बीकानेर . ‘महिला सशक्तीकरण : चुनौतियां एवं संभावनाएं’ विषय पर शनिवार को एसकेआरयू के स्नातकोत्तर अध्ययन विभाग की ओर से राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजित की गई। इसमें देश की पहली महिला बीएसएफ *****िस्टेंट कमांडेंट तनुश्री पारीक, आईएएस आरती डोगरा, भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान शिमला की अध्यक्ष प्रो. चन्द्रकला पडिया ने विचार रखे।
संगोष्ठी के उद्घाटन समारोह में संसदीय सचिव डॉ. विश्वनाथ मेघवाल ने कहा कि बालिकाओं को उच्च शिक्षित किया जाए। उन्होंने महिलाओं को हर क्षेत्र में समानता का अधिकार दिए जाने और ***** अनुपात में *****मानता दूर करने की आवश्यकता जताई। प्रो. चन्द्रकला पडिया ने कहा कि नारी सशक्तीकरण के क्षेत्र में अभी लंबा मार्ग तय करना है। महिलाएं अपनी शक्ति पहचानें। विश्व में महिलाओं की स्वास्थ्य, साक्षरता आदि क्षेत्रों में स्थिति संतोषजनक नहीं है। जोधपुर *****ॉम एमडी आरती डोगरा ने कहा कि महिलाएं सशक्त हो रही हैं।
महिलाओं में हो आत्मविश्वास
तनुश्री पारीक ने कहा कि महिलाएं आत्मविश्वास रखें, तभी वे सभी बाधाओं को पार कर सकती हैं। उन्होंने कैमल एक्सपीडिशन के अनुभव बताते हुए कहा कि इसके माध्यम से दूर-दराज के गांवों में भी ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओÓ का संदेश दिया जा रहा है। भारत स्काउट गाइड की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. विमला डुकवाल, डॉ. चन्द्रशेखर श्रीमाली, अंजु रामपुरिया, डॉ. ज्योति जोशी ने भी विचार रखे। कार्यक्रम में यूआईटी अध्यक्ष महावीर रांका, डॉ. बेला भनोत, डॉ. उमाकान्त गुप्त, डॉ. नरेश गोयल, रोचक गुप्ता, कन्हैयालाल बोथरा, मोनिका गौड़ आदि शामिल हुए।
सशक्त बनें महिलाएं
दूसरे व तीसरे सत्र में साहित्य, शिक्षा, सामाजिक कार्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली और मीडिया जगह से जुड़ी महिलाओं ने अनुभव साझा किए। इनमें शिल्पी शाह, विरजा जावा,संगीता गौड़, कवयित्री सरिता राठौड़, भारती सिंह चौहान, कमला भदोनिए, डॉ अनुकृति शर्मा आदि ने महिला को आगे बढऩे की प्रेरणा दी। समापन सत्र में श्रीगंगानगर विधायक कामिनी जिंदल, बीकानेर एसपी सवाई सिंह गोदारा, राजस्थान मदरसा बोर्ड की अध्यक्ष मेहरुन्निसा टाक, सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग जयपुर की निदेशक अनुप्रेरणा सिंह कुंदल और यूथ पार्लियामेंट की चेयरपर्सन पार्वती जांगिड़ ने विचार रखे। डॉ. विमला मेघवाल ने आभार जताया।