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अजाक विभाग में डीएमएफ की राशि तो वसूले लेकिन शासन को जमा नहीं हुआ

निर्देश को अनदेखा कर किया गया कार्यशासन ने २०१६ से जारी किया है निर्देश

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रायगढ़। आदिवासी विकास विभाग में पिछले कुछ वर्षो में एक से बढक़र एक खेल खेला गया है। एक नया मामला सामने आया है जिसमें वर्ष २०२०-२१ और २०२१-२२ में रॉयल्टी राशि की ३० प्रतिशत खनिज न्यास मद के नाम पर ठेकेदारों से वसूल तो किया गया, लेकिन इसे शासन के खाते में जमा नहीं हुआ।
शासन ने ३ जून २०१६ को पत्र क्रमांक २८४४-७०/खनि.४/पीडब्लयूडी,/एडीबी/ शासकीय के माध्यम से सभी विभाग को एक निर्देश जारी किया है जिसमें बताया गया है कि शासकीय निर्माण कार्य में उपयोगित खनिज का मूल्य एवं रॉयल्टी राशि का ३० प्रतिशत राशि डीएमएफ(खनिज न्यास मद) राशि बिल से काटकर रखा जाए । कार्य समाप्त होने पर ठेकेदार द्वारा रॉयल्टी क्लीयरेंस प्रमाण पत्र जमा करने पर ही अंतिम भुगतान किया जाए। २०२०-२१ और २०२१-२२ में अजाक विभाग में हुए सरकारी निर्माण कार्यो को लेकर ठेकेदारों को किए गए भुगतान के पूर्व डीएमएफ की उक्त राशि ३० प्रतिशत काटा जाना पाया गया, लेकिन उक्त राशि शासन के खाते में जमा नहीं किया गया। जांच में मिले उक्त तथ्य सामने आने के बाद तत्कालीन अधिकारी ने जवाब दिया है कि जिन ठेकेदारों का भुगतान शेष है उनके बिल से उक्त राशि काट ली जाएगी और जिन ठेकेदारों का भुगतान हो गया है उनके आगामी कार्यो के बिल में उक्त राशि को काटकर समायोजन किया जाएगा।
अब तक नहीं हुआ है रिकवरी
खनिज न्यास मद की उक्त राशि को संबंधित ठेकेदारों से रिकवरी करने के लिए जांच दल ने आदेश किया था, लेकिन अब तक उक्त राशि का रिकवरी ठेकेदारों से नहीं किया गया है। जिसके कारण शासन को डीएमएफ मद में मिलने वाली उक्त राशि का नुकसान हुआ है।
अन्य विभागों में हुआ है खेल
विदित हो कि इसके पूर्व नगर निगम और सेतू निर्माण विभाग में भी सूचना के अधिकार के तहत मिले जानकारी से खुलासा हुआ था जिसमें बिना रॉयल्टी क्लीयरेंस के भुगतान कर दिया गया। और बाजार मूल्य व रॉयल्टी राशि जुर्माना के रूप में काटकर रखने के बजाए सिर्फ रॉयल्टी की राशि काट लिया गया था। इसे भी खनिज विभाग में जमा नहीं कराया गया था।
वर्सन
हां पूर्व में ऐसे मामले की जानकारी मिली है, इसमें उच्च अधिकारियों के मार्गदर्शन में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बीके राजपूत, सहायक आयुक्त अजाक विभाग