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ग्रामीणों को चार साल से ‘पानी’ का इंतजार, अधूरी योजनाओं ने बढ़ाई मुसीबत

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बस्सी

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Vinod Sharma

Apr 07, 2026

pani tanki

कोटपूतली बहरोड़ जिले के पावटा क्षेत्र में बन रही पेयजल टंकियां।

कोटपूतली-बहरोड़ जिले के पावटा क्षेत्र में सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना दम तोड़ती नजर आ रही है। लाखों रुपए खर्च कर बनाई गई पानी की टंकियां अधूरी पड़ी हैं, जबकि पाइपलाइन और पंप हाउस का काम वर्षों से अटका हुआ है। नतीजतन, घर-घर नल कनेक्शन का सपना अधूरा रह गया है और ग्रामीण आज भी पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। जानकारी अनुसार पाइपलाइन और पंप हाउस का निर्माण अधूरा रहने से ग्रामीणों को अब तक योजना का लाभ नहीं मिल पाया है। तीन-चार वर्षों से कार्य ठप होने के कारण पावटा सहित जोधपुरा, पाचूडाला, बड़नगर, खेलना व प्रागपुरा में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। गर्मी की तपती दोपहर में सिर पर मटका रखकर दूर-दूर से पानी लाने को मजबूर महिलाओं की नजरें कस्बे के भोमियाजी मंदिर के पास बनी ऊंची टंकी पर टिक जाती हैं, जो आज तक एक बूंद पानी नहीं दे सकी। ग्रामीणों का कहना है कि उच्च क्षमता की टंकियां बनने के बावजूद न पाइपलाइन बिछी और न ही घरों तक कनेक्शन पहुंचे।

उम्मीदें टूटी, परेशानी बढ़ी
ग्रामीणों ने बताया कि शुरुआत में योजना को लेकर काफी उत्साह था, लेकिन अब हालात पहले जैसे ही हैं। रोज पानी के लिए भटकना पड़ता है और टैंकरों पर निर्भरता बढ़ गई है। तापमान बढ़ने के साथ समस्या और गंभीर हो गई है। कई परिवारों को पीने का पानी भी मुश्किल से मिल रहा है, जिससे महिलाओं और बच्चों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार अधिकारियों को अवगत कराया, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

केस-1: पावटा
कस्बे के भोमिया जी मंदिर के पास जल जीवन मिशन के तहत बनाई गई ऊंची पानी की टंकी पूरी तरह तैयार है, लेकिन अब तक घरों तक नल कनेक्शन नहीं पहुंच पाए हैं। पाइपलाइन कार्य अधूरा होने से टंकी से एक बूंद पानी सप्लाई नहीं हो रही, जिससे ग्रामीणों को राहत नहीं मिल सकी।

केस-2: प्रागपुरा
नगरपालिका क्षेत्र प्रागपुरा में पानी की टंकी का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन कुछ कार्य अब भी बाकी हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि घरों तक नल कनेक्शन नहीं किए गए हैं, जिसके चलते लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद ग्रामीणों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

केस-3: कूनेड
कूनेड क्षेत्र में करीब चार साल पहले पानी की टंकी का निर्माण शुरू हुआ था, लेकिन आज तक केवल ढांचा ही खड़ा है। न तो निर्माण कार्य पूरा हुआ और न ही पाइपलाइन बिछाई गई। इससे गांव के लोग अब भी पुराने जल स्रोतों पर निर्भर रहने को मजबूर हैं।

इनका कहना है…
विराटनगर विधानसभा क्षेत्र के 62 गांवों में कार्य एक कंपनी को आवंटित थे, लेकिन फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र के मामले में 2023 में न्यायालय व विभाग की ओर से कार्यों पर रोक लगा दी गई। अनुमति मिलते ही शेष कार्य पूरे कर दिए जाएंगे।
-दयाराम चौधरी, सहायक अभियंता, जलदाय विभाग

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