
ग्वालियर. देश के नवनिर्माण और विकास में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। युवा देश की सबसे बड़ी शक्ति हैं और उनके विचार ही भविष्य की दिशा तय करते हैं। यह बात प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने “युवा संसद-1.0” के शुभारंभ अवसर पर कही। युवा संसद में छात्रों ने यूजीसी मुद्दे पर जमकर बहस की।
कार्यक्रम का आयोजन प्रेस्टीज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च एवं हाकिम सिंह देवेंद्र सिंह तोमर स्मृति न्यास के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इस दो दिवसीय आयोजन का उद्देश्य युवाओं को भारतीय लोकतांत्रिक प्रणाली, विधायी प्रक्रियाओं और संसदीय शिष्टाचार के प्रति जागरूक करना है।
मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए ऊर्जा मंत्री तोमर ने कहा, युवा संसद जैसे मंच विद्यार्थियों को कानून निर्माण की प्रक्रिया समझने और समसामयिक मुद्दों पर तार्किक विचार रखने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर बल देते हुए सतत विकास में युवाओं की भागीदारी को आवश्यक बताया।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि रिपुदमन सिंह तोमर ने लोकतंत्र में संवाद और विचार-विमर्श की संस्कृति को जरूरी बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों की बेहतर समझ देते हैं। वहीं, सुधा तोमर ने शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी के महत्व पर प्रकाश डाला तथा महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
संस्थान के निदेशक डॉ. निर्मल्या बंद्योपाध्याय ने कहा, इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों के समग्र विकास में सहायक होते हैं। विधि विभागाध्यक्ष डॉ. राखी सिंह चौहान ने बताया कि युवा संसद जैसे मंच से छात्रों में ड्राफ्टिंग स्किल्स, विश्लेषणात्मक सोच और पेशेवर नैतिकता का विकास होता है। इस कार्यक्रम में दिल्ली, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से 300 से अधिक प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों के लिए नकद पुरस्कारों की घोषणा भी की गई है। कार्यक्रम का समन्वय राहुल श्रीवास्तव एवं सह-समन्वयक डॉ. दीक्षा भदौरिया द्वारा किया जा रहा है। आयोजन के पहले दिन सामाजिक संध्या का भी आयोजन किया गया।