राष्ट्रीय बागवानी मिशन की ओर से एक दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण का आयोजन कृषि विज्ञान केन्द्र अरणियां में आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में जिले के 100 से ज्यादा प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के उद्घाटन सत्र में केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ आर के दुल्लड ने परम्परागत से लेकर वर्तमान में आ रहे उच्च तकनीकी बागवानी के बदलाव को बिन्दुवार वर्णित किया और वर्तमान में नव निर्माणाधीन केवीके के बारे में संक्षिप्त परिचय दिया। कृषि विज्ञान केन्द्र अरणियां के वैज्ञानिक डॉ महेश चौधरी ने उच्च तकनीकी समय के साथ कैसे खेती में शामिल होती रही पर चर्चा की।
कार्यक्रम के आयोजक और राजस्थान राज्य के राष्ट्रीय बागवानी मिशन के उप निदेशक डॉ आर एस राणा ने बोर्ड की ओर से दी जाने वाली विभिन्न बागवानी योजनाओं की जानकारी विस्तार पूर्वक दी और प्रशिक्षण में उपस्थित सभी नवाचारी कृषकों से अपनी आय के आधार पर विभिन्न योजनाओं को अपनाने का आहृवान किया।
प्रशिक्षण में इंटरनेशनल हार्टीकल्चर इनोवेशन एंड ट्रेनिंग सेंटर दुर्गापुरा जयपुर के चीफ ट्रेनर डॉ सत्य नारायण चौधरी ने हॉलैंड में संरक्षित खेती की शुरुआत कब एवं कैसे हुई से लेकर मुल्य संवर्धन तक का प्रस्तुतिकरण दिया जिसमें उच्च तकनीकी बागवानी में तीन माह का खीरा, छह माह का चैरी टोमैटो, नौ महीने की रंगीन शिमला मिर्च उत्पादन करने का आह्वान किया। सभी फसलों को उगाने से पहले प्रो ट्रे में निर्जमिकृत कोकोपिट डाल एक-एक बीज डाल पौध तैयार कर उसे उठी हुई क्यारी पर लगाकर विभिन्न फसलों को उगाने की विधियों को अपनाने पर जोर दिया।
संरक्षित संरचनाओं में विभिन्न कट फ्लॉवर्स डच रोज, जरबेरा, कराइसेनथिमम, कारनेशन, लिलियम, को उगाने की विधियों को सविस्तार वर्णित किया गया। किसानों को समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन, समन्वित किट प्रबंधन, तुड़ाई पश्चात प्रबंधन एवं मुल्य संवर्धन पर प्रस्तुतिकरण दिया। सीकर उद्यान विभाग के ए. आर. ओ. मोहन बडिवाल बागवानी विषय विशेषज्ञ राष्ट्रीय बागवानी मिशन की विभिन्न योजनाओं की जानकारी विस्तार पूर्वक दी।