भिवाड़ी. धारूहेड़ा तिराहे पर जलभराव की समस्या को लेकर खैरथल तिजारा और रेवाड़ी के अधिकारियों की मंगलवार को बैठक हुई। बैठक में कलक्टर डॉ. अर्तिका शुक्ला ने भिवाड़ी की ओर से जलभराव को दूर करने किए गए प्रयास एवं योजनाओं के बारे में बताया। इसके साथ ही हरियाणा की तरफ से भिवाड़ी में आने वाले छह एमएलडी गंदे पानी की समस्या से भी अवगत कराया।
कलक्टर ने बताया कि हरियाणा के साथ हमारी जो पिछली बैठक हुई थी। उस बैठक में जिन प्रोजेक्ट पर चर्चा हुई, उन पर अभी तक हुई प्रगति के बारे में दोनों तरफ के अधिकारियों ने अवगत कराया। कलक्टर ने बताया कि गत दो-तीन वर्ष में हमने जो भी प्रोजेक्ट हरियाणा को बताए, उन पर हमारी प्रगति चल रही है। हरियाणा सरकार से हमारे तीन बड़े वादे थे। इसमें पहला उद्योगों के पानी को शोधित करने के लिए सीईटीपी। सीईटीपी एक फरवरी से आरओ के साथ चलने लगा है। शोधित पानी उपयोग के लिए फैक्ट्रियों में जा रहा है। दूसरा बिंदु भिवाड़ी में 50 फीसदी सीवरेज लाइन है उसे बढ़ाना, इसमें अमृत द्वितीय चरण की डीपीआर को जिला स्तर पर स्वीकृति देकर मुख्यालय भेज दिया गया है, इसमें शत प्रतिशत घरों को सीवरेज से जोड़ा जाएगा। मिलकपुर और नंगलिया में काम भी शुरू हो गया है। तीसरा बिंदु था कि पूरे क्षेत्र की ड्रेनेज योजना तैयार करना। इसके लिए बीडा के मास्टर प्लान में तैयारी की जा रही है। इन तीनों मुद्दों पर पिछले डेढ़ साल में जो काम हुआ है वह बैठक में हरियाणा के अधिकारियों को बताया है। बैठक में रेवाड़ी डीसी राहुल हुड्डा, एसडीएम विकास यादव, आरओ प्रदूषण हरीश कुमार, बीडा सीईओ सलोनी खेमका, एडीएम अश्विनी के पंवार, रीको यूनिट हेड जीके शर्मा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
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रैंप का मुद्दा उठाया
बैठक में भिवाड़ी के अधिकारियों ने एनएच पर अवैध रूप से बनाए गए रैंप का मुद्दा भी उठाया। बताया कि इससे प्राकृतिक बहाव को रोका गया है। उन्हें पानी के सैंपल रिपोर्ट के आधार पर बताया कि गुणवत्ता में सुधार हुआ है। इसके साथ ही हरियाणा के आधा दर्जन से अधिक गांव और दर्जनों मजदूर कॉलोनियों का छह एमएलडी पानी भिवाड़ी में आता है, उसका क्या निवारण हरियाणा ने सोचा है। इस पर हरियाणा अधिकारियों ने अपने प्रोजेक्ट के बारे में बताया।
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बावल की समस्या भी बताई
भिवाड़ी के अधिकारियों ने बैठक में हरियाणा को बावल औद्योगिक क्षेत्र से साबी नदी में छोड़े जाने वाले दूषित पानी की समस्या से भी अवगत कराया। इतने बड़े मामले को लेकर हरियाणा के अधिकारी अंजान दिखे। उनका कहना था कि बावल में सीईटीपी है, वहां पानी को शोधित होना चाहिए।
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जलभराव रोकन रैंप हटाएं
बैठक में रैंप को मानसून से पहले हटाने के लिए विशेष रूप से मांग रखी गई। क्योंकि बारिश का पानी प्राकृतिक बहाव से ही आगे जाएगा। अगर उसे भी रोका जाएगा तो जलभराव की समस्या बढ़ेगी। क्योंकि बारिश के पानी को नहीं रोका जा सकता। इसके साथ ही जलभराव समस्या के निस्तारण के लिए साझे प्रोजेक्ट लगाने संबंधी मुद्दे पर भी बातचीत हुई। सभी मुद्दों पर हरियाणा के अधिकारियों ने उच्चाधिकारियों से बात कर समाधान खोजने का समय मांगा है।