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Monsoon Session 2025 : विपक्षी सांसदों पर सख्त एक्शन.?, नाराज बिरला ने दिए बड़े संकेत
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Monsoon Session 2025 : विपक्षी सांसदों पर सख्त एक्शन.?, नाराज बिरला ने दिए बड़े संकेत

संसद का मानसून सत्र अब तक जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका है। ऑपरेशन सिन्दूर पर चर्चा को छोड़ दें तो संसद में जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा और बहस नहीं हो पाई। ऐसे में सवाल ये है कि लोकतंत्र का मंदिर क्या राजनीति चमकाने के लिए है..? क्या तीन हफ़्तों का वक़्त बर्बाद होना जनता के टैक्स के पैसों की बर्बादी नहीं है..?
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भारत

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Darsh Sharma

Aug 18, 2025

संसद के मानसून सत्र को एक महीना होने वाला है.. मगर, ये सत्र जनता के कामकाज की बजाय राजनीति का अखाड़ा बन गया है। लगातार तीन हफ्तों तक हंगामे के बाद चौथे हफ्ते की शुरुआत भी हंगामे से हुई। लोकसभा और राज्यसभा में सवेरे 11 बजे जैसे ही प्रश्नकाल शुरू हुआ तो एसआईआर के मुद्दे पर विपक्ष के सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी। लोकसभा में विपक्ष के नेता वेल तक पहुंच गए और सरकार को घेरने की कोशिश करने लगे। लेकिन जब हंगामा थमा नहीं… तो नाराज़ स्पीकर ओम बिरला ने कार्रवाई के संकेत दे दिए।

आपको बता दें, संसद का मानसून सत्र अब तक जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका है। ऑपरेशन सिन्दूर पर चर्चा को छोड़ दें तो संसद में जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा और बहस नहीं हो पाई। ऐसे में सवाल ये है कि लोकतंत्र का मंदिर क्या राजनीति चमकाने के लिए है..? क्या तीन हफ़्तों का वक़्त बर्बाद होना जनता के टैक्स के पैसों की बर्बादी नहीं है..? संसद में गतिरोध के लिए क्या सरकार भी जिम्मेदार है.. और अगर नहीं तो फिर क्यों वो समाधान नहीं निकाल पा रही है..? क्या विपक्ष का विरोध लोकतांत्रिक दायरे में है या मर्यादा से बाहर जा चुका है.? जनता उम्मीद करती है कि संसद में उसकी समस्याओं पर चर्चा हो… लेकिन लगातार हंगामे ने उस उम्मीद को तोड़ा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मानसून सत्र का शेष समय भी सिर्फ़ हंगामे की भेंट चढ़ जाएगा, या फिर देश के असली मुद्दों पर चर्चा होगी?”