स्थानकवासी समाज का श्रीवर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ
हुब्बल्ली स्थानकवासी के एक ही परिवार के पांच जनों ने ली दीक्षा
हुब्बल्ली. शहर में पहले जैन समाज की संख्या बहुत कम थी और केवल श्री मरुधर जैन संघ ही था। बाद में समाज की संख्या बढऩे के साथ ही स्थानकों, संघों, धर्म स्थलों में भी वृद्धि हुई। शहर के कंचगार गली िस्थत श्रीवर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के पूर्व अध्यक्ष महेंद्र सिंघी एवं वर्तमान अध्यक्ष उकचंद बाफना ने पत्रिका से बातचीत में बताया कि हुब्बल्ली में 1963 में स्थानक वासियों के केवल तीन परिवार हीराचंद वनेचंद, खीमराज हेमराज और पारसमल हस्तीमल सिंघी परिवार ही थे। आज 300 परिवार हैं। इस दौरान हीराचंद वनेचंद की दुकान में प्रतिखमन हुआ करते थे और संपतलाल कटारिया प्रतिखमन कराते थे।
इसके बाद पी चंदनमल, लहरचंद कोठारी, भूरट परिवार और सुराणा परिवार आया। 1967 में इलकल में प्यारचंद मुनि की निश्रा में इलकल स्थानक का उद्घाटन हुआ। उस दौरान प्यारचंद मुनि की प्रेरणा से प्रथम अध्यक्ष हीराचंद कटारिया के नेतृत्व में हुब्बल्ली में 1967 में एक भवन लिया गया और उसे स्थानक बनाया गया। इसके बाद हुब्बल्ली में 1973 में विमल मुनि, वीरेंद्र मुनि का पहला चातुर्मास हुआ। 1983 में तत्कालीन अध्यक्ष जीवराज कटारिया के नेतृत्व में स्थानक का भूमिपूजन हुआ, जिसका लाभार्थी सोनीबानी हस्तिमल सिंघी परिवार बना । 1987-88 में इसका उद्घाटन हुआ और लाभार्थी परिवार जेठमल केसरीमल भंडारी का था।
अब तक 13 अध्यक्ष बने
अब तक कुल 13 अध्यक्ष बने हैं। पूर्व में हीराचंद कटारिया, अमरचंद कटारिया, जीवराज कटारिया, हीराचंद तातेड, चंदनमल कटारिया, महेंद्र सिंघी, केवलचंद चौरडिया, घीसूलाल कटारिया, बालचंद भंडारी, संपतराज कटारिया, छगनलाल भूरट, पारसमल पटवा अध्यक्ष रहे हैं। वर्तमान में उकचंद बाफना अध्यक्ष हैं। स्थानक की एक परम्परा रही है कि सभी अध्यक्ष निर्विरोध निर्वाचित होते रहे हैं। 21 लोगों की कार्यकारिणी है। केश्वापुर में नया स्थानक बनाने पर चिंतन किया जा रहा है। कुंदनमल साकरिया परिवार की ओर से केश्वापुर में गुरु भगवंतों की सेवा व उपयोग के लिए अंबिका साकरिया भवन बनाया गया है।
चातुुर्मास और दीक्षाएं
स्थानक में अब तक 26 चातुर्मास हुए हैं। वर्तमान में स्वातिश्री, प्रज्ञाश्री, प्रज्ञप्तिश्री, जयतीश्री, प्रवज्याश्री आदि ठाणा का चातुमार्स चल रहा है। आचार्य भावचंद्र, आचार्य विजयराज, उपप्रवर्तक नरेश मुनि, शालिभद्र मुनि का चातुर्मास और आचार्य राममुनि का होली चातुर्मास हुआ है। स्थानक में आचार्य हीराचंद, आचार्य शिवमुनि, युवाचार्य महेंद्रऋषि, आचार्य उत्तममुनि, आचार्य रूपमुनि, उपाध्याय पुष्करमुनि आदि बड़े संतों का आगमन हुआ है। यहां सात दीक्षाएं हुई हैं। हेमा पारसमल भंडारी, प्रिति अशोक कानूंगा, अविनाश उत्सव सालेचा, डिंपल उत्सव सालेचा, खुशबू दलिचंद बागरेचा, शिल्पा अमृतलाल सुराणा, अंजु मोहनलाल कांकरिया, गौतमचंद पुखराज बागमार की दीक्षा हुई है।
एक परिवार के पांच जनों ने ली दीक्षा
गौतम बागमार के परिवार से उनकी दो बेटियों-प्रियदर्शिनी गौतम बागमार, गुणवंती गौतम बागमार, बेटा संदेश गौतम बागमार, पोता समर्थ ब्रिजेश बागमार, पोती सन्मती ब्रिजेश बागमार ने संयम पथ अंगीकार किया है, जो हुब्बल्ली स्थानकवासी समाज के लिए गौरव की बात है। स्थानक में हर साल चातुर्मास होता है। हर रविवार को पारिवारिक सामयिक होता है। सम्यक जैन पाठशाला में बच्चों को भारतीयता, भारतीय संस्कृति, संस्कार, जैन दर्शन खिाया जाता है, जिसमें 80 बच्चे हैं। चंद्रकुमार कांकरिया पिछले चार साल से नियमित रूप से बाहर गांव से आने वालों के लिए आवास निवास की सेवा दे रहे हैं। सुरेश सालेच, संतोष भलगट गोचरी सेवा दे रहे हैं।
वर्तमान कार्यकारिणी
वर्तमान में स्थानकवासी संघ के अध्यक्ष उकचंद बाफना, मानद अध्यक्ष बाबूलाल पारेख, कार्याध्यक्ष गौतम भूरट, मानद सचिव प्रकाश कटारिया, सह सचिव महेंद्र विनायकिया, उपाध्यक्ष शांतिलाल खिवेसरा, दलिचंद बागरेचा, कोषाध्यक्ष कांतिलाल बोहरा, सह कोषाध्यक्ष विनोद चोपड़ा, चातुर्मास संयोजक मुकेश भंडारी, सह संयोजक अजय जैन, भोजन समिति के चेयरमैन गणपत कोठारी, सह चेयरमैन शामितलाल बोहरा, धार्मिक समिति के सुरेश बोहरा, प्रचार प्रसाल समिति के सुभाष चंद्र डंक आदि सेवा दे रहे हैं।