अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लगातार टैरिफ धमकियों के चलते कई देश उनसे खफा हो चुके हैं, ऐसे में इस बार ब्राज़ील के राष्ट्रपति लूइस इनासियो लूला दा सिल्वा ने उन्हें खरी-खरी सुना दी। उन्होंने कहा कि वो राष्ट्रपति ट्रंप से किसी तरह की बातचीत करने के लिए कॉल नहीं करेंगे। क्योंकि ट्रंप बातचीत में दिलचस्पी नहीं रखते। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ब्राज़ील और अमरीका के बीच व्यापार को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है। ट्रंप ने ब्राज़ील से आने वाले सामानों पर 50% टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी है। साथ ही ट्रंप ने कुछ खास तांबे की चीज़ों पर भी 50% टैरिफ लगाया है इसके अलावा उन सभी देशों के लिए टैक्स छूट को खत्म कर दिया है जो अमरीका में सस्ते पार्सल बिना शुल्क के भेज रहे थे।
ट्रंप के इस फैसले कि सिर्फ आर्थिक वजह नहीं है बल्कि, इसके पीछे कई राजनीतिक कारण भी नजर आ रहे हैं। दरअसल, ट्रंप ने जुलाई में एक चिट्ठी लिखकर ब्राज़ील को चेतावनी दी थी कि अगर वहां पूर्व राष्ट्रपति ज़ाएर बोलसोनारो के खिलाफ चल रहे मुकदमे को बंद नहीं किया गया, तो अमरीका भारी टैरिफ लगाएगा। ट्रंप ने ब्राज़ील की सरकार पर “मानवाधिकार हनन” और “कानून के राज को कमजोर करने” का आरोप भी लगाया था।
बता दें कि ज़ाएर बोलसोनारो खुद को ट्रंप का करीबी मानते हैं और दोनों की राजनीति भी मिलती-जुलती रही है। बोलसोनारो इस समय एक केस का सामना कर रहे हैं, जिसमें उन पर लूला सरकार के खिलाफ तख्तापलट की साजिश रचने का आरोप है। ट्रंप ने इस मुकदमे को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है। ट्रंप के आदेश में साफ तौर पर लिखा गया है कि ब्राज़ील की सरकार बोलसोनारो और उनके हजारों समर्थकों को परेशान कर रही है, जो कि एक गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन है।
हालांकि, राष्ट्रपति लूला ने यह भी कहा कि वे ट्रंप को जलवायु परिवर्तन पर होने वाले बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन COP में आमंत्रित जरूर करेंगे। इसके अलावा, उन्होंने यह भी बताया कि वे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी बुलाएंगे। सिर्फ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को नहीं बुलाया जाएगा, क्योंकि पुतिन फिलहाल यात्रा नहीं कर सकते। इन सभी घटनाओं से साफ है कि ब्राज़ील और अमेरिका के रिश्तों में कड़वाहट आ गई है और अब यह सिर्फ व्यापार का मामला नहीं रहा, बल्कि दोनों देशों के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक तनाव भी गहरा गया है।