संयुक्त राष्ट्र की एक स्वतंत्र जांच आयोग ने अपनी नई रिपोर्ट में कहा है कि गाज़ा में इज़राइल द्वारा नरसंहार किया जा रहा है। यह रिपोर्ट सीधे तौर पर इज़राइली नेतृत्व, जिनमें प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी शामिल हैं, को ज़िम्मेदार ठहराती है। इस आयोग की प्रमुख, नवी पिलै, जो पहले अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय की जज रह चुकी हैं, ने कहा है कि —
“गाज़ा में नरसंहार हो रहा है। और इसकी ज़िम्मेदारी इज़राइली सरकार के उच्चतम स्तर पर मौजूद अधिकारियों की है, जिन्होंने लगभग दो साल से एक ऐसा अभियान चलाया है, जिसका मक़सद गाज़ा में फिलिस्तीनी समुदाय को खत्म करना है।”
साथ ही उन्होंने कहा है कि “हमारी रिपोर्ट केवल शब्द नहीं है, यह एक चेतावनी है। उम्मीद है कि अब देशों की सोच भी बदलेगी।”
इस रिपोर्ट में इजरायल पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं — जिसमें
बड़े पैमाने पर हत्याएं
मानवीय सहायता पहुंचाने में बाधाएं
ज़बरदस्ती विस्थापन
और यहां तक कि एक प्रजनन क्लिनिक को भी तबाह करना शामिल है।
यह सारे तथ्य मिलकर इस नतीजे की तरफ इशारा करते हैं कि यह केवल युद्ध नहीं, बल्कि संभवतः एक योजनाबद्ध नरसंहार है।
इस आयोग की रिपोर्ट 72 पन्नों की कानूनी समीक्षा पर आधारित है जिसे अब तक का सबसे सख्त बयान माना जा रहा है। ये पहली बार है जब किसी U.N.-के साथ जुड़े निकाय ने इज़राइल के खिलाफ इतना बड़ा बयान दिया है। हालांकि यह आयोग संयुक्त राष्ट्र से स्वतंत्र है, लेकिन इसका प्रभाव अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर पड़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इज़राइल ने 1948 की U.N. Genocide Convention के तहत परिभाषित चार में से चार बड़े अपराध किए हैं।
वहीं इज़राइल ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज करते हुए आयोग पर राजनीतिक एजेंडा चलाने का आरोप लगाया है। इज़राइल का कहना है कि वह केवल आत्मरक्षा कर रहा है। इज़राइली आंकड़ों के मुताबिक 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमास के हमले के बाद 1,200 लोग मारे गए और 251 को बंधक बना लिया गया। लेकिन इसके बाद जो युद्ध चला, उसमें गाज़ा स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक 64,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, और कई इलाकों में भुखमरी जैसी स्थिति बन गई है। दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ICJ में इज़राइल के खिलाफ नरसंहार का मुकदमा चल रहा है। इस मामले में अभी अंतिम फैसला नहीं आया है, लेकिन कोर्ट ने अंतरिम आदेशों में गाज़ा में तत्काल मानवीय राहत देने के निर्देश जरूर दिए हैं।
बता देंयह रिपोर्ट उस ऐतिहासिक 1948 नरसंहार संधि की याद दिलाती है, जो नाज़ी जर्मनी द्वारा यहूदियों के जनसंहार के बाद बनाई गई थी। अब उसी भाषा का इस्तेमाल गाज़ा की वर्तमान स्थिति को सुलझाने में किया जा रहा है।