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Jaipur News : खरीद अवधि घटी, 14 दिन में कैसे बिकेगा हजारों किसानों का गेहूं? समर्थन मूल्य केन्द्रों पर बढ़ी चिंता

MSP Purchase Deadline : रबी सीजन में इस बार किसानों को राहत देने के बजाय सरकारी खरीद व्यवस्था ही चिंता का कारण बन गई है। सरकार ने पहले गेहूं, चना और सरसों की समर्थन मूल्य पर खरीद की अंतिम तिथि 30 जून तय की थी, लेकिन बाद में इसे घटाकर 31 मई कर दिया गया।

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msp wheat purchase

बस्सी समर्थन मूल्य केन्द्र पर गेहूं की जिंस बेचने आए किसान। फोटो पत्रिका

MSP Purchase Deadline : बस्सी (जयपुर)। रबी सीजन में इस बार किसानों को राहत देने के बजाय सरकारी खरीद व्यवस्था ही चिंता का कारण बन गई है। सरकार ने पहले गेहूं, चना और सरसों की समर्थन मूल्य पर खरीद की अंतिम तिथि 30 जून तय की थी, लेकिन बाद में इसे घटाकर 31 मई कर दिया गया। अब किसानों के पास अपनी उपज बेचने के लिए महज 14 दिन का समय बचा है। ऐसे में खरीद केन्द्रों पर भारी दबाव बन गया है। समर्थन मूल्य पर गेहूं के दाम बाजार से बेहतर होने के कारण किसान खुले बाजार की बजाय सरकारी खरीद केन्द्रों का रुख कर रहे हैं। बस्सी क्षेत्र में गेहूं बेचने के लिए किसानों में होड़ मची हुई है, लेकिन व्यवस्थाएं इस दबाव को संभालती नजर नहीं आ रहीं।

1450 किसानों ने कराया पंजीकरण

अब तक बस्सी क्षेत्र में 1450 किसानों ने समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। इनमें से केवल 500 किसानों के गेहूं की ही तुलाई हो सकी है। करीब 800 किसानों को टोकन जारी किए गए, लेकिन उनमें से भी लगभग 500 किसानों की उपज ही खरीदी जा सकी। वहीं करीब 650 किसान ऐसे हैं, जिन्हें अभी तक टोकन तक जारी नहीं हुए हैं। स्थिति यह है कि किसान रोजाना खरीद केन्द्रों के चक्कर काट रहे हैं। कई किसान अपनी उपज ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर इंतजार कर रहे हैं, लेकिन उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिल पा रहा।

टोकन मिलने के बाद भी इंतजार

खरीद केन्द्रों पर टोकन प्रणाली लागू होने के बावजूद व्यवस्थाएं सुचारू नहीं हैं। किसानों का कहना है कि टोकन मिलने के बाद भी कई दिनों तक तुलाई का इंतजार करना पड़ रहा है। जिन किसानों को टोकन नहीं मिले हैं, उनकी परेशानी और अधिक बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि जब खरीद अवधि कम की गई थी, तब तुलाई और खरीद प्रक्रिया की गति बढ़ाई जानी चाहिए थी। लेकिन वर्तमान हालात में ऐसा होता नहीं दिख रहा, जिससे किसानों में रोष बढ़ता जा रहा है।

सरसों केन्द्रों पर सन्नाटा

सरकार ने गेहूं के साथ चना और सरसों की खरीद का भी प्रावधान किया है, लेकिन बाजार की स्थिति अलग तस्वीर दिखा रही है। सरसों के बाजार भाव समर्थन मूल्य से अधिक होने के कारण किसान खुले बाजार में ही फसल बेच रहे हैं। यही वजह है कि समर्थन मूल्य केन्द्रों पर सरसों की आवक लगभग शून्य बनी हुई है। वहीं चने की आवक भी सीमित है। कुछ किसान चना लेकर पहुंचे जरूर हैं, लेकिन सबसे अधिक दबाव गेहूं खरीद पर ही बना हुआ है।

समय कम, किसानों की बढ़ी चिंता

26 मई तक रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया जारी रहेगी, जबकि खरीद 31 मई तक ही होगी। ऐसे में किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वे समय रहते अपनी उपज बेच पाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खरीद अवधि नहीं बढ़ाई गई तो बड़ी संख्या में किसान समर्थन मूल्य के लाभ से वंचित रह सकते हैं और उन्हें मजबूरी में खुले बाजार में कम दाम पर गेहूं बेचना पड़ेगा।

किसानों ने रखी यह मांग

किसानों ने प्रशासन से खरीद की अंतिम तिथि बढ़ाने और तुलाई प्रक्रिया तेज करने की मांग की है। उनका कहना है कि जब पंजीकरण बड़ी संख्या में हुए हैं तो उसी हिसाब से व्यवस्थाएं भी मजबूत होनी चाहिए थीं।

इनका कहना है

अब तक 19 हजार क्विंटल गेहूं की तुलाई हो चुकी है। करीब 500 किसानों के गेहूं की खरीद हुई है। 26 मई तक रजिस्ट्रेशन होंगे, जबकि 31 मई तक ही समर्थन मूल्य पर खरीद की जाएगी।
रविन्द्र मीना, किश्म निरीक्षक, एफसीआइ बस्सी