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सपना अधूरा: बस्सी – जगतपुरा 600 फीट परियोजना अटकी
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सपना अधूरा: बस्सी – जगतपुरा 600 फीट परियोजना अटकी

जयपुर-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग का भार कम करने और जयपुर शहर के चौक-चौराहों की लाल बत्तियों के झंझट से बचाने के लिए पिछली कांग्रेस सरकार ने बस्सी से सीधा जगतपुरा-खातीपुरा व प्रतापनगर इलाके को जोड़ने के लिए 600 फीट चौड़ी सड़क परियोजना को स्वीकृति दी थी।

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बस्सी. जयपुर-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग का भार कम करने और जयपुर शहर के चौक-चौराहों की लाल बत्तियों के झंझट से बचाने के लिए पिछली कांग्रेस सरकार ने बस्सी से सीधा जगतपुरा-खातीपुरा व प्रतापनगर इलाके को जोड़ने के लिए 600 फीट चौड़ी सड़क परियोजना को स्वीकृति दी थी। यह सड़क एनएच-21 स्थित जयपुर-दिल्ली रेलवे ट्रैक से सटी हुई बनाई जानी थी। कांग्रेस शासनकाल में इसका भूमि डिमार्केशन भी हो चुका था और निर्माण के लिए टेंडर जारी करने की तैयारी थी। निर्माण का कार्य जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) को सौंपा गया था। (कासं )

सत्ता परिवर्तन के बाद अटक गया मामला प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के साथ ही भाजपा सरकार आने पर यह परियोजना अटक गई। सड़क जिन गांवों से होकर गुजरनी थी, वहां के अधिकांश ग्रामीण 600 फीट की बजाय 200 फीट चौड़ाई की मांग करने लगे। उनका कहना था कि चौड़ाई कम करने से किसानों की जमीन की बर्बादी कम होगी। लेकिन भाजपा सरकार ने 200 फीट चौड़ी सड़क पर भी कोई पहल नहीं की, जिससे यह योजना अधर में लटक गई। प्रस्तावित मार्ग और लाभ यह सड़क जयपुर के जगतपुरा से खातीपुरा होते हुए रिंग रोड तक पहले ही बन चुकी है। रिंग रोड से आगे प्रस्तावित मार्ग रेलवे लाइन के साथ-साथ हिंगोनिया, रामसिंहपुरा, जीतावाला, रामसर पालावाला, भावसर ईशरवाला, हजारण की ढाणी से होते हुए बस्सी में प्रवेश करता और मोहनपुरा के पास जयपुर-आगरा राजमार्ग से जुड़ता। यदि यह सड़क बन जाती तो बस्सी से जगतपुरा, खातीपुरा, प्रतापनगर आदि क्षेत्रों तक एक घंटे की बजाय 10-15 मिनट में पहुंचा जा सकता था। इससे न केवल समय बल्कि ईंधन की बचत होती और जयपुर-आगरा राजमार्ग पर यातायात का दबाव कम होता। साथ ही शहर की लाल बत्तियों पर लगने वाला समय और दुर्घटनाओं का खतरा भी कम होता। जमीन के भाव में होती कई गुना बढ़ोतरी सड़क परियोजना पूरी होने से बस्सी से जयपुर तक आवासीय और वाणिज्यिक जमीनों के भाव कई गुना बढ़ जाते। इससे आवासीय व वाणिज्यिक निर्माण में तेजी आती और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलते। हजारों सरकारी नौकरीपेशा और दिहाड़ी मजदूर जो रोज जयपुर अपडाउन करते हैं, उन्हें भी बड़ी राहत मिलती। फिलहाल ये लोग या तो जयपुर होकर या छोटी सड़कों से यात्रा करने को मजबूर हैं।

इनका कहना है… – प्रदेश की पिछली गहलोत सरकार की यह योजना शानदार थी। रिंग रोड से बस्सी तक जमीन का डिमार्केशन हो चुका था और जेडीए के पास पूरी तैयारी थी, लेकिन भाजपा सरकार ने इस परियोजना पर पानी फेर दिया। लक्ष्मण मीना, बस्सी विधायक

– योजना अच्छी थी, लेकिन 600 फीट चौड़ाई का प्रस्ताव गलत था, क्योंकि इससे किसानों की जमीन ज्यादा बर्बाद होती। ग्रामीण 200 फीट चौड़ाई की सड़क के लिए तैयार हैं और इसके लिए जमीन भी देने को इच्छुक हैं।

कन्हैया लाल मीना, पूर्व विधायक