्षा और नदी नालों में बाढ़ से भारी नुकसानी हुई है। भू अभिलेख कार्यालय के प्रथम सर्वे रिपोर्ट में पेश किए गए आंकड़ों में तबाही के आंकड़े सामने आए हैं। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार एक दिन की भारी बारिश से जिले में बाढ़ जैसे हालात निर्मित हुए हैं। 28 परिवारों के आशियानें पूरी तरह से ध्वस्त हो गए। वहीं 401 परिवारों के कच्चे घरों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। इसी तरह करीब छह लोगों की नदी-नालों में बहने से अकाल मौत हो गई हैं। वहीं पशु सहित अन्य नुकसानी होना भी बताया जा रहा है।
इधर फसलों की नुकसानी का सर्वे कार्य शुरू नहीं हो पाने से किसान वर्ग अब भी चिंतित है। किसानों का कहना ैकि बाढ़ से उनकी कई एकड़ की फसलें पूरी तरह से बारिश बह गई है। वहीं पानी अटने के बाद अब फसलों में कीट व्याधी का प्रकोप और माहू रोग लग रहा है। ऐसे में उनकी फसलों का सर्वे कार्य भी शुरू किया जाना चाहिए। लेकिन प्रशासन की अपनी अलग मजबूरी है। बताया गया कि पटवारियों की हड़ताल के कारण फसल नुकसानी के सर्वे कार्य पर ब्रेक लगा हुआ है। वहीं पटवारियों की हड़ताल को समाप्त करवाना शासन स्तर की बात है। इस कारण फसल नुकसानी के सर्वे कार्य का पेंच फसा हुआ है।
सर्वे से असंतुष्ट पीडि़त परिवार
इधर भू अभिलेख कार्यालय की सर्वे रिपोर्ट से पीडि़त परिवार असंतुष्टि जाहिर कर रहे हैं। जिनका कहना है कि सैकड़ों की संख्या में मकान धराशायी हुए। वहीं पशु सहित अन्य नुकसानी भी बाढ़ प्रभावित परिवारों को उठानी पड़ रही है। लेकिन कुछ मात्र का सर्वे ही किया गया है। खासकर चरेगांव, लालबर्रा क्षेत्र के उदासीटोला, जाम, उकवा के ग्रामींण अंचलों के ग्रामीण उनके क्षेत्रों में सर्वे किए जाने की मांग कर रहे हैं।