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फौजी मेले का समापन, 5 दिवसीय फौजी मेले में 2 लाख से अधिक लोगों ने किया विजिट

भोपाल. रविवार का दिन और तेज धूप के बावजूद भी एमवीएम कॉलेज के ग्राउंड में लगी लोगों की भीड़ इशारा कर रही थी कि लोगों का तीनों सेनाओं के उपकरणों के प्रति कितना लगाव है। वे अवकाश के दिन न सिर्फ घर से बाहर निकले बल्कि तेज धूप में फौजी मेले में घूम-घूम कर उपकरणों के बारे में जानकारी ली। तो कुछ लोग उपकरणों के साथ फोटो खिंचवाते भी नजर आए मौका था एमवीएम कॉलेज के ग्राउंड में लगे 5 दिवसीय फौजी मेले का समापन का। जिसमें आखिरी दिन लगभग 70 से 90 हजार लोगों ने शिरकत की।      

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भोपाल

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Anjali Tomar

Apr 02, 2023

पूर्णतय स्वदेशी है सारंग तोप सतीश कुमार ने बताया कि ओएफसी ने कैरिज गन को उन्नत बनाकर 155 मिमी कैलिबर सारंग में तब्दील किया। सारंग तोप अपग्रेड करने में 155 एमएम बैरल और अन्य हिस्से बनाए हैं। तोप इजरायल की सोल्टम आर्टिलरी गन का अपग्रेड वर्जन है। मेक इन इंडिया के तहत देश में बनी पूर्णत: स्वदेशी तोप है। सारंग तोप की मारक क्षमता 34 किमी है। तोप लगातार दो घंटे तक गोले दागकर निर्धारित लक्ष्य ध्वस्त करती है। तोप को 70 डिग्री तक घुमाकर गोले दागे जा सकते हैं।

3डी टैक्टीकल कंट्रोल रडार

कंट्रोल रडार 200 किमी की रेंज में आने वाली किसी भी चीज को डिटेक्ट करता है। जिसकी जानकारी लेकर मॉनीटर सिस्टम में डिजिटली एड होती है। उसी की मदद से सैनिक ऑब्जेक्ट के पास पहुंचते हैं। मॉनीटर के जरिए जिसे भी फायरिंग के आदेश दिए जाते हैं वे उसे अंजाम देते हैं।

पैववे गाइडेंस बॉम्ब 4 किमी में मचाता है तबाहीपैववे बॉम्ब लेजर गाइडेंस पर काम करता है। पहले ये टारगेट सेट करता है। कि कहां ब्लास्ट करना है। इसका वजन 650 किलो होता है। जब इससे ब्लास्ट किया जाता है तो साढ़े तीन से चार किमी रेंज में तबाही मच जाती है। इसे इंडिया और इजराइल द्वारा तैयार किया गया है। लॉंच होने के 3 से 4 सेकेंड बाद ब्लास्ट करता है।

रिकोन्नैस्संस व्हीकल

इसे रिक्की वीकल नाम से जाना जाता है। इस व्हीकल से दुश्मनों के 5 किमी तक नजदीक जाकर उनकी गतिविधि पर नजर रख सकते हैं। इसकी खासियत यह है कि इससे हम रात में भी दिन की तरह साफ देख सकते हैं। सन 1971 में इस व्हीकल से लड़ाई लड़ी गई थी। बॉर्डर फिल्म में अक्षय खन्ना जिस गाड़ी को लेकर दुश्मनों के पास घूमते हैं। यह उसका मॉडिफाइड वर्जन है।

3डी टैक्टीकल कंट्रोल रडार

कंट्रोल रडार 200 किमी की रेंज में आने वाली किसी भी चीज को डिटेक्ट करता है। जिसकी जानकारी लेकर मॉनीटर सिस्टम में डिजिटली एड होती है। उसी की मदद से सैनिक ऑब्जेक्ट के पास पहुंचते हैं। मॉनीटर के जरिए जिसे भी फायरिंग के आदेश दिए जाते हैं वे उसे अंजाम देते हैं।

पैववे गाइडेंस बॉम्ब 4 किमी में मचाता है तबाहीपैववे बॉम्ब लेजर गाइडेंस पर काम करता है। पहले ये टारगेट सेट करता है। कि कहां ब्लास्ट करना है। इसका वजन 650 किलो होता है। जब इससे ब्लास्ट किया जाता है तो साढ़े तीन से चार किमी रेंज में तबाही मच जाती है। इसे इंडिया और इजराइल द्वारा तैयार किया गया है। लॉंच होने के 3 से 4 सेकेंड बाद ब्लास्ट करता है।

रिकोन्नैस्संस व्हीकल

इसे रिक्की वीकल नाम से जाना जाता है। इस व्हीकल से दुश्मनों के 5 किमी तक नजदीक जाकर उनकी गतिविधि पर नजर रख सकते हैं। इसकी खासियत यह है कि इससे हम रात में भी दिन की तरह साफ देख सकते हैं। सन 1971 में इस व्हीकल से लड़ाई लड़ी गई थी। बॉर्डर फिल्म में अक्षय खन्ना जिस गाड़ी को लेकर दुश्मनों के पास घूमते हैं। यह उसका मॉडिफाइड वर्जन है।